@SrBachchan आप जिदंगी के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचे हो जो एक क्लाईमैक्स हें इसके आगे दुनिया की कोई सीढी नही जाती आप के चाहने बाले भी चाहते हे कि आप यही पर रहें जहां कोई सीढी न उतार सकें
@rajnathsingh परमादरणीय आप ने विलकुल ठीक कहा मे एक शेर के द्वारा सहमति बखान कर चुका हूं राहुल गांधी को पता होना चाहिए कि अब सल्तनत और रियासत का समय नही हे और न ही इंग्लैंड से कोई राजा बनकर आयेगा भारत मे अब लोकतंत्र हे जनता जिस को भेजेगी बही आयेगा सल्तनत का ख़्वाब छोड दें
@Gulzar__sahab अपनो ने ही इल्ज़ाम लगाये थे रिश्तो पर ।
साबित करने की गुस्ताखी गैरो ने करदी
। कन्नू खरे स।।।
इल्ज़ाम तो अक्सर रिश्तो पर ही लगते आये हे
बर्ना ये दुनियां हरदम पाक नजर आती ।
@Gulzar__sahab परमादरणीय यहां सबाल दुनियां का नही हें सबाल समाज और परिवार मे रोटी और भूख का भी नही है बल्कि पारस्परिक मतभेद,बैचारिक,पारिवारिक,सामाजिक,आर्थिक,और दैनिक जीवन और जीवन के स्टेटस मे असमानता,तनाव,आधुनिक युग की प्रतिद्वंदिता हम सब को खो नही रही बल्कि खारही हे ।
जिदंगी मे कडे संघर्ष और बड़े झंजबात हें
बढते राहो में पग पग धोखा और आघात हें
मंजिल के पहले सामने खडा बज्रपात हें
जन मानुष के संबंधो में बिकट बैर आपात हें
जहां भी देखो दुनियां में मारकाट और रक्त पात हें
जीना मरना यही हे क्यो कि जन्मो के संबंध जन्मजातहें
@umda_panktiyaan अपने मूल्यांकन से व्यक्ति खुश तो रह सकता परतुं अपनी कमियो को नजरअंदाज करता रहेगा और उसके संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण नही हो सकता। ।दूसरे के मूल्यांकन से व्यक्ति न केवल सजग रहेगा बल्कि दुश्मन से भी अच्छे बिचार और गुण व खूबियो की तुलना और प्रतिस्पर्धा करेगा