24 बच्चों के लिए ऐसा खाना? शर्म आनी चाहिए…. ऐसी पतली दाल और पानी जैसी अरबी देख भड़कीं राज्य महिला आयोग सदस्य…
👉 क्या इस तरह से हर जगह मिड डे मील की रसोई पर जिम्मेदारों को ऐसा करना चाहिए?
लखनऊ:
सरकारी स्कूलों में बच्चों के निवाले पर डाका डालने वालों की अब खैर नहीं! उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला ने जब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में औचक छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। बच्चों को दिए जा रहे खाने की दुर्दशा देखकर मैडम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया!
24 बच्चों के लिए ऐसा खाना? शर्म आनी चाहिए:
निरीक्षण के दौरान डॉ. मीनाक्षी भराला ने खुद चम्मच उठाकर खाने की गुणवत्ता परखी। पतली दाल और पानी की तरह तैरती अरबी की सब्जी देखते ही उन्होंने अधिकारियों और रसोइयों की क्लास लगा दी।
तीखे सवाल: डॉ. भराला ने मौके पर मौजूद स्टाफ से पूछा, "ऐसी अरबी और ऐसी दाल क्या आपके अपने घर में बनती है? महज 24-34 बच्चों के लिए अगर इतना घटिया खाना बन रहा है, तो 100 बच्चों में क्या हालत होती होगी?
गंदी प्लेटें देख बिफरीं: -
खाने के साथ-साथ जब उन्होंने बच्चों की स्टील की प्लेटें देखीं, तो सफाई की धज्जियां उड़ी मिलीं। उन्होंने मैली प्लेट दिखाते हुए कहा— "इन गंदी प्लेटों में बच्चे खाना खाएंगे तो बीमार कौन पड़ेगा?
हफ्ते में दो बार भी बर्तन ठीक से साफ नहीं होते:-
वार्डन गायब, रजिस्टर नदारद... हटने की तैयारी!
छापेमारी के दौरान स्कूल की वार्डन मौके से नदारद मिलीं। जब डॉ. भराला ने स्टॉक और रजिस्टर की मांग की, तो स्टाफ बगलें झांकने लगा। मैडम ने मौके से ही आला अधिकारियों को फोन घुमाया और सख्त निर्देश दिए!
👉 क्या हर DM और महिला बाल विकास अधिकारी को ऐसा निरीक्षण करना चाहिए? इस पर आपकी क्या राय है कमेंट्स मे बताये
तालाब में रहने वाला बच्चा इक़बाल की वीडियो तो देखी होगी आपने अब इस बच्चे का इलाज़ गाजियाबाद के हर्ष हॉस्पिटल में हो सकता है।
अगर ये बच्चे को गाजियाबाद लाया जाए तो हर्ष हॉस्पिटल वाले बच्चे का इलाज़ फ़्री करेंगे बस दवाइयों का खर्च लेंगे बाकी हॉस्पिटल का चार्ज बैड का चार्ज नहीं लेंगे।
अगर ये वीडियो पश्चिम बंगाल के इक़बाल के परिवारों वालों तक पहुंच जाए तो वो इक़बाल को गाजियाबाद आके हर्ष हॉस्पिटल में इलाज़ करा सकते हैं!
हमीरपुर
➡कलेक्ट्रेट पर GEN-ALPHA के प्रदर्शन का मामला
➡इंस्पेक्टर राम कुमार ने स्कूली बच्चों को भगाया
➡बच्चों को ‘हट-हट’ कहकर कलेक्ट्रेट से भगा दिया
➡सदर कोतवाली के क्राइम इंस्पेक्टर हैं राम कुमार
➡स्कूल आने-जाने के लिए रोड की मांग पर प्रदर्शन
➡ग्राम पंचायत चंदूपुर के रहने वाले सभी ग्रामीण
@CMOfficeUP@UPGovt@ADGZonPrayagraj@IgPrayagraj@hamirpurpolice@CJP_for_India@dmhamirpurup
A 15-year-old just delivered one of the sharpest political speeches of the year.
Kiara Aggarwal of Springdales School, New Delhi, stood at the “Push the Envelope” Youth Conclave and said what most adults carefully avoid:
“Go Back Simon. Inquilab Zindabad. Quit India.”
These slogans didn’t create vote banks.
They created a revolution.
Then she dropped the real punch.
Today’s slogans work on the Illusory Truth Effect — repeat something long enough and familiarity starts masquerading as truth. The actual truth gets buried under the noise.
She called out the selective rage of the state:
When a 15-year-old girl faces the entire state machinery, FIRs are filed, apologies are forced.
But when a two-year-old is in danger?
Suddenly “Beti Bachao Beti Padhao” develops selective amnesia.
“Make in India” was promised.
What we got instead were leaks.
This is not rebellion.
This is a clear-eyed diagnosis from the generation that is supposed to inherit the slogans.
Slogans-based governance does not serve the nation.
It only serves the next election cycle.
Kiara didn’t just speak.
She held up a mirror.
Watch this girl carefully.
The next generation is not confused.
They are simply done being gaslit.
Jumlas aint working anymore.
India is done with propaganda governance.
Enough is Enough, hear the loudly said - “PM Modi finally made a 15 year old to apologise to him”, Did you hear that ⁉️ You better do.
#SlogansNotGovernance #YouthSpeakTruth #KiaraAggarwal #PushTheEnvelope
“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj