मुरादाबाद में अल्पसंख्यक हो चुके हैं हिंदू, फिर भी Muslims को बताया जा रहा विक्टिम
व्यापार-धंधों से बड़ी संख्या में बाहर हो चुके हैं हिंदू, बाजारों पर मुस्लिमों का क़ब्ज़ा
कैसे शुरू हुआ 1980 मुरादाबाद दंगा? हिंदू कैसे बने माइनॉरिटी? जानिए @pujaranaa से
तस्वीर में - नाली साफ करते रोहन पाठक, ब्राह्मण।
और दूसरी तरफ लाखों फॉलोअर वाले लोग
जो खुद करोड़पति हैं, फिर भी कहते हैं हम शोषित हैं।
अगर आरक्षण गरीबी हटाने के लिए है, तो रोहन पाठक के लिए क्यों नहीं?
@BJP4India किस तरह अपने कोर वोटर #स्वर्ण से दुश्मनी की जाती है और उनके मन मे नफरत फेल दी जाती है वो कोई BJP से सीखे
बचपन मे यही बताया कि हमेशा bjp को वोट देना
लेकिन अब मेने मेरे रिस्तेदार दोस्त सबको bjp से नफरत करते देखा है #UGC_काला_कानून_वापस_लो@OfficeAbhishekT#UGCRollBack
@BJP4India@narendramodi कभी कभी सोचता हूं कि कोई इंसान उसके सबसे कोर वोटर्स जो कि स्वर्ण से है उसके साथ ऐसा कैसे कर सकता है 😂😂 अब बताओ इतनी भी क्या नफरत स्वर्ण से की खुदके ही वोट को काट के दूसरी पारी के बना दिया
मतलब इतनी नफरत कैसे स्वर्ण समाज से BJP को ?
काम इनसे कुछ होता नही
@BJP4India@narendramodi सिर,
वो स्विस बैंक का काला धन हमे नही चाहिए आप बस इस देश का कर्ज जो BJP सरकार में बढ़ा है वो कम करवा दो,
ओर अगर आपसे हो पाए तो मॅहगाई भी थोड़ी कम हो जाती तो अच्छा होता मालिक
आज्ञाकारी - गलती से BJP वोटर 🙏
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
@ajeetbharti बलात्कार के मामले में अग्रिम जमानत मिल सकती है भारत में, लेकिन अगर #मोदी एक्ट एक्ट लग गया फिर कोई सवाल ही नहीं है। भले ही आपने अपनी बहन पर की टिप्पणी का जवाब दिया हो, आप सवर्ण हैं तो आपको भुगतना पड़ेगा।
एडबुल एक स्कूल जाने वाली छोटी बच्ची के पीछे पड़ा था , बच्ची ने भाव नहीं दिया और भगा दिया।
एडबुल चाकू लेकर लड़की को बंधक बनाना चाहता था। फिर एक भाई आगे आया और एडबुल का चबूतरा चौड़ा किया और बच्ची को बचाया ।
इंसानियत आज भी जिंदा है
केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि SC/ST कोटा में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा नहीं लागू होगी क्योंकि वह केवल OBC के लिए थी। तो मोदी जी, OBC रिजर्वेशन तो पहले था ही नहीं, फिर वो क्यों आया और आपकी पार्टी ने उसका समर्थन क्यों किया था?
दूसरी बात, आपके वकील ने कहा कि ‘आय के आधार पर’ SC/ST आरक्षण बिलकुल नहीं होगा क्योंकि उसका आधार केवल ‘आर्थिक पिछड़ापन’ ही नहीं, ‘ऐतिहासिक उत्पीड़न और अन्याय’ है। ‘केवल’ आर्थिक पिछड़ापन कहाँ, आप तो इनकम को कहीं भी आधार नहीं मानते!
जिस EWS का आप ढोल पीटते हैं, उसमें न तो फॉर्म के दाम कम हैं, न हॉस्टल की फीस, न कोर्स फीस… तो ये दो कौड़ी का राजनैतिक झुनझुने का सामान्य वर्ग करे क्या? @narendramodi यह बताएँ कि सामान्य वर्ग के टैक्स के पैसों से फंड हो रही SC/ST आरक्षण सब्सिडी का लाभ, सामान्य वर्ग के EWS को ही क्यों नहीं मिलता?
कोई तर्क है इसका कि आप जिसे सर्टिफाइड गरीब मानते हैं, वो प्रमाण पत्र उससे माँगते हैं, उसे सत्यापित करते हैं और उसे नौ लाख से सोलह लाख तक का लोन ले कर पढ़ाई करनी पड़ती है। फिर आप 1000 SC और 1000 OBC जातियों के शून्य प्रतिनिधित्व पर मौन हो जाते हैं कि इन जातियों का आरक्षण कहाँ है?
सत्य यह है कि आपका ‘विकसित भारत’ टूटते हायवे और निम्न गुणवत्ता के 50% लोगों से भरे कॉलेजों और विद्यालयों से कभी पूरा नहीं हो सकता। आरक्षण की समीक्षा करनी ही होगी, उसे तार्किक रूप से लाना ही होगा।
१. शून्य प्रतिनिधित्व वाली जातियों की पहचान
२. EWS की SC के स्तर की आर्थिक छूट
३. न्यूनतम अंक का विधान, GC से 10% से अधिक का कटऑफ में अंतर न हो SC/ST में
४. सक्षम लोगों को फर्जी तर्क के कारण आरक्षण न दिया जाए
५. हर श्रेणी में सबसे गरीब, पिछड़े को ही आरक्षण मिले
६. हर दस वर्ष में जातियों की समीक्षा और निष्कासन, नई जातियों को लिस्ट में जोड़ना बंद करें