@jitu_rajoriya मुलायम, कल्याण सिंह को पार्टी में लेना
सपा मुजफ्फरनगर दंगे के समय सैफई महोत्सव हो
मुलायम मोदी को प्रधानमंत्री बनाए
मुलायम मोहन भागवत के साथ खाना खाये
शिवपाल यादव योगी के संरक्षण में रहे
अपर्णा भाजपा ज्वाइन कर लें
अखिलेश पर कभी कार्यवाही न हो
फिर भी सपा सेक्युलर रहेगी बसपा नहीं
साक्षी जोशी- ब्राह्मण
रविश कुमार - ब्राह्मण
पुण्य प्रसून वाजपेयी - ब्राह्मण
अभिसार शर्मा - ब्राह्मण
अभिनव पांडेय - ब्राह्मण
अभिषेक उपाध्याय - ब्राह्मण
बृजेश मिश्रा - ब्राह्मण
प्रज्ञा मिश्रा - ब्राह्मण
अजीत अंजुम - भूमिहार ब्राह्मण
अशोक पांडेय - ब्राह्मण
आलोक जोशी - ब्राह्मण
प्रभाकर मिश्रा - ब्राह्मण
सुभांकर मिश्रा - ब्राह्मण
सुमित अवस्थी- ब्राह्मण
ये वो नाम है जिनको बीजेपी का विरोध करना है बाकी कुछ नहीं
- जब जेएनयू में ब्राह्मणों भारत छोड़ो के स्लोगन लिखे जाते है इनके मुंह में दही जम जाता है
- जब बिहार में ब्राह्मणों के सामूहिक नरसंहार की बात की जाती है तब उनके मुंह में दही जम जाता है
- जब तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूता चार तब इनके मुंह में दही जम जाता है
- जब नारा लगता है ब्राह्मणों की छाती पर विरसा फूले आंबेडकर के नारे लगते है तब इनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता
सच तो यह है कि इन जैसे ब्राह्मणों ने भारत का सबसे ज्यादा नुकसान किया है !!
लाल टोपी के सरदार, ज़रा ध्यान से सुनो....
ताकि दिमाग़ में भरी गलतफ़हमियों का पर्दा हट जाए। ज़रा देख लीजिए, लोकतंत्र के महानायक मान्यवर कांशीराम साहेब जी और सामाजिक परिवर्तन की महानायिका बहन कुमारी मायावती जी का सामजिक व राजनीतिक कद कहाँ है!
राष्ट्रनिर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के बाद बहुजन समाज को राजनीतिक चेतना, स्वाभिमान और सत्ता में भागीदारी का मार्ग दिखाने वाले महानायकों में मान्यवर कांशीराम साहेब जी और बहनजी का स्थान ऐतिहासिक है। इसलिए बोलने से पहले इतिहास पढ़िए, तथ्यों को समझिए और अपनी भाषा पर संयम रखिए। बहुजन समाज अपने महापुरुषों और अपने स्वाभिमान का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा। और हाँ, अपने बाप जी का कद भी देख लेना मुख्यमंत्री बन गये मान्यवर साहेब और बहनजी के बदौलत।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मान्यवर कांशीराम साहेब जी के योगदान और बहुजन आंदोलन की ताकत को नज़रअंदाज़ करके कोई अपना राजनीतिक इतिहास नहीं लिख सकता।
याद रखिए, बहुजन महापुरुषों का सम्मान हमारे स्वाभिमान का सवाल है। जय भीम! जय मान्यवर साहेब! जय बहनजी! हाथी नहीं, स्वाभिमान है! 💙🐘
दीपशिखा इन्द्रा
(लेखिका, एक्टिविस्ट बसपा दिल्ली)
#BSPMission2027
#bsp
@bspindia@AnandAkash_BSP@IshuAnandBSP@satishmisrabsp@yadavakhilesh
बहन कुमारी मायावती जी ने रघुप्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया को जेल में डालने का काम किया वही समाजवादी पार्टी ने राजा भैया को यह कहकर जेल से छुड़ाने का काम किया कि राजा भैया तो बहुत सीधे और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं।
इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी ने रघुप्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को अपनी सरकार में मंत्री तक बनाया।
ये वीडियो उस समय का है जब रघुप्रताप सिंह उर्फ राजा भैया जेल से रिहा हो रहे थे तब समाजवादी पार्टी के समर्थक नारे लगाते हुए कह रहे थे कि “जेल के ताले टूट गए, राजा भैया छूट गए”
पूछना ये था
CAA/NRC प्रदर्शन के वक्त जिन मुसलमानों को दिल्ली पुलिस ने बर्बरता पीटा था, उस वक्त कितने प्रोटेस्टर को लेकर राहुल गांधी ने प्रैस कांफ्रेंस की थी..!
