2014 में प्रति व्यक्ति आय:
भारत— $1,560
बांग्लादेश— $1,200
आज 2026 में IMF के अनुसार प्रति व्यक्ति आय:
भारत— $2,813
बांग्लादेश— $2, 960
मोदी जी के 12 साल के शासन में बांग्लादेश हमसे आगे निकल गया है,जबकि 2014 में हमसे चीन और USA को पीछे छोड़ने का वादा किया गया था,अमेरिका से आगे जाना तो दूर हम जिनसे आगे थे ,अब उनसे भी पीछे हो गए हैं!
अमेरिका के राजदूत ने गजब खुलासा किया है 👇
• 2 महीने पहले फ्रांस में ट्रंप और मोदी की मुलाकात होनी थी. वहां दोनों बयान देते और सामने पत्रकार भी होते.
• इस मुलाकात से पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने अनुरोध किया कि पत्रकारों से सवाल ना लिए जाएं.
जी हां, मोदी को पत्रकारों के सवाल से बचाने के लिए विदेश मंत्रालय आगे से रिक्वेस्ट कर रहा है.
आप ट्रंप-मोदी की उस मीटिंग का वीडियो देखेंगे तो पाएंगे कि ट्रंप पत्रकारों के सवाल ले रहे हैं, लेकिन मोदी से एक सवाल नहीं पूछा गया.
Trump didn’t forget what Narendra Modi said. He just didn’t listen. A compromised PM is not taken seriously.
It is painful to see what India has been reduced to under Narendra Modi.
Once a formidable force. Today, taken for granted.
PS: Why is Modi so afraid of press freedom — at home and abroad?
धीरेन्द्र शास्त्री ने महात्मा गाँधी पर जो बोला उसने दिल जीत लिया ❤️
पत्रकार:- बेहतर विचार क्या...
महात्मा गाँधी, नाथूराम गोडसे
धीरेन्द्र शास्त्री:- महात्मा गाँधी
हमारे भारत को पूरे विश्व में पुजवाने वाला है ही कौन - महात्मा गाँधी, जो व्यक्ति वकील बनकर आया और संत बन कर गया !
यही वो विभूतियाँ हैं जिन्होंने हमारे देश का नाम रोशन किया है !
अब आज इसे देखकर कुछ लोग कहेंगे हमारी विचारधारा अलग है तो हम गाँधी जी को मानते है बस
ध्यान से सुनिए क्योंकि बात साफ़ होनी चाहिए...
हमारे शहीद प्रधानमंत्री #राजीव_गांधी ने कभी भी #सिखों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा। 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है' वाली उनकी बात देश की प्रतिक्रिया के बारे में एक रूपक (metaphor) थी—न कि सिख-विरोधी दंगों को सही ठहराने वाली बात। उन्होंने देश में अशांति खत्म करने और एकता पर ज़ोर दिया था! संघियों ने साजिश के तहत प्रकाश सिंह बादल के साथ मिलकर राजनीतिक फायदे के लिए इसे तोड़ मरोड़कर गांधी परिवार और कांग्रेस के प्रति नफरत फैलाई!
19 नवंबर, 1984 को—प्रधानमंत्री #इंदिरा_गांधी की हत्या के तीन हफ़्ते से भी कम समय बाद—राजीव गांधी ने दिल्ली के बोट क्लब में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस भाषण के दौरान, उन्होंने भारत के राजनीतिक इतिहास की सबसे यादगार बातों में से एक कही:
"जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो उसके आस-पास की धरती का थोड़ा हिलना स्वाभाविक है।"
यह भाषण देश में गहरे शोक के समय दिया गया था; इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर, 1984 को हुई थी, जिससे एक ऐसी नेता का दौर खत्म हो गया जिन्होंने भारत को 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, हरित क्रांति और पोखरण-I परमाणु परीक्षण जैसे अहम पड़ावों से गुज़ारा था।
इसके बाद हुई दुखद घटनाओं ने देश पर गहरा असर डाला। सिर्फ़ 40 साल की उम्र में, राजीव गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और उन्हें देश को उसके सबसे मुश्किल दौर से बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।
उनके कार्यकाल ने कंप्यूटर, टेलीकम्युनिकेशन, विकेंद्रीकरण और चुनावी सुधारों में तरक्की को बढ़ावा देकर भारत के तकनीकी भविष्य को आकार दिया। दशकों से, नेहरू-गांधी परिवार भारत की राजनीतिक यात्रा के केंद्र में रहा है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी, इंदिरा गांधी ने देश की वैश्विक पहचान को मज़बूत किया, और राजीव गांधी ने डिजिटल रूप से जुड़े भारत का सपना देखा।
चार दशक से भी ज़्यादा समय बाद, यह भाषण उस देश की याद दिलाता है जो एक अहम मोड़ पर दुख, नेतृत्व और इतिहास से जूझ रहा था। राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों ने कांग्रेस से नफरत फैलाने के लिए इस भाषण को काट छांटकर झूठ फैलाया।
#RajivGandhi #IndiraGandhi #Congress #CongressParty #SikhCommunity #sikh
Atal Bihari Vajpayee poses with his daughter Namita Kaul (left) and son-in-law Ranjan Bhattacharya (right) during a visit to central China. The Gupta Papers clearly show that the Guptas had received kickbacks for defence deals signed during Vajpayee’s tenure and that Bhattacharya had a deep financial relationship with the Guptas.
How the Modi government is covering up two decades of defence corruption to save the Rafale deal, a report by @nileenams: https://t.co/xVxYBqo6f6 #अटल_बिहारी_वाजपेयी