लोग कहते हैं विरोध करने से आखिर क्या होगा ।
तो देख लो विरोध करने से ये होगा, भारी विरोध के बाद 22000 करोड़ का हेयर कट रोक दिया गया है।
इसीलिए विरोध करना जरूरी है।
New Delhi: जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान वायरल हुई 15 वर्षीय लड़की ने दावा किया कि उसे धमकाया गया और PM मोदी से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया. अब उसने दोबारा मोदी को सीधे निशाने पर लेते हुए पीछे नहीं हटने की बात कही है.
यह स्टेज पर इतना फेंक रहे थे कि ख़ुद मुख्यमंत्री सहित सब लोग हँसने लगे
रवि किशन जी आप सांसद हैं, कोई मसखरे थोड़े ही हैं!
और यह जो जनता को अंधा बुलाने की हिमाक़त की है आपने - उसका हिसाब होगा
टीकमगढ़ के स्वास्थ्य केंद्र में कलेक्टर के सामने CHO महिला मरीज का BP नहीं ले पाईं। कलेक्टर को खुद आकर मशीन पकड़कर सिखाना पड़ा। ना जाने यही हालत कितने स्वास्थ्य केन्द्रों की होगी
ये कोई छोटी बात नहीं है। जो बुनियादी जाँच नहीं कर सकता, वो गाँव के स्वास्थ्य केंद्र में कैस�� बैठा है? ट्रेनिंग कहाँ हुई? भर्ती कैसे हुई?गाँव के मरीज की जान इन्हीं हाथों में है। स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत यही है और जितनी कमिया और लाचारी स्वास्थ्य विभाग में है उतनी सायद ही किसी में हो ।
नई दिल्ली | हैरान करने वाला मामला। 22 हजार करोड़ का लोन। सेटलमेंट सिर्फ़ 6.5 करोड़ में। ₹22,006 करोड़ का दावा... भुगतान सिर्फ ₹6.5 करोड़! सुभाष चंद्रा के मामले में 99.97% का ‘हेयरकट’। देश की insolvency व्यवस्था से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Zee Group के संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ लेनदारों के करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims हैं, लेकिन मंजूर repayment plan में कुल भुगतान महज ₹6.5 करोड़ का है।
यानी लेनदारों की रिकवरी करीब 0.03% और कथित तौर पर 99.97% का haircut।
NCLT के Judicial Member नीलेश शर्मा ने IBC की धारा 114 के तहत repayment plan को मंजूरी दी। प्रस्ताव में ₹6.25 करोड़ creditors के ��िए और ₹25 लाख process cost के लिए रखे गए हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा LIC Housing Finance के आंकड़े से लगाया जा सकता है। उसका admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ है, जबकि repayment plan में उसे लगभग ₹38.09 लाख मिलने की बात है। यानी करीब 0.028% की recovery।
कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस repayment plan का विरोध किया था। लेकिन योजना को creditors के 80.81% voting share का समर्थन मिला। NCLT ने कहा कि वह creditors की commercial wisdom की जगह अपना फैसला नहीं रख सकता।
₹22,006 करोड़ → ₹6.5 करोड़
यही इ��� पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला आंकड़ा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ₹22 हजार करोड़ से अधिक के admitted claims वाले मामले में सिर्फ ₹6.5 करोड़ की repayment तक स्थिति आखिर पहुंची कैसे? और 99.97% haircut का वास्तविक आर्थिक बोझ कौन उठाएगा।
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