#Satguru_Shobha_Yatra परमात्मा की भक्ति से कष्ट समाप्त हो जाते हैं परमात्मा हर युग में आते हैं अपना ज्ञान प्रचार करते हैं संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में कबीर जी के 626वेंप्रकट दिवस पर अनुयायियों जगह जगह शोभायात्रा निकाल रही है जिसमें परमात्मा का संदेश जन तक पहुंचाया जा रहा
#Satguru_Shobha_Yatra 2, 3, 4 जून 2023 को कबीर परमेश्वर जी का प्रकट दिवस है जिसके उपलक्ष्य में आज मानव समाज में फैल रही समस्त बुराइयों को ख़त्म करने के लिए हर छोटे-छोटे कस्बे, शहर व गांव-गांव में शोभायात्रा निकाली जा रही है।
#Satguru_Shobha_Yatra God Kabir Prakat Diwas कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में रखे विशाल भंडारे का खूब हो रहा प्रचार
वास्तव में इस तरह के विशाल धार्मिक भंडारे पापनाशक होते हैं।
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
सावन सिंह जी महाराज सतनाम के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
सावन सिंह जी के अनुसार राधा स्वामी की पुस्तक "संतमत प्रकाश" भाग-4, पृष्ठ नं. 261-
" हमारी जाति सतनाम है और हमारा धर्म सतपुरुष है ।" (हमारी जाति सतनाम है और हमारा धर्म सतपुरुष है।)
*✰हमें ग
सतलोक में बिना किये सब सुख-सुविधा उपलब्ध है।
जबकि काल लोक/पृथ्वी लोक में बिना कर्म किये कोई भी वस्तु प्राप्त नहीं होती।
#Satlok_Vs_Earth#SantRampalJiMaharaj
सतलोक में प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा नूरी शरीर है। जिसका तेज 16 सूर्यों के समान है।
जबकि काल लोक/पृथ्वी लोक पर सभी का पांच तत्त्व से बना नाशवान शरीर है। जिसमें हजारों तरह की बीमारियां सदैव बनी रहती हैं।
#Satlok_Vs_Earth#KabirIsGod
सतलोक में जाने के बाद जीवात्मा का जन्म-मरण हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
लेकिन सतभक्ति के अभाव में पृथ्वी के प्राणी 84 लाख योनियों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
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शिव दयाल जी का कोई गुरु नहीं था। शिवदयाल जी पांच नाम काल के जपते थे। जिससे वे ना तो कोई सुख प्राप्त कर सके और न ही मोक्ष। मोक्ष प्राप्त नहीं होने से शिवदयाल जी अपनी ही शिष्या बुक्की में प्रेतवश प्रवेश होकर हुक्का पीते थे।
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शिवदयाल जी ने इतना हठयोग किया फिर भी उनका मोक्ष क्यों नहीं हुआ|
पवित्र गीता जी में कहा है कि जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्याग कर अपनी इच्छा से मनमानी भक्ति करते हैं उनको न तो कोई सुख होता है, न कार्य सिद्धि होती है, न ही मोक्ष प्राप्त होता है
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राधास्वामी के संस्थापक शिव दयाल जी महाराज का कोई गुरु नहीं था, हुक्का पीते थे, व्यर्थ नाम दीक्षा देना शुरू किया, "राधास्वामी" जैसे मनमाने नाम गढ़े। राधास्वामी पंथ दुनिया भर में लाखों लोगों को गुमराह कर रहा है। यह एक तथ्य है।
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शिवदयाल जी ने अज्ञानतावश हठयोग किया जो शास्त्रों तथा कबीर साहेब की वाणियों में मन है शिव दयाल जी का कोई गुरु नहीं था। शिवदयाल जी पांच नाम "ररंकार, ओंकार, ज्योति निरंजन, सोहं तथा सतनाम" आदि नामों को जपते थे । मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
राधास्वामी पंथ का मूल सिद्धांत है कि परमात्मा निराकार है, सतलोक में केवल प्रकाश ही प्रकाश है। जबकि सर्व शास्त्र सिद्ध करते हैं कि परमात्मा साकार है, सत्यलोक में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान है।