वाह भाई क्या ग़ज़ब की सृजन-क्षमता है—
मुरादाबाद पुलिस से मेरा एक सवाल है, क्या वह मुस्लिम या अन्य किसी धर्म के त्यौहार पर सरकारी वैन पर इस्लामिक झंडा या उनसे जुड़े धार्मिक पोस्टर लगायेंगे.?
ईरान के इस ढाई फिट लंबे 'शाहेद ड्रोन' का अमेरिका और इज़राइल तोड़ नहीं निकाल पा रहे हैं, अब अमेरिका ने इस ड्रोन से निपटने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मदद की भीख मांगी हैं, आख़िर क्या हैं इस शाहेद ड्रोन में? इसकी कीमत और मार कितनी है? आईए समझे
ईरान के शाहेद ड्रोन की कीमत मात्र 16 लाख रुपए से 40 लाख रुपए के बीच हैं, इसकी लंबाई भी मात्र ढाई फिट हैं, ईरान जब भी शाहेद को दागता हैं तबाही मच जाती हैं क्योंकि यह 1000 किलोमीटर से 2500 किलोमीटर तक पहुंच सकता है, इसे सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है क्योंकि जब यह फटता है तो इसमें से ज्वलनशील पदार्थ निकलते हैं।
अमेरिका के ड्रोन इस ड्रोन को इंटरसेप्ट भी नहीं कर पा रहे हैं, अमेरिका अपने 36 करोड़ की लागत से बने ड्रोन के माध्यम 16 लाख रुपए वाले इस शाहेद ड्रोन को पकड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन यह पकड़ में नहीं आ पा रहा है, जो कि अब अमेरिका ही नहीं सैकड़ों देशों का सिर दर्द बन गया है, और अमेरिका अपने हज़ारों करोड़ रुपए के ड्रोन फोड़ने के बाद भी इसे इंटरसेप्ट नहीं कर पा रहे हैं, अब अमेरिका यूक्रेन से भीख मांग रहा है कि प्लीज़ इस शाहेद ड्रोन का तोड़ निकालने में मदद करें।
पहली तस्वीर आमिर की है। दूसरी तस्वीर में आमिर के परिजन विलाप कर रहे हैं। 28 वर्षीय आमिर ट्रक चालक थे। राजस्थान के भिवाड़ी में उनकी हत्या कर दी गई। आमिर के परिवार का आरोप है कि बजरंग दल से जुड़े गौ रक्षकों ने उनकी गोली मारकर हत्या की है।
आमिर हरियाणा के पल्ला गांव के रहने वाले थे, वो अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। आमिर अपने पीछे दो वर्षीय बेटी छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी गर्भ से हैं। आमिर की एक बहन की ईद के बाद शादी होनी थी। लेकिन दरिंदों ने इस परिवार से तमाम उम्र के लिए खुशियां छीन लीं।
आमिर के परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ मुस्लिम होने के कारण निशाना बनाया गया और बाद में इस हत्याकांड को तर्कसंगत ठहराने के लिए आमिर को गौ तस्कर बता दिया। इस मामले मे पुलिस ने शुरुआत में गोली लगने की बात से इनकार किया और उनकी चोटों का कारण पत्थरबाजी बताया, जबकि परिवार का कहना है कि आमिर के सिर में गोली मारी गई।
इस मामले में पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों और बजरंग दल के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सवाल फिर वही है कि सरकार इन आतंकियों के खिलाफ कब ऐसा एक्शन लेगी जो नज़ीर बन जाए। गौआतंकियों द्वारा गाय के नाम मार दिया जाने वाला आमिर पहला शख्स नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में कई लोगों की तथाकथित गौरक्षकों ने हत्याएं की हैं। लेकिन सरकार ना तो इन गौआतंकियो के घरों पर बुलडोजर चलाती है, ना इनका एनकाउंटर करती है, ना इन आतंकियों पर UAPA लगाती है।
होली, हरासमेंट, अनैच्छिक हत्या और उत्तम नगर, दिल्ली।
सस्ते और नफरती हिंदुत्ववादी कीबोर्ड यौद्धाओं द्वारा सोशल मीडिया पर एक झूठी कहानी फैलाई जा रही है, कि एक 7 साल की बच्ची ने गलती से रंग डाल दिया और उसके बाद मुसलमानों ने हमला कर दिया।
लेकिन, इलाके के लोगों के मुताबिक, मामला तब शुरू हुआ जब एक युवक ने मुस्लिम महिला के साथ बदसलूकी की, उसके शरीर को जबरन छूने की कोशिश की, बिना उसकी मर्ज़ी के रंग लगाया, तब दोनों पक्षों के बीच झगड़ा बढ़ गया और मामला हिंसक टकराव में बदल गया।
इस टकराव में, तरुण की जान चली गई, इसके बाद सोशल मीडिया पर पूरी घटना को एक भ्रामक तरीके से पेश किया जाने लगा, वास्तव में इसकी शुरुआत महिला के खिलाफ उत्पीड़न की घटना के ही रूप में हुई थी।
जब सद्दाम हुसैन को फांसी के लिए ले जाया जा रहा था, तब अमेरिकी सैनिकों ने उनसे पूछा कि उनकी अंतिम इच्छा क्या है।
सद्दाम हुसैन ने जवाब दिया, "मुझे मेरा कोट दो ताकि मैं उसे पहन सकूं।"
उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें एक कोट दिया गया। एक सैनिक आश्चर्यचकित होकर बोला, "आपने कोट क्यों पहना है?"
