कभी-कभी इंसान इतना बेबस होता है कि जानता है कि वो बरबाद होने वाला है फिर भी वो कुछ नहीं कर सकता या वो इतना लाचार हो चुका है कि वो करने की हालात ही नहीं है ll
किसी ने पूछा कि जिंदगी किस उमर में समझ आती है ,
“मेरे हिसाब से ज़िंदगी तब समझ आत�� है जब हमें हँसना पड़ता है लेकिन हँसी आती नहीं…
और जब लोगों के सामने दिखाना पड़ता है कि हम खुश हैं,
तब असली ज़िंदगी की समझ होती है।”
कभी-कभी इंसान इतना बेबस होता है कि जानता है कि वो बरबाद होने वाला है फिर भी वो कुछ नहीं कर सकता या वो इतना ��ाचार हो चुका है कि वो करने की हालात ही नहीं है ll
"कभी हँसी, कभी आँसू, यही तो है ज़िंदगी,
कभी पास, कभी दूर, यही तो है बंदगी।
जिसे टूट कर चाहा, वही सबसे दूर निकला,
किस्मत की चाल थी या मेरी ही भूल निकली।"