माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी,राज्य के सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि हर अस्पताल में दवाइयाँ उचित और निर्धारित मूल्य पर ही उपलब्ध कराई जाएं।
साथ ही, राज्य के सभी कैंसर उपचार केंद्रों का ऑडिट कराया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मरीजों से दवाइयों के नाम पर किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि दवाइयों का मूल्य नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन होने के बावजूद, इतने गंभीर मुद्दे पर केंद्र की चुप्पी बनी हुई है।
मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि इस विषय पर केंद्र सरकार से तत्काल वार्ता करें। राज्य स्तर पर मैंने स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं—
लापरवाही या ब्लैकमार्केटिंग पाए जाने पर दोषियों पर सबसे कठोर कार्रवाई की जाएगी।
@JharkhandCMO
माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी,
संज्ञान लेने के लिए आपका हृदय से धन्यवाद।
चूँकि MRP निर्धारण की नीति में अनेक खामियाँ हैं, इसलिए उसके सुधार में समय लग सकता है, या संभव है कि वह शीघ्र सुधारित न हो सके।
मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ कि कैंसर की अधिकांश दवाइयाँ टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (TMH), मुंबई की मेडिसिन डिस्पेंसरी में बहुत ही कम मूल्य पर उपलब्ध रहती हैं।
मेरी जानकारी के अनुसार, वहाँ दवाइयाँ मात्र 5% मार्जिन पर मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं।
आपको यह जानकर अत्यंत आश्चर्य होगा कि हमारे राज्य के कई मरीज केवल दवा खरीदने के लिए TMH मुंबई तक जाते हैं।
चूँकि TMH मुंबई न केवल भारत, बल्कि विश्व के श्रेष्ठ कैंसर उपचार केन्द्रों में से एक है, इसलिए वहाँ उपलब्ध दवाइयों की गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है, और किसी भी चिकित्सक या अस्पताल द्वारा उन दवाओं की गुणवत्ता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय, यदि राज्य सरकार इच्छुक हो, तो TMH मुंबई से समन्वय स्थापित कर उनकी मेडिसिन डिस्पेंसरी की एक शाखा राँची में खोली जा सकती है, तथा व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा सकता है।
ऐसी सुविधा देश के बहुत कम राज्यों में उपलब्ध है, इसलिए यह कदम झारखंड के लिए अत्यंत अनूठा और लाभकारी सिद्ध होगा।
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ एवं किफ़ायती बनाने के लिए ऐसी कई पहलें की जा सकती हैं।
इस दिशा में किसी भी प्रकार के सहयोग हेतु मैं सदैव उपलब्ध हूँ।
सादर
कैंसर एक ऐसी बीमारी ने जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं ।
सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि मरीज के परिवारों को ।
दवाइयों का खर्च वहन करते करते लोग टूट जाते हैं ।
और कैसे नहीं टूटेंगे अगर 600 रुपये की दवाई पर सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये MRP रखने की ।
जी हाँ ।
दवाई है Paclitaxel ।
रिटेलर खरीदते हैं 600 में और MRP है 12000.
एक मरीज को कई बार 20-30 vial की ज़रूरत पड़ती है ।
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं ।
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है ।
200% मार्जिन भी समझ में आता है लेकिन 1900% margin??
वो कैंसर जैसी बीमारी में , जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है??
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब ?
@PMOIndia