सद्दाम हुसैन ने जवाब दिया, "आज बहुत ठंड है, कहीं ऐसा न हो कि मेरा शरीर ठंड से कांपने लगे और इराक के लोग यह सोचें कि उनका नेता मौत के डर से कांप रहा है।"
सद्दाम हुसैन इतिहास आपको सदा याद रखेगा।
कुर्दों ने भी अमरीका, इजरायल की मदद से किया इंकार
__________________________
ट्रम्प और नेतन्याहू किसी भी तरह ईरान में सिविल वॉर जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं और कुर्दों तथा बलूचों को हथियार देने की बात की जा रही थी। बलूचों ने पहले ही मना कर दिया और अब कुर्दों ने बयान ज़ारी करके कहा है कि उन्हें इराक़ का अनुभव याद है, वे अमरीका-इजरायल के खेल में शामिल नहीं होंगे।
रहा सवाल ईरानी जनता का तो वह लाखों की संख्या में सड़क पर है, लेकिन भगोड़े पहलवी या अमरीका के लिए नहीं, अपने मुल्क, अपने रहबर के लिए।
असल में अमरीका फँस गया है। सैकड़ों बच्चों, औरतों और मर्दों को मार सकता है वह लेकिन ईरान की अना को नहीं और बदले में अरब मुल्कों में दशकों की मेहनत और खरबों डॉलर से बने उसके बेस तबाह हो चुके हैं।
जरा सोचो एकबार की पुलिस कार्यवाही में इस असामाजिक तत्व की सारी नेतागिरी, हेकड़ी, अकड़, धौंस धरी की धरी रह गयी और ये तब की हालत है जब सरकार इनके मनपसंद की है।
एकबार जब सरकार बदलेगी और पुलिस बिना किसी दबाव के निष्पक्ष कार्यवाही करने लगेगी, तो इसे संविधान का पाठ कितने अच्छे से याद होगा।
अभी थोड़ी देर पहले ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के ट्विटर अकाउंट पर एक पोस्ट की गई है जिसमें लिखा है " ज़ायोनी शासन (इज़राइल की सरकार) ने बड़ी गलती की है, और आगे चलकर इसके बुरे नतीजे सामने आएँगे जिससे वह मुश्किल में पड़ जाएगी।”
मैं इस पोस्ट को पढ़कर सोच में भी पड़ गया हूं और शायद आप भी जाए।
अरे 8वीं फेल संघी खाकी मकोड़े। ईरान का हिंदुओं से क्या लेना देना? ये नफ़रती @AMISHDEVGAN ज़बरदस्ती करीमी के मुंह में अपने शब्द ठूंस रहा है जबकि करीमी कह रही है उन्हे अमेरिका के खिलाफ पढाया जाता था। इस मूर्ख को ये नहीं पता कि दुनिया के बड़े देशों में हिंदु शब्द पर चर्चा तक नहीं होती। खुद पीएम मोदी विदेश में जाकर खुद को बुद्ध के देश का बताते हैं ना कि किसी हिंदू देवता के देश का। लेकिन तेरी नफ़रत लाइलाज है। लड़ाई ईरान इजराइल अमेरिका की चल रही है और ये सूअर का बच्चा हिंदु एंगल घुसेड़ रहा है। तुझे स्व राजीव त्यागी ने सही तो कहा था तू वही है।
जिन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं की चिंता हो रही थी उनके लिए ख़बर है कि "वहाँ की सरकार ने दो हिंदुओं को मंत्री और एक को सदन का स्पीकर बनाया है "
: अशोक कुमार पांडेय, लेखक
अरे भाई ये खबर तो सूत्रों के हवाले से मत लिखिए। वीडियो भी दिखा रहे हैं। क्या बाकी स्टॉल के भी कनेक्शन कट गए हैं? दिल्ली वालों भारत की साख का सवाल है। अपना अपना जनरेटर लेकर दौड़ो भारत मंडपम और जोड़ दो गलगोटिया के स्टाल से जनरेटर के तार और रौशनी कर दो। याद करो स्वदेश में शाहरूख़ ख़ान ने क्या किया था, आज दिल्ली को दिखा देने का मौका आया है।
पहले मुस्लिम छात्र ऐसा आरोप लगाते थे, कोई कुछ नहीं कहता था, आज दलित-पिछड़े छात्रों कि आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं, पहले हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत, अब जाती के नाम पर, सुनिए दिल्ली यूनिवर्सिटी कि छात्रा क्या कह रही हैं…
टी राजा सिंह खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ़ भाषण दे रहा है। ना कोई FIR, ना कोई चर्चा, ना कोई विरोध, ना कोई कार्रवाई…
सोचिये कितना आसान है इस देश में मुसलमानों के खिलाफ़ नफ़रत को हवा देना।
सोशलमीडिया पर वायरल वीडियो बनारस की बताई जा रही है,
आरोप है कुछ लोग खुदको अधिकारी बताकर मुसलमानों की दुकान का लाइसेंस चेक करने की बात कर रहे थे।
लोगों ने आईडी कार्ड माँगा तो अभद्रता करने लगे।
फिर जब जनता ने एकसाथ विरोध किया तो दुम दबाकर भागे।
@Uppolice से अनुरोध है मामले की जाँचकर और संज्ञान ले।
"जिम चले या ना चले, मैं इंसानियत दिखाता रहूंगा"
◆ कोटद्वार के दीपक कुमार ने कहा
◆ पिछले कुछ दिनों से दीपक कुमार के जिम में लोगों की संख्या घटती जा रही है
#DeepakKumar | Deepak Kumar | Kotdwar | #Kotdwar