आपका नाम नितिन गडकरी है।
आप देश के परिवहन मंत्री हैं और आपको एथेनॉल से असीम प्रेम भी है।
20% एथेनॉल से शुरू हुआ “जनहित प्रयोग” अब 100% एथेनॉल तक पहुंच गया है।
जनता पूछ रही है - माइलेज घटेगी तो भरपाई कौन करेगा? इंजन पर असर पड़ेगा तो जिम्मेदारी किसकी होगी? पुराने वाहनों का क्या होगा?
लेकिन खैर , जनता सवाल पूछती रहे , नीति तो वही महान होती है जिसमें नुकसान आम आदमी का और प्रेजेंटेशन मंत्री जी का चमकदार हो।
आपकी सड़कें भी कमाल की हैं।
कागज पर स्पेस टेक्नोलॉजी से बनती हैं, उद्घाटन में वर्ल्ड क्लास दिखती हैं , और बारिश आते ही चार दिन में आत्मनिर्भर होकर हवा हो जाती हैं।
टोल टैक्स पूरा , सड़क अधूरी।
वादा एक्सप्रेसवे का , अनुभव ऑफ-रोडिंग का।
ऊपर से एथेनॉल ऐसा कि गाड़ी भी सोचती होगी मुझे चलाना है या प्रयोगशाला में जमा करना है?
लेकिन कोई बात नहीं।
दुनिया क्या कहती है , उससे मतलब नहीं।
इंसान को खुद की नजर में अच्छा होना चाहिए।
और अगर एथेनॉल , टोल और टूटती सड़कें भी खुश हैं , तो फिर विकास सच में हाईवे पर दौड़ रहा है।
FSSAI वालों आँखे खोलो लोगों का आरोप है कि ब्लिंकिट वाले एक्सपायरी डेट मिटा - मिटाकर लोगों को दूध बेच रहे है और तुम्हारे अधिकारी कुंभकरण निद्रा में सो रहे है।
अमेठी के इन नवयुवकों ने नवनिर्मित खराब क्वालिटी की सड़क से ठेकेदार को एक्सपोज किया,
इनको डराने के लिए FIR की गयी है, इनका तरीका गलत हो सकता है, लेकिन अच्छी सड़क किसको नहीं चाहिए? ये अधिकारी और नेता योगी जी की बदनामी कराने में लगे है।
क्या आदित्य शर्मा की जान की कीमत कुछ भी नहीं है,
अगर यही काम पाकिस्तान ने किया होता तो अब तक एयरस्ट्राइक हो चुकी होती।
लेकिन अमेरिका ने किया है, तो जाने दो।
वो दोस्त है साब का।
12 हजार करोड़ की सड़क पर दरारें नहीं आईं , विकास ने बस हल्की-सी अंगड़ाई ली है। जनता इसे भ्रष्टाचार समझ रही है, जबकि यह तो सड़क का “प्रीमियम वेंटिलेशन सिस्टम” है।
किसी को नहीं पता था कि इतने ज़हालत भरे दिन देखने पड़ेंगे,
अमेरिका ने भारतीय जहाज पर हमला किया, कोई बात नहीं।
लेकिन भारत ने जवाब नहीं दिया, जवाबी कार्रवाई नहीं की, ये बात पच नहीं रही है।
ये अच्छे दिन तो नहीं हैं।
पुलिस वालों के पास बहुत सीमित अधिकार होते है,
मुझे लगता है नागरिकों को लाठी डंडे से पीटने के बजाय, सीधा गोली मारने का आदेश होना चाहिए।
क्योंकि मंत्रियों के सामने तो यलोग चिरक देते हैं, कम से कम कहीं तो गुस्सा निकले।
एक लड़के ने बताया कि वह अपने परिवार को ट्रेन में बैठाने के लिए महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन गया था। ट्रेन दोपहर 12 बजे की थी लेकिन बाद में बताया गया कि वह 2 बजे आएगी।
लड़के ने प्लेटफॉर्म टिकट ले लिया था और परिवार के साथ इंतजार करता रहा। लेकिन ट्रेन लगातार लेट होती रही। शाम करीब 5 बजे वह परिवार को ट्रेन में बैठाकर वापस जाने लगा
तभी टीटी ने उसे रोक लिया और प्लेटफॉर्म टिकट दिखाने को कहा। उसने टिकट दिखाया तो टीटी ने कहा कि प्लेटफॉर्म टिकट 2 घंटे बाद एक्सपायर हो जाता है। इसके बाद उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया!
वीडियो में लड़के ने सवाल उठाया कि जब ट्रेन रेलवे की वजह से कई घंटे लेट हुई थी तो उसके इंतजार की जिम्मेदारी कौन लेगा??
उसने कहा कि उसने परिवार को छोड़ने के लिए वैध प्लेटफॉर्म टिकट लिया था, फिर भी उसे जुर्माना भरना पड़ा!
ये भी सवाल जायज है कि जब देरी रेलवे की तरफ से हुई थी तो उसकी सजा यात्री को क्यों मिली..?
"संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा रखूंगा"
"नागरिकों का सम्मान करूंगा"
शपथ के दौरान इन लाइनों को याद करके गर्मी में एक युवक को चिल्ड लस्सी पिलाते हुए पुलिसकर्मी।
आप सिर्फ एक बात बता दो,
कमेटी क्या जांच करेगी?
वीडियो में साफ साफ दिख रहा है कि पुलिस वाले ने मार पीट की है।
और वो आदमी कहां से आपको अराजक तत्व लग रहा है?
अपने बीवी बच्चों के साथ में है,
कहां से वो चेन स्नेचर लग रहा है?
बहाने मत बनाओ, कार्यवाही करो
अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड में 75 वर्षीय महिला को इलाज के लिए ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है,
कई देश दूरबीन लगा के देख रहे हैं और ऐसी व्यवस्था देख के दाँत के नीचे उँगली कूच दे रहे हैं।
शर्मनाक ये है कि इस अधिकारी पर कार्रवाई के बजाए, प्रशासन की ये दलील है कि गाड़ी का नंबर प्लेट टूटा था, कागज़ पूरे नहीं थे, रात में आ रहा था ... तो क्या आप उसे मारेंगे? उस अधिकारी से अभीतक सफाई तक नहीं मांगी गई है जो न्यूनतम है @CGPoliceDept@vishnudsai