“सिर साँठे रुख़ रहे तो भी सस्तों जान।”
खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि राजस्थान के त्याग, शौर्य और जीवंतता की जीवित पहचान है। यह प्रकृति के प्रति यहाँ की गहन आस्था, संतुलित जीवनदर्शन और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
मरुस्थल की कठोर परिस्थितियों में खेजड़ी सदियों से जीवन का आधार बनी रही है, कहीं छाया बनकर, कहीं चारा बनकर, तो कहीं पर्यावरणीय संतुलन की धुरी बनकर। अकाल के थपेड़ो में इसने भोजन रूपी सहारा देकर जनजीवन को संबल दिया और आज यह पर्यावरण संतुलन एवं किसानों की आजीविका का मजबूत आधार है।
खेजड़ी जीव-जंतुओं के लिए पोषण का स्रोत है और मानव जीवन के लिए आशा का वृक्ष। यह प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की उस परंपरा को जीवित रखती है, जिस पर राजस्थान की आत्मा टिकी हुई है।
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समय - 05:00 बजे
ओरण हमारे पूर्वजों की ऐतिहासिक धरोहर है, ओरण हमारा अभिमान है। आइए, हम सब मिलकर ओरण बचाने की लड़ाई लड़ें।
ओरण सिर्फ जमीन नहीं, हमारी पहचान, परंपरा और प्रकृति से जुड़ा जीवन है।
इसे बचाना मतलब अपनी जड़ों और भविष्य को बचाना है।
आइए मिलकर ओरण और जैसलमेर की इस धरोहर की रक्षा करें🌿🇮🇳
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ओरण केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, यह हमारी देवीय आस्था और जीव-जंतुओं के सुरक्षित जीवन का आधार है।
यहाँ प्रकृति, परंपरा और संरक्षण एक साथ सांस लेते हैं, ओरण हमारी सांझी धरोहर है।
हमारा ध्येय, इसका संरक्षण….
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हाकिम को इक चिट्ठी लिक्खो, सब के सब
और उसमे बस इतना लिखना, लानत है
इस से बढकर उस पर लानत क्या होगी
बोल रहा है बच्चा-बच्चा, लानत है !
जिस दीवार पे उसके वादे लिक्खे थे
हमने उसके नीचे लिक्खा, लानत है !
#ओरण_बचाओ_जैसाण_बचाओ@TheTribhuvan@arvindchotia@UmmedaRamBaytu