समाजवादी छात्र सभा व कांग्रेस के #NSUI के छात्रों को अखिलेश यादव और राहुल गांधी की दी हुई लॉली पॉप तन्यमंता से चूसनी चाहिए,
रंगमंच की कलाकार छात्रा अपनी गुड्डी पटाखा #NehaBora राजपूत जो कभी छात्र संघ चुनाव तक ना लड़ीउसे को इंडिया ब्लॉक के प्रमुख नेताओ में जगह मिली
#Baba_Manish
काफी कह रहे है कि औवेशी व आप लोग इस उथल पुथल में क्यो शामिल नही है। हमारा कहना यह है कि;
"भारत मे अम्बेडकरवादियो का मूर्ख बनाना मुश्किल है। जो आँख, कान और दिमाग बन्द करके हर जगह मुर्दाबाद करना शुरू कर दे।।
वास्तव में यह उथल पुथल फर्जी है। भाजपा द्वारा ही करवाई जा रही है। जिससे बड़े मुद्दों पर से ध्यान हटाया जा सके"
बड़े मुद्दे क्या है?
1.रोजगार नही है।
2.शिक्षा का बुरा हाल है।
3.UGC गाइडलाइंस से ओबीसी का ध्यान हटाया जा सके। ओबीसी आरक्षण की सीमा बढ़ाना।
4.प्राइमरी स्तर के जो लाखो स्कूल बंद कर दिए गए, उनपर चर्चा न हो सके।
5.अनुसुचित जातीयो/जनजातियों पर जिस प्रकार सवर्ण जातियो के संगठन प्रहार कर रही है व उससे सम्भावित मिलने वाले पलटवार से होने वाली जातीय सँघर्ष। ऐसी स्तिथी में नुकसान भाजपा को ही है।।
6.अमरीका द्वारा मोदी सरकार को बार बार चैलेंज देना।
7.विदेश नीति में भारत की लगातार हो रही बेइज्जती।
8.महंगाई लगातार बढ़ना। डॉलर 100 तक पहुच रहा है।
ऐसी वास्तविक मुद्दों पर विपक्ष गायब है।। एक शब्द उनके मुंह से नही निकलता है। न संसद में इन सभी पर बहस करते है।
आपको एक उदाहरण दूँगा;
"धुर्व राठी भारत मे है। आराम से घर पर है।।चूँकि अब सिद्ध हो चुका है कि ध्रुव राठी भारत का नागरिक है। उसकी सैकड़ो ऐसी वीडीओ है जो सीधा सरकार पर ऐसा प्रहार है जो देश मे हो तो उसपर कई केस बनते है। बाद में कोर्ट में सिद्ध करता रहे लेकिन केंद्र सरकार के पास इतना मेटेरियल है की उसे अंदर आराम से कर सकती है।।लेकिन भाजपा उसे कुछ नही कह रही। ऐसा लग रहा है कि;.
