प्रेम की
सबसे खूबसूरत कहानियां
जिनके आखर न किताबों में मिले
ना दीवारों की कलाई पर उन्हें गोदा गया ,
वो सारी कहानियां
लिखी गई थी आलिंगन की स्याही से
जो महफूज़ होकर धड़कती रही वक्ष की स्लेट पर ।।
#ज्योतिG
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कुछ लोगों को पाने में न जाने कितने मन आँसू लगते हैं... कितनी सेर उदासियाँ.....वे फिर भी नहीं मिलते.....
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पायल
७-६-२०२४
भीतर पीड़ा रेंग रही है
बाहर कोई शिकन नहीं है
यह जीना कुछ सरल नहीं है
ह्रदय भरा हो तो आँखों से
अश्रु न छलकें बहुत कठिन है
भाव भरे अंतर्मन से भी
पीर न झलकें बहुत कठिन है
बर्फ़ हुई हो अगर भावना
फिर वह होती तरल नहीं है...
#पंक्तियाँ ~ सोनरूपा विशाल
@SonroopaVishal
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संभव है यह समझने में समय लगे... किंतु सत्य यह है कि कोई किसी से कुछ नहीं छीनता... मनुष्य जो खोता है अपने ही दोषों अथवा अपराधों के कारण खोता है.....
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पायल
१२-१०-२०२३
दाढ़ी वाले बाबा ने दाढ़ी खुजलाई
बच्चे ने आँखें बाहें दोनों फैलाईं
बाबा ने बच्चे को अपनी गोद उठाया
बच्चे ने गुब्बारे जैसे गाल फुलाया
सोचा थोड़ा फिर बाबा की बुद्धि ठनकी
आँखों से पढ़ ली बातें बच्चे के मन की
पाकिट में उंगली ने काफी देर टटोला
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:/शंकर
#जिल्दसाज़ी#बालकविता
तुम अपनी आवाज़ का तावीज़ बना के दे दो, मैं पहन लूं
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आज गायक भूपिंदर सिंह की याद का दिन है। बीते बरस आज ही की तारीख़ थी जब हमने उन्हें खो दिया था। गुलज़ार साहब के पास भूपी जी के अनगिनत किस्से हैं। उनमें से एक 'जिया जले' से
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तारा टूटा
तो गिरा धरती की गोद में
पतंग कटी , फूल झरे
तो भी भरी
धरती की ही झोली
आकाश सूना होता रहा
फिर भी मुस्काया
जिसे संसार ने गुरुत्वाकर्षण कहा
वो आकाश का
धरा के लिए अनकहा प्रेम रहा....
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(काव्यांश)
पायल
१३-६-२०२३
कब तक शक़-ओ-शुब्हा कब तक वादों की तस्दीक
मीलों दूर जेहन दो बंदे जिस्मानी नज़दीक
कितनी और दरारें झेले दीवारों की खाल
घर टूटे या टूटे रिश्ते, कब होते हैं ठीक
जिस्मों के छू लेने भर से कब छूती है रू
कैसे मैं तस्कीन करूँ उसको,बस उसका हूँ
:/शंकर
#जिल्दसाज़ी