आरक्षण किसी के कहने से समाप्त होने वाली चीज नहीं है। आरक्षण किसी को मिल रही खैरात भी नहीं है। आरक्षण संवैधानिक अधिकार है, जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं जब उनके साथ बैठकर संवाद किया जाएगा उन्हें भी समझ आएगा : @iChiragPaswan
-नीले अंडों से आजादी
-एससी-एसटी से आजादी
-आरक्षण से आजादी
-चन्द्रशेखर रावण को दे देंगे आजादी
-5हजार साल से पानी नहीं पीने दिया, इसबार भी नहीं पीने देंगे
-पानी नहीं पीने दिया, अब मूत पिलाएंगे
ये शब्द हैं उन लोगों के जो कल दिल्ली जंतर-मंतर पर आरक्षण ख़त्म करने के लिए गये थे। खुद को सवर्ण बोलते हैं और दूसरे लोगों से खुद को ऊंचा समझते हैं
आप लोग खुद देखिए इन लोगों की मानसिकता किस स्तर तक गिरी हुई है। बोलते हैं कि जातिवाद नहीं है लेकिन खुलेआम दूसरी जातियों को नीचा दिखा रहे हैं। कितना जहर भरा हुआ है इनके भीतर दूसरी जातियों को लेकर जिसकी कोई सीमा नहीं है
आज 21 वीं सदी के जिस दौर में पूरा विश्व विज्ञान व प्रौद्योगिकी की तरफ आगे बढ़ रहा है, ये लोग इस संकीर्ण नीच सोच से बाहर नहीं आ पा रहे हैं..!!😑
"देखो आरक्षण का मुहिम चलाकर इस बंदे ने लोगों को गुमराह करके मिलियंस में फॉलोअर्स इकट्ठे कर लिए हैं, लेकिन क्या आरक्षण हटेगा? तो आंसर इज़ नो!
और क्यों नहीं हटा सकते? वो इसलिए, क्योंकि आरक्षण हमें संविधान देता है। वही संविधान, संविधान के बेस पर PM, CM, राष्ट्रपति बनते हैं। वही संविधान जिसके बेस पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज बनते हैं, सब कानून पास होते हैं। तो आरक्षण भी हमें संविधान देता है। आरक्षण हटाने के लिए तुम्हारी नानी याद आ जाएँगी!
पता है तुमको आरक्षण हटाने के लिए सबसे पहले करना क्या होगा? ताकि तुमको जानकारी हो जाए—सबसे पहले तुमको संसद में जाना होगा संविधान संशोधन का। संविधान आज के डेट में कहता है संविधान संशोधन, अगर तुमको संविधान के साथ छेड़छाड़ करना है, तो सबसे पहले संशोधन करना पड़ेगा। किसके? आर्टिकल 368 के तहत। और अगर आरक्षण के साथ तुमको छेड़छाड़ करना है, उसमें संशोधन करना है, उसे हटाना है, तो तुमको बेटा 2/3 (दो तिहाई) बहुमत लोकसभा और राज्यसभा से बिल पास करना होगा। तब जाकर तू आरक्षण को छू पाएगा!
और दो तिहाई बहुमत पास करने के लिए तुम्हारे दादा ही नहीं, तुम्हारे परदादा भी आ जाएँ, यहाँ तक कि मोदी जी आ जाएँ लोकसभा-राज्यसभा में, तो भी बिल पास नहीं कर पाएँगे! कुछ अफवाहें चल रही हैं कि मोदी जी की सीटें होने वाली हैं, ऐसा है, वैसा है, लेकिन देखते हैं क्या होता है।
समझते हैं कि आरक्षण क्या है और आरक्षण क्यों दिया जाता है? आप लोग भी ध्यान से सुनो, एक्ज़ांपल से समझा रहा हूँ। मान लो कि एक पिता है, उसके चार बेटे हैं—A, B, C, D। ये चार बेटे हैं।
A जो है, बचपन से ही अच्छे स्कूल में पढ़ा, उसके पास किताबें, कोचिंग, पैसे, हर सुख-सुविधा है—रहने, खाने, पीने से लेकर सब कुछ उसके पास है।
B जो है, उसका भी थोड़ा समान ही है उसी के जैसा।
C है, उसके पास बहुत कम सुविधाएँ हैं।
D जो चौथा है, उसे गरीबी, सामाजिक भेदभाव, ऊँच-नीच, छुआछूत ना जाने कौन-कौन से कारण हैं, उसकी वजह से उसे पढ़ने का मौका ही नहीं मिला।
अब इन चारों बेटों को किसी भी परीक्षा में बैठा दिया जाए—चाहे कोई भी हो, IAS, PCS या कोई भी अदर एग्जाम क्यों न हो—उन चारों को उस एग्जाम में बैठा दिया जाए, तो क्या उनके नंबर सेम आएँगे? बताइए-बताइए? सेम आएँगे? तो आंसर इज़ नो!
