'Don't waste our time...'
सुप्रीम कोर्ट ने CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के मामले में तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया. CJI Suryakant की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से सख्त लहजे में कहा, कि 'हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए. हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है.'
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।
एक ऐतिहासिक घड़ी के गवाह बन रहे हैं।
आज संसद की ओर जाने वाली हर सड़क पर युवा हैं। पचास साल बाद उन्होंने फिर याद दिलाया है - संसद का रास्ता सड़क से होकर जाता है।
#संसद_मार्च#DharmendraPradhanResign
This is heartbreaking 💔
This young guy lost consciousness after police brutality during protest
He is not responding, not even moving. Hope he is still breathing
His crime? — Only that he chose to protest for his motherland
गैस सिलेंडर की कमी को लेकर आ रही ख़बरों पर मुझे बस यही कहना है कि नाले से गैस निकालने की तकनीक को विदेशों में नहीं भेजा जाना चाहिए था. अगर हमने उस तकनीक को आगे बढ़ाया होता, तो हम आज दुनिया को गैस निर्यात कर भारी मुनाफ़ा कमा रहे होते.
एमपीपीएससी की विसंगतियों को लेकर प्रदेश का युवा एक बार फिर सड़कों पर है!
भाजपा सरकार की धोखाधड़ी, बार बार किए जा रहे छलावे और झूठ से प्रदेश का युवा परेशान हो चुका है!
इस सरकार का ध्यान केवल धरना खत्म करने में रहता है! सिस्टम के सुधार की कोई पहल मोहन बाबू नहीं कर पाते!
एमपीपीएससी कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों पर दबाव बनाने और उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ़ है। हालात इतने चिंताजनक रहे कि माननीय उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर यह स्पष्ट करना पड़ा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। यह पूरी घटना भाजपा सरकार और प्रशासन के दमनकारी रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
दिसंबर 2024 में अभ्यर्थियों से जो वादे किए गए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। करीब 90 प्रतिशत माँगें अब भी लंबित हैं। मैं स्वयं उस समय अभ्यर्थियों के धरना-प्रदर्शन में छात्रों से संवाद करने पहुँचा था और उनकी माँगें समझी थीं इस भरोसे के साथ कि सरकार समाधान निकालेगी, लेकिन एक वर्ष बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। यह युवाओं के साथ किया गया सीधा अन्याय और विश्वासघात है।
भाजपा सरकार को चाहिए कि वह छात्रों की माँगों को गंभीरता से संज्ञान में ले और केवल आश्वासनों के बजाय तुरंत कोई ठोस निर्णय ले। अहंकार छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाया जाए और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। युवाओं के भविष्य की कीमत पर किसी भी तरह की लापरवाही या मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती।
कांग्रेस पार्टी इस पूरे मुद्दे पर अभ्यर्थियों की हर जायज़ माँग के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।
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@DrMohanYadav51@Indersinghsjp
सवाल पूछने का तरीका ग़लत लग सकता है।लेकिन हाल के दिनों में हर जगह यू ट्यूबर्स,स्वतंत्र पत्रकार इसलिए उभरे हैं और जनता का सपोर्ट भी मिला क्योंकि मेनस्ट्रीम मीडिया ने व्यवस्था पर सवाल उठाने बंद कर दिया।वे सरकार की ढाल बनकर रह गए।तो इनमें ही उम्मीद दिखी
- 90 के दशक में लालू यादव की राजनीति के समय जब बिहार में “भूरा बाल साफ़ करो” का नारा दिया गया तब बहुतायत संख्या में लोगों ने सरनेम लगाना छोड़ दिया। डर का माहौल ऐसा बना कि लोगों ने कुमार लगाना शुरू कर दिया
- मुझे डर है कि UGC के बाद भी कॉलेज में यही होना ना शुरू हो जाए। सवर्ण छात्रों में डर रहेगा कि उन्हें कभी भी जाति के आधार पर फंसाया जा सकता है। इस डर से वो सरनेम लगाना छोड़ सकते हैं
पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत पर नए खुलासे सामने आए. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने पुष्टि की छात्रा के साथ रेप हुआ है. शुरुआती जांच में पुलिस ने कहा था, छात्रा उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रा के शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान पाए गए और उसकी मौत स्वाभाविक नहीं थी.
https://t.co/FfZwxrVLx6
साथियों,
माननीय उच्च न्यायालय की अनुमति के अनुरूप आज दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक माननीय अध्यक्ष एवं सचिव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के साथ अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा एवं सहमति हेतु वार्तालाप प्रस्तावित है।
सभी अभ्यर्थियों से आग्रह है कि वे अपनी-अपनी मांगों के साथ शीघ्रातिशीघ्र आयोग परिसर पहुंचें और अपनी समस्याएं, पीड़ा एवं अपेक्षाएं सीधे आयोग के समक्ष रखें।
साथियों, पिछले आंदोलन की तरह यह वार्तालाप आयोग भवन के भीतर नहीं, बल्कि बाहर सत्याग्रह मंच पर आप सभी के बीच होगी।
इसलिए ऐतिहासिक और निर्णायक चर्चा में आप सभी की उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।
आपकी संख्या ही हमारी ताकत है, आपकी आवाज़ ही हमारा अधिकार।
#MPPSC_भर्ती_सत्याग्रह_2
#MPPSC_Article19_सत्याग्रह
@NEYU4INDIA@MPYuvaShakti