"वो आया नही है बल्कि बुलाया गया है"
जो खा पीकर आराम से जर्मनी वापस चला जायेगा।
ज्ञानेश कुमार मामले में केवल दो बातें विवादित है।
1.पहला SIR का समय कम है। 1 साल होना चाहिए।
2.दूसरा फॉर्म 6 , जो कि उनके अधिकारक्षेत्र से बाहर था। उसमे भी ऑनलाइन में बाप दादा पिता कें डेटा को क्लिक करने में 3 ऑप्शन के साथ चौथा "स्किप" का जोड़ देते तो भी चल जाता क्योंकि यह ऑप्शनल था लेकिन फार्म आगे नही बढ़ रहा था जिसके कारण मेंडेटरी हो गया। ज्ञानेश कुमार ने अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर यह जोड़ा इसलियर उंसकी जवाबदेही बनती है क्योंकि "नियम की अवहेलना" पूरे सिस्टम को बर्बाद कर देती है।। जब नियम है कि यह अधिकारक्षेत्र संसद का है तो उसमे स्वयं निर्णय नही ले सकते।
लेकिन यह कहना मूर्खता है कि पूरी प्रक्रिया धांधली हुई।
3.SIR के समय बीएलओ गलियों में हल्ल्ला कर करके कह रहे थे किसी ने फॉर्म जमा नही किया। करवा दो। बीएलओ मेरे घर 7 बार आया। बल्कि जब लिस्ट आ गयी, उंसके बाद दो वोट पर ऑब्जेक्शन आया। यह ऑब्जेक्शन फार्म 6 का ही था। उस बीएलओ ने कम से 20 बार मुझे कॉल करके कहा कि भाईजी करवा दो। मेने फिर उसे अपनी भाभी के पिता का वोटर नम्बर मंगवाकर दे दिया।।
4.आरोप है कि 13 करोड़ वोट फर्जी तरीके से कटे। इसिपर उदाहरण दूँगा;
"मेरे रिश्तेदार बीएलओ को एक मुस्लिम एरिया मिला हुआ था। नगर निगम के चुनाव थे। कुल 1236 वोट उंसकी लिस्ट में थे। 428 वोट ऐसे थे जो उंसकी लिस्ट में भी थे। व उसी एरिया के अन्य बूथों की लिस्ट में भी यह वोट थे।। मतलब सीधा 25% वोट 3 लिस्ट में फर्जी थे। इस SIR में वो हट गए।।
5.एक मित्र कह रहे थे कि दलित व मुस्लिम के ही सबसे ज्यादा वोट कटे। जबकिं यह दोनो वर्ग ही भारत मे ऐसे वर्ग है जो वोट पर कम्प्रोमाइज नही करते। मेरी एक अन्य रिश्तेदार बता रही थी कि मुस्लिम एरिया में उंसकी ड्यूटी थी।। वँहा सैकड़ो केरल, बैंगलोर, मुम्बई में मजदूरी के लिए गए हुए मजूदरी छोड़कर अपना वोट बनवाने आये हुए थे। बल्कि उस एरिया में;
"जो स्थाई बीएलओ था। वो 3 दिन से कॉल नहीं उठा रहा था। एक मुस्लिम व्यक्ति ने उसकी शिकायत कर दी। शिकायत डीएम तक गयी, डीएम ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए और उस हिन्दू बीएलओ के खिलाफ एफआईआर हो गयी"
6.इसलिए 13 करोड़ वोट कट जाना। मुझे फर्जी मुद्द्या लगता है। क्योंकि;
"वोट पर एकाधिकार बीएलओ है। बीएलओ ही किसी का वोट काट सकता है या जोड़ सकता है। अब बीएलओ भी इतने डर में इस SIR में रहे कि एक एक घर 4 से लेकर 10 बार तक गए। बल्की लिस्ट जारी होने के बाद भी काफी समय दिया गया कि किसी का वोट कटा है तो उससे पुनः बीएलओ ने जाकर सम्पर्क किया। बीएलओ ने इस बार काफी ज्यादा मेहनत करी है"
केवल "SIR की समयसीमा" व "फॉर्म 6" विवादित है। उसमे भी "फार्म 6" को लागू करना विवादित है। बाकी जिसका इस बार 18 साल की उम्र में वोट बनना है, उंसके पिता का वोट 2002 की SIR में न हो। यह मुमकिन नही है।।
विकास कुमार जाटव।
2024 में बना हुआ मोमेंटम स्वयं अपने पैरो