बस यही असमानता को दूर करने के लिए आरक्षण लाया गया।
एक बंदा तो अलग ही लेवल का है! उसका कहना है कि 'आरक्षण की वजह से बच्चों के मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आते हैं, इस वजह से बच्चे सुसाइड कर रहे हैं। SC, ST, OBC के बच्चे कम नंबर में ही IAS, PCS सब कुछ बन जाते हैं और जनरल कैटेगरी के वैसे ही रह जाते हैं।'
अरे चाचा! अरे अंकल! अरे मेरे दोस्त! कम से कम आरक्षण के बारे में जानो!
मान लो कि कोई वैकेंसी आती है—SSC का हो, रेलवे का हो, IAS, PCS, कोई भी एग्जाम क्यों न हो। हम IAS का ही एक्ज़ांपल के तौर पर लेते हैं। मान लो उसमें 100 सीटें हैं। उन 100 सीटों में:
27 सीटें OBC की हैं,
15 सीटें SC की हैं,
7 सीटें ST की हैं,
और बाकी जितनी बच रही हैं—सब जनरल कैटेगरी की हैं।
अब सुनो, SC, ST, OBC मिलाकर कितने हो रहे हैं? 27 + 7 + 15 = 49 सीटें SC, ST, OBC की हैं। बाकी 51 सीटें जनरल (ओपन) कैटेगरी की हैं।
अब तुम्हारी लड़ाई, अगर तुम जनरल कैटेगरी से हो, तो तुम्हारी लड़ाई किससे है? SC से है क्या? नहीं न! ST से है क्या? नहीं न! OBC से है? नहीं! तुम्हारी लड़ाई उन 51 सीटों में है। तुमको अब उसमें टॉप करना है, उसमें ज्यादा नंबर लाना है; न कि SC, ST या OBC की सीटों में! बेटे, कम से कम जानकारी अच्छे से लिया जाता है। तुमको फाइट किसमें करना है? तो जनरल कैटेगरी से। तुम्हारे नंबर कम आ रहे हैं, तो किस वजह से आ रहे हैं? तो जनरल कैटेगरी से। समझ रहे हो?
कुछ पल्ले पड़ रहा है? अगर नहीं पड़ रहा है, तो बताओ और एक्सप्लेन करके बताऊँ, ताकि तुमको अच्छे से समझ में आए और तुम अपने यार-दोस्तों को भी समझा सको।
और आपका भी फर्ज़ बनता है कि इस वीडियो को हर उस व्यक्ति तक पहुँचाओ जिसे आरक्षण के बारे में पता नहीं है। शेयर दबाकर करो!
जय भीम!"
@Bharat_Yatra_
जहाँ संविधान की शपथ ली, आज वहीं संविधान का सम्मान बचाने बैठा हूँ।
मासूमों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।
जय भीम, जय भारत।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
यहां मैं तीन प्रसंग दिया हूं। एक रामायण से और दो प्रसंग महाभारत से।
रामायण में शंबूक एक शूद्र तपस्वी थे जो कठोर तपस्या कर रहे थे। जब एक ब्राह्मण के पुत्र की मृत्यु हुई, तो इसका कारण शूद्र द्वारा तपस्या करना बताया गया। इसके बाद राम ने शंबूक का वध किया।
कर्ण के पास अद्वितीय प्रतिभा और पराक्रम होने के बावजूद उन्हें बार-बार "सूतपुत्र" कहकर अपमानित किया गया। उनकी योग्यता से अधिक उनके जन्म को महत्व दिया गया।
निषाद पुत्र एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा माँगी, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। फिर भी उन्होंने स्वयं अभ्यास कर श्रेष्ठ धनुर्धर बनने का प्रयास किया। बाद में गुरु-दक्षिणा के नाम पर उनसे उनका अंगूठा माँग लिया गया।
अजित के अनुसार वाल्मीकि और वेदव्यास यह सब गलत लिखे हैं ?
दलितों के साथ शिक्षा में भेदभाव,पीछे मटकी और गले में झाड़ू आदि जैसा कुछ नहीं होता था। यह सब मनगढ़ंत है।
@ajeetbharti क्यों ?
