Pure social media pr mardo ke dwara Emotional card khela jaa rha hai.. Sath dene ke jgh.. Hdd hai!
Kavitayen likhi jaa rhi hai
Lekh likh rhe hain..
Videos bnaye jaa rhe hai
Ksh mardjaat itna Aahat hr balatkaar ke bdh bhi hota
Keep it up aurat saamaj teer sahi jgh lg rha hai���🏻
@TheKhadusa@smritaanshi_ इतने ही योग्य होते मार कर धमका कर खुद को बड़ा साबित नहीं करते और इसे स्ट्रक्चरड करना नहीं औरतों से डरना कहते हैं।और अगर ब��त स्ट्रक्चरड करने की कर रहे हो तो पहले मम्मी से पूछो तुम्हें कैसे स्ट्रक्चरड किया है बोलो पुरुष में है इतनी योग्यता।कुछ भी बकवास करे पुरुष स्त्री आगे ही होगी
@smritaanshi_@iamAshwiniyadav Jo offend ho rhe jinko bura lg rha lgne do.. Koi nhi smjha skta inko.. smjhna chahe fir bhi nhi.. samaj bhut anadar tk bsa chuka h is baat ko.. aur isko counter krne me hr roz bahut mehnat lgti h.
इतने में ही मर्द समाज इतना offend हो गया है, अगर औरत offend हो के लिखने लगे न तो पूरे X पे कहीं लिखने की जगह नहीं बचेगी।
और ये समझ से बाहर है आपको इतना बुरा क्यों लग रहा है। आप ही बताइए तो नारा ये होता कि "1 कचौरी 2समोसा राहुल (या जो नाम हो) का क्या भरोसा " इमोशन कार्ड मत खेलिए।
मेरा लड़कियों को पूरा समर्थन। सच कहूँ तो हम शायद पूरी तरह समझ भी नहीं सकते कि जब भी आप लोग घर से बाहर निकलती हो, किन-किन चीज़ों से गुजरना पड़ता है।
हर जगह घूरती नज़रें, अनवांटेड अटेंशन और ऐसा माहौल जिसमें आपको लगातार कांशियस रहना पड़ता है।
मैं रोज़ जिम में भी इसका एक छोटा-सा उदाहरण देखता हूँ। मेरी एक दोस्त अकेले जिम नहीं जाती। अगर उसकी कोई दोस्त उस दिन नहीं आती, तो ��ह भी जिम नहीं जाती। दोनों साथ आती हैं, साथ एक्सरसाइज करती हैं और साथ ही वापस जाती हैं।
सोचिए, जिस जगह कोई व्यक्ति अपने शरीर और स्वास्थ्य पर काम करने के लिए जाना चाहता है, वहाँ भी किसी लड़की को अकेले जाने में असहज महसूस हो वहां जिम के लोगों में गलती नहीं है ये समाज की गलती है तो समस्या उसके कपड़ों या उसके होने में नहीं, इस देश के माहौल में है।
लड़कियों को अपनी फ्रीडम के लिए इतना एकस्ट्रा सोचने औ�� सावधानी बरतने की जरूरत ही क्यों पड़े?
मेरी दोस्त पहले दिन जिम गई, उसका गली का पड़ोसी जिम ज्वाइन कर लिया फिर स्टॉक करना, तुरंत रिक्वेस्ट भेज देना, फिर जब लड़कियां एक्सेप्ट नहीं करती तो ईगो हर्ट हो जाना तो सही ही बोल रही है गर्ल्स एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा।
काफी अच्छे अच्छे बैंगर्स है आप भी पढ़िए।
१. हम औरतें आज़ाद हैं
२. आज़ादी, आज़ादी!
३. डर के आगे आज़ादी
४. पिंजरा तोड़ना नहीं छोड़ेंगे
५. रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं
६. एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा
७. गली-गली में शोर है, मर्द जात चोर है
८. एक सुत्ता, दो चाय, मर्द जात हाय-हाय
९. क्यूट नहीं, क्रांति है हम
१०. चुप रहना अब बंद करो हल्ला बोल! हल्ला बोल!
११. बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो
१२. हम आज���ाद हैं सिर्फ़ पन्नों पर
१३. बस बहुत हो गया
१४. बड़े-बड़े शहरों में ऐसी छोटी सोच नहीं चलेगी
१५. हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, इन मर्दों की सोच है छोटी।
१६. मेरे सिर में दर्द है, इसका कारण मर्द है।