से रौंद रहे हैं। जिस PDA के मुद्दे पर राज्य की आधी से ज्यादा सीटों पे कब्जा हुआ उस PDA की परिभाषा ही पूरी तरह से बदल दी गई। पवन पांडे जो कम से कम 20 हजार से हारेगा वो 20 और सीट ले डूबने के लिए पूरा जोकर बनाकर खड़ा कर दिया है।
बेंगलुरु में खड़े होकर परिसीमन का विरोध करने का मतलब है संविधान के ऊपर पैर रखकर खड़े होकर संविधान बचाने की बात करना।
बेंगलुरु नॉर्थ सीट पर 32 लाख वोटर एक सांसद चुन रहे हैं अगल-बगल के राज्यों में 10 लाख लोग एक सांसद चुन रहे हैं। बेंगलुरू नॉर्थ के लोगों का नागरिक अधिकार आधा तिहाई रह गया है, इतनी सी बात लिबरल एक्टिविस्ट्स नहीं समझ पा रहे हैं।
अभिजीत भी इनके चक्करों में इतनी छोटी सी उम्र में पॉलिटिकल सुसाइड की कोशिश कर रहे हैं।
टैग करके बता रहा हूं @abhijeet_dipke परिसीमन का विरोध संविधान विरोधी बात है, ये मत समझो सिर्फ छोटी-मोटी गलती है।
जब आप परिसीमन का विरोध करते हैं तो उसके साथ ही घोषित करते हैं कि आप एक तमिल नागरिक के बराबर दो बिहारी नागरिक मानते हैं।
यानी बिहार के व्यक्ति को तमिल का आधा मानते हैं।
7.5 करोड़ की आबादी के लिए 40 सीट और 14 करोड़ की आबादी के लिए भी 40 सीट की इस अन्यायवादी स्थिति को बनाए रखने पर यकीन मानते हैं।
केरल और हरियाणा की आबादी लगभग बराबर है केरल में 20 लोकसभा है और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं हरियाणा में 10 लोकसभा है, अभी ही दोगुना अन्याय हो रहा है।
उत्तर पश्चिम दिल्ली के 30 लाख वोटर एक सांसद चुन रहे हैं और उत्तर पश्चिम राज्यों में कई जगह 3 लाख वोटर एक सांसद चुन रहे हैं फिर भी जहां आबादी बहुत कम है समझा जा सकता है, एक दो सीट का प्रिविलेज दिया जा सकता है। मगर साउथ के स्टेट में तो ये स्थिति नहीं है, गोवा छोड़ किसी की आबादी करोड़ से कम नहीं है; पूरा क्षेत्रवादी सामंत का मामला है और उत्तर भारतीयों को बिहारी मजदूर मानने का मामला है। अपने से कमतर और आधा मानने का मामला है।
बिना परिसीमन के चल रही इस व्यवस्था में सिर्फ उत्तर भारत के साथ अन्याय नहीं हो रहा है बल्कि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे स्टेट के साथ भी अन्याय हो रहा है जहां कई सीट ऐसी हैं जिसपर 30 लाख लोग एक सांसद चुन रहे हैं और बाकी राज्यों में कई सीट ऐसी है जहां 10 लाख लोगों को ही एक सांसद मिल जा रहा है।
किसी स्टालिन या प्रकाश राज का एजेंडा पूरा करने में देश भर के 80% आबादी वाले राज्यों के खिलाफ मत चले जाइए।
@AshutoshRanka@SauravDassss समेत @Cockroachisback की पूरी टीम और @dhruv_rathee टाइम निकाल कर पढ़ें और इस पर्सपेक्टिव पर गौर करें।
सीटवार सुधार की सिफारिश करें, साउथ से अन्याय की झूठी कहानी या कहें उल्टी कहानी न बनाएं।
ओवरऑल अन्याय तो सिर्फ नॉर्थ के साथ हो रहा है मैथमेटिक्स अच्छी होगी, 2 मिनट में कैलकुलेट करके फिर निर्णय करें।
24 करोड़ आबादी वाले यूपी की 80 लोकसभा सीट है तो 7.5 करोड़ आबादी वाले तमिलनाडु की 40 सीटें ज्यादा हुई कि कम?
तमिलनाडु से लगभग दोगुनी आबादी बिहार की है दोनों की सीटें बराबर हैं, बताओ बिहार के लोगों का प्रतिनिधित्व अनुपात में आधा क्यों रहे?
