जब कोई पुरुष भीतर से टूटकर या ठानकर मौन हो जाता है, तो वह उन चीज़ों से भी दूरी बना लेता है जो कभी उसके लिए सबसे प्रिय हुआ करती थीं। यह उदासीनता हमेशा घमंड नहीं होती, कई बार यह थकान, आत्मसम्मान या अनकहे घावों का परिणाम होती है। तब वह चाहकर भी पहले जैसा नहीं रह पाता। ❤️🩹