वृथा वृष्टिः समुद्रेषु,वृथा तृप्तेषु भोजनम्।
वृथा दानं धनाढ्येषु ,वृथा दीपो दिवाऽपि च॥
—समुद्र में हुई वर्षा व्यर्थ है, भरपेट खाये हुए तृप्त व्यक्ति को भोजन कराना व्यर्थ है, धनाढ्य व्यक्ति को दान देना व्यर्थ है और सूर्य के प्रकाश में दीपक जलाना व्यर्थ है।
#हर_हर_महादेव 🙏🚩
सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उनके गाए मैथिली और भोजपुरी के लोकगीत पिछले कई दशकों से बेहद लोकप्रिय रहे हैं। आस्था के महापर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीतों की गूंज भी सदैव बनी रहेगी। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!
निज निज रुख रामहि सबु देखा।
कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा॥
भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ।
राजाँ मुदित महासुख लहेऊ॥
—सबने राम जी को अपनी-अपनी ओर ही मुख किए हुए देखा,परन्तु इसका कुछ भी विशेष रहस्य कोई नहीं जान सका।मुनि ने राजा से कहा 1/2
#ॐ_गुरूवे_श्रीहनुमते_नमः 🙏🚩
पहले इस्लामिक आक्रांताओं ने ग़ुलाम बनाया
फिर अंग्रेज़ी हुकूमत ने,
अब पुनः इस्लामिक जिहादी ज़र, जोरू और ज़मीन पर अपना वर्चस्व क़ायम कर ग़ुलाम बनाने में प्रयासरत है।
ग़ुलामी या स्वतंत्रता तय करना आपके हाथ में हैं।
शम्भु 🔱🚩
संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु।
बूड़ सो सकल समाजु चढ़ा जो प्रथमहिं मोह बस॥
भावार्थ:-शिवजी का धनुष जहाज है और श्री रामचन्द्रजी की भुजाओं का बल समुद्र है। धनुष टूटने से वह सारा समाज डूब गया, जो मोहवश पहले इस जहाज पर चढ़ा था॥
जय सियाराम 🙏🚩
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपद:।
शत्रुबुद्धिविनाशय दीपज्योतिर्नामोस्तुते॥
—ऐसे देवता को प्रणाम करता हूं,जो कल्याण-रोग मुक्त करते है,धन संपदा देते है,जो विपरीत बुद्धि का नाश करके मुझे सद मार्ग दिखाते है,ऐसी दिव्य ज्योति को मेरा परम नमन।
#ॐ_आदित्याय_नमः 🙏
#हर_हर_महादेव 🚩
बनिया में 52 बुद्धि होती है ऐसा कहावतें कहती हैं । बनिया बुद्धि बताने से पहले एक कथा मैंने सोशल मीडिया में पढ़ी है आप सभी के सामने प्रस्तुत कर रही हूं कृपया ध्यान से पढ़िएगा।
एक बनिये की बाजार में छोटी सी मगर बहुत पुरानी दुकान थी।
ऊसकी दुकान के बगल में एक बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी।
एक बहुत बड़ा कला पारखी बनिये की दुकान के सामने से गुजरा।
कला पारखी होने के कारण जान गया कि कटोरा एक एंटीक आइटम है और कला के बाजार में बढ़िया कीमत में बिकेगा।
लेकिन वह ये नहीं चाहता था कि बनिये को इस बात का पता लगे कि उनके पास मौजूद वह गंदा सा पुराना कटोरा इतना कीमती है।
उसने दिमाग लगाया और बनिये से बोला,--- 'लाला जी, नमस्ते, आप की बिल्ली बहुत प्यारी है, मुझे पसंद आ गई है।
क्या आप बिल्ली मझे देंगे? चाहे जो कीमत ले लीजिए।'
बनिये ने पहले तो इनकार किया मगर जब कलापारखी कीमत बढ़ाते-बढ़ाते दस हजार रुपयों तक पहुंच गया तो लाला जी बिल्ली बेचने को राजी हो गए और दाम चुकाकर कला पारखी बिल्ली लेकर जाने लगा।
अचानक वह रुका और पलटकर लाला जी से बोला--- "लाला जी बिल्ली तो आपने बेच दी। अब इस पुराने कटोरे का आप क्या करोगे?
इसे भी मुझे ही दे दीजिए। बिल्ली को दूध पिलाने के काम आएगा। चाहे तो इसके भी 100-50 रुपए ले लीजिए।'
कहानी में twist:
बनिये ने जवाब दिया, "नहीं साहब, कटोरा तो मैं किसी कीमत पर नहीं बेचूंगा,
क्योंकि इसी कटोरे की वजह से आज तक मैं 50 बिल्लियां बेच चुका हूं।'
दिल्ली वालों मुझे पता है आप सभी इ-रिक्शा के आतंक से प्रतिदिन अत्यधिक परेशान होते हैं,
अब इनके कारण मौतें,जाम,अतिक्रम हो रहे है
यदि आज आप इनके आतंक के ख़िलाफ़ नही खड़े हुए तो एक दिन ये आपके जीवन के अंत का कारण बनेंगे
आइए @sudhirchaudhary जी के साथ इस आतंक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाइए।