हम तो मिलने को तुझसे आए थे
किसलिए फ़ौज़ बुला ली तुमने
आग दुनिया को जब लगा न सके
एक सिगरेट जला ली हमने!
#सात_बहनों_का_देश १.
सात बहनों का देश : एक पुरानी तस्वीर |
कविता अच्छी भले न हो
लेकिन उसे ख़राब नहीं होना चाहिए !
अच्छा कवि जानता है कि वह अच्छा कवि है
ख़राब कवि नहीं मानता कि वह ख़राब कवि है !! 🦋
~ कृष्ण कल्पित
@KrishnaKalpit#छोटा_दरवाज़ा
हम मरुस्थल में बैठे तरसते रहे
और समुंदर में बादल बरसता रहा।
वक्त की आंधियां रोज़ हमको यहां
बस इधर से उधर तक उड़ाती रही।
रौशनी भी हमें ज़िन्दगी की तरह
बस अंधेरे की पुस्तक पढ़ाती रही।
#कृष्ण_कल्पित@KrishnaKalpit
उम्दा पेशकश
@DineshSindal1
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Today’s Featured Poem:
“Seven-Hundred-Year-Old Verse” by Alok Dhanwa Translated from the Hindi by @thesapphirebook from The World Is Made Up Every Day published by @seagullbooks
Read here:
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धरती को लालम-लाल
करने के लिए शहतूत बनाता हूँ
मज़हब बदलते रहते हैं
मगर मैंने पेशा नहीं बदला
पहले दरवाज़ा बनाता था
अब ताबूत बनाता हूँ!
@कृष्ण कल्पित✍️
(पोस्टर:अखिलेश्वर पाण्डेय)
सत्य मिलाओ झूठ में,और झूठ में साँच
पत्रकारिता हो गयी,नग्न-नरों का नाच ।।१।।
मालिक मोटे हो रहे,सम्पादक लाचार
कचरा-पेटी हो गये,हिन्दी के अख़बार ।।२।।
~कृष्ण कल्पित ✍️
#दोहा#अख़बार#राष्ट्रीय_प्रेस_दिवस#हिंदी_पत्रकारिता_दिवस