@rajkumarbhatisp
भरत तिवारी को हर जाति धर्म के लोगो का भरपूर समर्थन मिला है यह मामला राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना है, किसी एक जाति के समर्थन से इतना बड़ा मुद्दा बनना संभव नहीं था। देश में अनेक घटना हुआ है, कभी इतना बड़ा मुद्दा नहीं बना।
भरत तिवारी को दलित पिछड़ा हिंदू मुस्लिम हर वर्ग का समर्थन प्राप्त हुआ है, भरत तिवारी के समर्थन में किसी भी जातीय महासभा का पंचायत नही हुआ था।
यह बहुजन के नाम पर एक जाति का महासभा है ,
यह जाति कौन सा है आपको पता होगा आपलोग बिल्कुल आनंद ले।। 😊
बिहार की मिट्टी की सौंधी खुशबू और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ‘ठेकुआ’ आज वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है। माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी द्वारा स्लोवाकिया की संसद के माननीय स्पीकर रिचर्ड रासी जी को बिहार का प्रिय ठेकुआ भेंट किया जाना हम सभी बिहारवासियों के लिए गर्व का क्षण है।
यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि बिहार की गौरवशाली परंपरा, सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मीयता का वैश्विक सम्मान है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज स्थानीय विरासत वैश्विक पहचान बन रही है और बिहार की मिठास दुनिया के दिलों तक पहुंच रही है।
इस देश में जब-जब बदलाव की बात होगी, न्याय व समानता की बात होगी....अम्बेडकरवाद ही उसका नेतृत्व करेगा✊🏻
इस देश में आम्बेडकरवादी विचारधारा व बाबासाहेब अम्बेडकर का मार्ग ही एकमात्र जरिया है जिसपर चलकर हम न्यायपूर्ण शासन स्थापित कर सकते हैं
यह तस्वीर आज दिल्ली एयरपोर्ट की है जहां जंतर-मंतर जाते वक्त काॅकरोच जनता पार्टी के संस्थापक Abhijeet Dipke ने बाबासाहेब अम्बेडकर की एक किताब को हाथों में पकड़े रखा
#cocroachjantaparty
मां के मरने के बाद और पिता काम पर चलें जाते है...
डेढ़ साल के भाई का ध्यान रखने के लिए रोज साथ ले जाती है कक्षा 9 की अस्मिता....💗
वाकई एक बहन मां होती है... 💗
बिहार के होनहार युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को उनकी विस्फोटक एवं ऐतिहासिक पारी के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 🏏🇮🇳
वैभव ने अपनी शानदार बल्लेबाज़ी से क्रिकेट जगत में नया इतिहास रचते हुए क्रिस गेल का 14 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। एक सीजन में 65 छक्के लगाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और अद्भुत खेल क्षमता का परिचय दिया है।
सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन की तूफानी पारी, जिसमें 5 चौके एवं 12 छक्के शामिल रहे, क्रिकेट प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय क्षण बन गया। साथ ही 16 गेंदों में अर्धशतक और इस सीजन में 600 रन पूरे करना उनकी निरंतर शानदार प्रदर्शन का प्रमाण है।
आपने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। आपकी यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
#VaibhavSuryavanshi #BiharPride #Cricket
सिर्फ 15 साल की उम्र… लेकिन बल्लेबाजी में ऐसा तूफान, जिसे देखकर दुनिया दंग रह गई।
Vaibhav Sooryavanshi ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। हैदराबाद के खिलाफ खेली गई उनकी 97 रन की विस्फोटक पारी सालों तक याद रखी जाएगी।
वैभव अब आईपीएल के एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन 15 मैचों की 15 पारियों में 65 छक्के जड़कर महान बल्लेबाज Chris Gayle का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।
वहीं, वैभव एक सीजन में दो बार 10-10 छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
#IPL2026 #RRvsSRH #RajasthanRoyals #SunrisersHyderabad #VaibhavSooryavanshi #IPLPlayoffs #ATCreative #AajTakSocial
आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ।
बिहार के क्रिकेट "इमोशन" के लिए सरकार स्पष्ट "विजन" के साथ "मिशन" मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
क्या आपको नहीं लगता Chennai Super Kings, Mumbai Indians और Kolkata Knight Riders की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए?
बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।
पटना में जन्मे ईशान किशन ने सबसे कम गेंदों में ODI double century लगाई। समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL debut करने वाले खिलाड़ी बने। और गोपालगंज के साधारण परिवार में जन्मे साकिब हुसैन की शानदार गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नज़रें हैं।
लेकिन एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को क्रिकेट में अब भी वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं।
मेरा हमेशा से यह सपना और प्रयास रहा है कि बिहार के युवाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले, हमारे खिलाड़ियों को भी world class infrastructure और support बिहार में ही मिलना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि अगर हमारे बच्चों को सही प्रेरणा और सुविधाएं मिलें, तो हमारे बिहार से बनने वाली टीम दुनिया की बेस्ट टीम होगी।
और मैं इस काम में बिहार के युवाओं के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा हूँ। बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपनी तरफ से unconditional support दूंगा।
बिहार मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, एक emotion है।
और अब वक्त आ गया है कि हमारी मिट्टी का talent मैदान पर दिखे।