शासन (Adminstration) 3rd grade teachers को शिक्षा विभाग का कार्मिक मानता है लेकिन , बड़ी विडंबना है कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी ( सीबीईओ, DEEO ..) , 3rd grade teachers से अपनी काबिलियत के दम पर उच्च पदों पर पहुंच रहे कार्मिकों को प्रोत्साहित करने के बजाय पंचायत विभाग का कार्मिक मानकर RECOVERY करने के लिए दिन रात लगे हुए है , जबकि शिक्षा विभाग का सबसे उच्च अधिकारी (शिक्षा निदेशक, IAS ) 3Rd grade teachers को शिक्षा विभाग का कार्मिक मानने के साक्ष्य प्रस्तुत कर रहे हैं l
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साथियों,
आज पे प्रोटेक्शन के मुद्दे को लेकर रेसला प्रदेश अध्यक्ष गिरधारी जी गोदारा के नेतृत्व संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने माननीय निदेशक महोदय जी वार्ता की,
निदेशक महोदय जी वित्तीय सलाहकार को वार्ता में ही बुलाकर पुरा पक्ष सुनकर इस मामले में फील्ड में किए जा रहे रिकवरी आदेश एक बार होल्ड करवाकर वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगने का भरोसा दिया।
साथियों, सगंठन स्तर पर पूरा प्रयास है इस मामले में अच्छा प्रयास रहेगा।
इस दौरान जिला मंत्री गणेश चौधरी, देवेंद्र राहड़, लक्ष्मण गोदारा, मानक कड़वासरा सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।
जय संगठन जय रेसला
सादर गणेश चौधरी जिला मंत्री रेसला बीकानेर
एक सरकारी सर्कुलर से हड़कंप...
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 2 जून को एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कि तृतीय श्रेणी अध्यापकों को राज्य सरकार का कर्मचारी ना मानकर नहीं माना गया है और ऐसे जितने भी कर्मचारी अन्य उच्च पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्त हुए हैं और पे प्रोटेक्शन का लाभ लिया है उनके वेतन नियतन पुनः कर अधिक भुगतान वसूली के आदेश जारी करने की तैयारी की जा रही है।
इस परिपत्र के अनुसार राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों/ स्वायत्तशासी संस्थाओं/ स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं के कार्मिक राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं हैं, अतः ऐसे कार्मिक यदि सीधी भर्ती के माध्यम से राजकीय सेवा में नियुक्त होते हैं तो उन्हें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 के अंतर्गत पूर्व पद का वेतन संरक्षण(Pay-protection) देय नहीं होगा।
जिसके आधार पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों द्वारा कार्यालय स्तर पर कमेटियों का गठन करके सेवा-पुस्तिकाओं का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जिनमें ऐसे कार्मिक जो पूर्व में अध्यापक तृतीय श्रेणी में थे अथवा अन्य विभाग से अध्यापक तृतीय श्रेणी पर नियुक्त हुए, की सेवा-पुस्तिकाओं में वेतन-संरक्षण(Pay-protection) को त्रुटिपूर्ण और नियम विरुद्ध बताया जा रहा है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के दिनांक 14/3/11 के परिपत्र के प्रारंभिक शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन है एवं तृतीय श्रेणी अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के अतिरिक्त समस्त सेवा प्रकरण पैतृक विभाग अर्थात स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संपादित किए जाने हैं। अतः जिन अध्यापकों की नियुक्ति जिला परिषद/ पंचायत समिति के माध्यम से तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में हुई थी तथा वर्तमान में उनका पैतृक विभाग शिक्षा विभाग ही है।
उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक प्रकरण में निर्णय दिया है जिसमें पंचायती राज संस्थानों के सभी कार्मिकों को राज्य सरकार के कार्मिक माना गया है, ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रकार की वसूली के आदेश होते हैं तो सारे शिक्षक आंदोलन की राह पर जाएंगे।
आग्रह है इस आदेश को वापस लिया जाए।
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शिक्षक एवं विद्यार्थी हितों पर चोट बर्दाश्त नहीं—शैक्षणिक कैलेंडर में शीघ्र संशोधन हो : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की मांग
जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी शिविरा पंचांग 2026-27 शिक्षक एवं छात्र हितों के प्रतिकूल है। इस संबंध में महासंघ द्वारा शिक्षा सचिव एवं निदेशक महोदय को अवगत कराते हुए संगठन की मांगों को ध्यान में रखकर शिविरा पंचांग जारी करने पर सहमति बनी थी। किन्तु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जिन तीन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन सभी को नजरअंदाज कर दिया गया है।
संगठन की शिक्षा अधिकारियों से हुई वार्ता के दौरान अधिकारियों द्वारा ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक रखने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर संगठन ने राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार विगत वर्षों से दिए जा रहे ग्रीष्मावकाश में कटौती का विरोध किया तथा आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन का मार्ग अपनाने की बात कही। इसके पश्चात ग्रीष्मावकाश में किसी प्रकार की कटौती नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। किन्तु वर्तमान शिविरा पंचांग में 17 मई से 30 जून के स्थान पर 17 मई से 20 जून तक ग्रीष्मावकाश निर्धारित कर दिया गया है। संगठन का कहना है कि वार्ता में सहमति के बाद भी मनमाने आदेश जारी करना सरकार की छवि को धूमिल करता है।
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार शिक्षा विभाग, न्यायालय तथा अन्य कुछ विभाग विश्रामकालीन विभागों की श्रेणी में आते हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रीष्मावकाश के दौरान वेतन दिया जाता है तथा 30 के स्थान पर केवल 15 पी.एल. (प्रिविलेज लीव) ही देय होती है। ऐसी स्थिति में यदि ग्रीष्मावकाश में कटौती की जाती है, तो कर्मचारियों को अन्य विभागों की भाँति 30 पी.एल. प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीष्म ऋतु में भीषण गर्मी के कारण विद्यार्थी विद्यालय नहीं आते हैं, ऐसे में विद्यालय शीघ्र खोलने से विद्यार्थियों को कोई लाभ नहीं होगा। साथ ही, संगठन ने वार्ता के दौरान विद्यालयों का प्रातःकालीन समय (प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू करने की मांग की थी, जिस पर आश्वासन दिया गया था, किन्तु उसमें भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय मेलों, त्योहारों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा वर्ष में 2 अधिकृत अवकाश घोषित किए जाते थे, जिन्हें घटाकर 1 कर दिया गया है। यह भी अनुचित है।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, प्रदेश सभा अध्यक्ष संपत सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल, प्रदेश महिला उपाध्यक्ष सुषमा बिश्नोई, प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा सहित संपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कारण संगठन की उचित मांगों को सहमति के बाद भी दरकिनार किया गया है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने आग्रह किया है कि वार्ता के दौरान बनी सहमति के अनुसार—
ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून तक यथावत रखा जाए अथवा पी.एल. प्रदान की जाए, प्रातःकालीन विद्यालय समय 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू किया जाए, तथा प्रधानाध्यापक द्वारा घोषित अवकाश पुनः 2 किए जाएँ।
शिक्षक एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इन आदेशों में शीघ्र संशोधन किया जाना आवश्यक है। अन्यथा संगठन विवश होकर आंदोलन का मार्ग अपनाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
महेंद्र कुमार लखारा
प्रदेश महामंत्री
एबीआरएसएम, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा)
राजस्थान एकीकृत शिक्षक महासंघ का बड़े भाई @JATbera1 जी को का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। उम्मीद करता हूँ कि आपका यह दायित्व शिक्षकों एवं बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की मजबूती से पैरवी करेगा।
@NFUofficial1