आँखों मे आंसू आ जाते है जब ये सुनता या देखता हूं
एक मस्जिद का इमाम " जिसने सारी जिंदगी लोगो को नमाज पढ़ाई दीन का काम किया अच्छी बाते सिखाई, मुस्लिम बच्चो की रहनुमाई की, आज उसके पास इतने पैसे नहीं है की ईद जैसे बड़े त्यौहार पर अपने और बच्चो के लिए कपड़ो का इंतेज़ाम कर सके
"तुम्हारी पुश्तें खतम हो जाएंगी तुम खतम हो जाओगे लेकिन इस्लाम जिंदा था जिंदा है और जिंदा रहेगा"👍
ये मैं नहीं अंधभक्तों तुम्हारे ही पंडित भाई बोल रहे हैं और ये 1000% सत्य है
इस्लाम को मिटाने वाले खुद मिट कर चले गए हैं अंधभक्तों तुम्हारी क्या बिसात जो इस्लाम का बाल बाका कर सको
रमज़ान इबादत का महीना है, सहूलियत मांगने का नहीं।
रोज़ा रखने का मक़सद ही सब्र, मेहनत और अपने नफ़्स पर क़ाबू पाना है—
अगर हम हर चीज़ में “रियायत” तलाश करने लगें, तो फिर इस इबादत की रूह कहाँ रह जाएगी?
जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि बीस करोड़ मुसलमानों की “घर वापसी” कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी माँ का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं। जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज़ जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती।
आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है, दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएँ हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनके विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी। मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे; मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा। और इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है।
याद रखिए धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, इसलिए जो लोग धर्म का उपयोग नफ़रत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। हमें हर स्तर पर ऐसे लोगों की निंदा और विरोध करना चाहिए।
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#ArshadMadani | #GharWapasi | #घर_वापसी
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया :
*''तुम लोग पहली उम्मतों के तरीक़ों की क़दम ब-क़दम पैरवी करोगे, यहां तक कि अगर वो लोग किसी साहिना के सूराख़ मैं दाख़िल हुए तो तुम भी उसमें दाख़िल होंगे, हमने पूछा या रसूलुल्लाह ﷺ ! क्या आपकी मुराद पहली उम्मतों से यहूद और नसारा हैं ? आप ﷺ ने फ़रमाया : फिर कौन हो सकता है ?''*
[ स़ह़ीह़ बुखारी ]
في رحابِ العلمِ والفضل بـ #السعودية 🇸🇦، غمرنا كرمُ الضيافةِ ولطافة الاستقبال في مجلس معالي الشيخ د. عبدالله بن محمد المطلق (عضو هيئة كبار العلماء)، وفضيلة الشيخ خلف بن محمد المطلق (عضو الإفتاء باللجنة الدائمة).
كانت ليلةً حفّها الأنسُ، وازدانت بفيضٍ من النصائح الغالية والتوجيهات السديدة التي نعتز بها. شكر الله لشيخينا هذا العطاء، وبارك في صحبة أخي وحبيبي الشيخ حسن الحسيني💚
@7usaini7
In the realms of knowledge and virtue in Saudi Arabia 🇸🇦, we were immersed in generous hospitality and a warm reception in the gathering of His Excellency Sheikh Dr. Abdullah bin Muhammad Al-Mutlaq (member of the Council of Senior Scholars), and His Eminence Sheikh Khalaf bin Muhammad Al-Mutlaq (member of the Permanent Committee for Ifta).
It was a night filled with warmth and companionship, enriched with an abundance of precious advice and sound guidance that we truly cherish. May Allah reward our two respected scholars for this generosity, and bless the company of my dear brother and beloved Sheikh Hasan Al-Husseini 💚
#SaudiArabia #الرياض
महाराष्ट्र के परभणी मे कानपुर घटना के विरोध मे ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन ,
" अगर I LOVE मोहम्मद लिखने पर जेल हो जाती है तो हम ये गुनाह लाखों बार करेंगे "...
#ILoveMohammad