हरियाणा दिल्ली और कर्नाटक तेलंगाना सबकी केस स्टडी करें, और समझने की कोशिश करें कि केरल तमिलनाडु के कुछ नेताओं के चक्कर में देश भर में दुष्प्रचार का हिस्सा न बनें।
यही स्वघोषित धर्मनिरपेक्ष बनने का नाटक करने वाले मेरे नेता को देखकर धार्मिक व धार्मिक राजनीति करने का झूठा आरोप लगाते हैं।
आपको आपकी आस्था मुबारक हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन आपके लोग उस नारे पर भी आपत्ति जताते हैं जो कारगिल के युद्ध के समय भी लगाया गया था भारतीय सेना द्वारा।
2022 में कांग्रेस-सपा का गठबंधन नहीं था। कांग्रेस ने 399 सीट पर चुनाव लड़ा था। रामपुर खास व फरेंदा में जीत दर्ज की। रामपुर में सपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा था।
प्रदेश की 4 सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी। 25 सीटों पर वह तीसरे नंबर पर थे। 399 सीटों में 387 सीटों पर प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
मुजफ्फरनगर की चरथावल पर कांग्रेस कैंडिडेट को 965 वोट, पीलीभीत शहर में 1042 वोट, बिसौली सीट पर 1089 वोट मिले थे। ये उस सीट पर पड़े नोटा से भी कम थे।
पार्टी को पूरे उत्तर प्रदेश में महज 2.33% फीसदी वोट मिला था। सपा को 32.06% थे। बीजेपी ने 41.29% वोट के साथ सरकार में आई।
अब जब ये कहा जाता है कि कांग्रेस बराबर की पार्टी है, आधे सीट मिलने पर ही गठबंधन करेगी तब समझ नहीं आता कि किस आधार पर यह बात हो रही। मतलब बात का कोई तो आधार होना चाहिए। हो सकता है कि ये प्रेशर बनाने की कोशिश हो। लेकिन प्रेशर भी तो तभी बनेगा जब कुछ दम होगा।
दानिश भाई क्या जरूरत थी यह सब करने की..
राहुल गांधी के सामने नंबर बढ़े चाहे न जनता के सामने क्या हो रहा है अपने कमेंट पढ़ लीजिएगा खुद समझ जाएंगे 😂
कुछ ज्यादा नहीं हो गया...🤫🫣
25 years of leadership. 25 years of dedication. 25 years of Seva ka Sankalp.
Since taking oath as the Chief Minister of Gujarat in 2001, Shri Narendra Modi has travelled a remarkable journey—from serving Gujarat to leading India as Prime Minister.
Through changing times and evolving challenges, his unwavering conviction, perseverance, and commitment to nation-building have remained constant.
Today, as we mark 25 years of public service, we celebrate a journey driven by one enduring spirit — Seva ka Sankalp, Rashtriya Kartavya and an unwavering commitment to a rising India.
Wishing Shri Narendra Modi ji continued strength and success in the service of the nation.
@narendramodi@PMOIndia
#SevaKaSankalp #25YearsOfSeva #PMModi #NarendraModi
#9_अक्टूबर_चलो_लखनऊ
बहुजन समाज पार्टी के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि (देहांत) पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बहुजन समाज के लोगो से विशेष अपील अधिक से अधिक संख्या में पहुंचे।
दिनांक : 9 अक्टूबर 2026,दिन शुक्रवार,समय: प्रातः से
स्थान: मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल, वी. आई.पी. रोड, लखनऊ
#9_अक्टूबर_चलो_लखनऊ
#जयभीम #BSP
#मिशन_2027
सपा + गठबंधन = 105 विधायक
भाजपा + गठबंधन = 288 विधायक
अखिलेश यादव को तीसरी राज्यसभा सीट के लिए मात्र 6 विधायक कम पड़ रहे थे फिर भी सपा ने तीसरा प्रत्याशी खड़ा ही नही किया ।
भाजपा को आठवीं राज्यसभा सीट के लिए 8 विधायक कम पड़ रहे थे फिर भी भाजपा ने अपना आठवा प्रत्याशी खड़ा किया और अब वो प्रत्याशी निर्विरोध चुना जा रहा है ।
लेकिन खबरदार जो किसी ने सपा को B टीम बोला ।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।