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मिल जुल कर करें प्रयास, तो कहीं बच सकती हैं मुजफ्फरपुर के इस युवा की जान!
मुजफ्फरपुर: शहर के खबड़ा निवासी 25 वर्षीय यश राज पिछले लगभग पाँच महीनों से चीन के शंघाई डिटेंशन सेंटर में बंद हैं। परिजनों के अनुसार, यश मर्चेंट नेवी की MSC कंपनी में कार्यरत हैं। उनका जहाज तकनीकी खराबी के कारण चीन के एक बंदरगाह पर रुका था, जहाँ एक स्थानीय विवाद के बाद चीनी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
यश की माँ सीमा सिंह का कहना है कि 28 फरवरी 2026 से उन्होंने अपने बेटे की आवाज़ तक नहीं सुनी है। परिवार के अनुसार, बेटे की चिंता में उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है और डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह भी दी है। उनकी सबसे बड़ी इच्छा है कि एक बार बेटे से वीडियो कॉल पर बात हो सके।
पीड़ित परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय (MEA), विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है। परिवार का कहना है कि भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध कराकर यश राज की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए।
वहीं, स्थानीय लोगों ने भी इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसे साझा करने की अपील की है, ताकि मामला केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुँचे और यश राज की जल्द रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो सके.
(नोट: यह समाचार पीड़ित परिवार द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। संबंधित भारतीय अथवा चीनी अधिकारियों की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होना शेष है।)
#Yash #JusticeForYashRaj
In last 12 years @narendramodi done only one press conference in bjp office,who is accountable for this government ,is modi now thinks he is KING ,it's not acceptable.
Government must make law to must do press conference for government accountabilities.
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।
You don't have to pledge allegiance to a party to care about the country. Nuance isn't confusion—it's thinking for yourself.
Loyalty to values, not political brands. 👏
When selective outrage becomes the norm, silence speaks louder than words 🤐👇
"Protectors" when it suits the narrative, but completely silent when it matters most. Double standards at an all-time high
Loud on political agendas, silent on accountability. The math isn’t mathing
इन सुरक्षा कर्मियों को किसने कहा था इस धरना प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए खुद के डंडे से गाड़ियों के शीशे तोड़फोड़ करो ??
क्या यह आदेश गृहमंत्री अमित शाह जी को पता हैं ??
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।
Bhai log instagram ne ye reel delete karwa di kyuki isme inka sach dikh rha hai dehli police ka
Isko dbake share karo jitna ho sake ye saboot hai dehli police ka ghinona sach hai