शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी।
जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह फेफड़ों में चली गई।
दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन अनशन नहीं तोड़ा।
13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए।
इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था।
आज हम बात कर रहे हैं 'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिया 'जतिन दा' के नाम से जानती थी।
पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बना उनका अपना शरीर।
वो चाहते तो माफी मांग सकते थे, खाना खा सकते थे। लेकिन मांग सिर्फ एक थी - "भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक बंद करो।"
अंग्रेजों को लगा कि भूख इसे तोड़ देगी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह शरीर मिट्टी का नहीं, फौलाद का बना है।
जब जतिन दा की हालत बिगड़ने लगी, तो अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेल के डॉक्टर और सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया। नाक से नली डाली। दर्द से वो चीखते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा।
उनकी शहादत की खबर जब बाहर आई, तो पूरा देश रो पड़ा था।
कहा जाता है कि जब उनका शव लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर हजारों लोग फूल लेकर खड़े थे। कलकत्ता में उनकी अंतिम यात्रा में 6 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।
सुभाष चंद्र बोस ने खुद उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।
लेकिन आज? आज कितने लोग उस 63 दिन की तपस्या को याद करते हैं?
मरते वक्त जतिन दा ने कहा था, "मैं कोई साधु नहीं हूँ, मैं बस एक साधारण इंसान हूँ जो अपने देश की गरिमा के लिए मरना चाहता है।"
आजादी चरखे से आई या बिना खड्ग-ढाल के, यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन यह सच है कि आजादी की नींव में जतिन दा जैसे नौजवानों की गल चुकी हड्डियां गड़ी हैं।
हमें यह आजादी खैरात में नहीं मिली, इसके लिए किसी ने अपनी जवानी के 63 दिन भूखे रहकर कुर्बान किए हैं।
हर भारतीय का कर्तव्य है कि वो जाने कि जिस हवा में वो सांस ले रहा है, उसकी कीमत क्या थी।
इस जानकारी को साझा करें ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि असली 'हीरो' कौन थे।
यह पोस्ट केवल उन भूले-बिसरे नायकों को नमन करने के लिए है....Read News
🔴A very IMPORATNT video of Akbar Khan Bugti, a Baloch leader killed by Pakistani 🇵🇰Govt
"If 1971 War happens again.....
Baloch, Sindhi and Pashtuns will NOT fight against India 🇮🇳"
He says --- I said it in 1971, I will say it again.
This video is likely from early 2000's.
Bugti was killed in a Pakistani military op in 2006.
*7000 करोड़ रुपए केरला के चर्च में पकड़े गए है ..सारी ब्लैकमनी केरला के चर्च के अंदर.इसमें कई बेशकीमती प्रॉपर्टी के दस्तावेज पकड़े गए*
*"केरला में कांग्रेस" की सरकार है*
*पंजाब,छत्तीसगढ़,झारखंड,पश्चिम बंगाल,आसाम में धर्म परिवर्तन के लिए यह पैसा आता है*
*"सारा विपक्ष चुप"*
@RebornManish waise jhooth aur dna ki pehchaan ek farzi surname se bhi to hogi na,bhakht ji,jaha itihaas hi jhooth aur ghotale se bhara hua hein , nahin? koi nahi andh bhakti ka dna hum sab me he?
@RebornManish Congress chose 'Ram Janambhoomi' foundation day for protest in black clothes to promote appeasement politics:Cong especially chose black clothes because August 5 is Ram temple ceremony anniversary,it was a message against Ram temple foundation-stone
Pakistani journalist Najam Sethi admits Pakistanis are perverts. Pakistanis stare at white women with lust. Hence no international tourists come to Pak
It seems whole Pakistan is a pervert🤢🤢🤢🤢
Alas…only if Nehru had controlled then, we wouldn’t have had this Kashmir problem today
Listen to Mountbatten’s daughter's shocking revelation : Her father cleverly used Edwina to influence Nehru into taking Kashmir to the UN
And listen to this rogue Karan Thapar romanticise & whitewash this : "So Panditji had a love in your mother & your father had a bit of influence through your mother on Panditji"
Just imagine the price the entire country had to pay for one weak man who was unable to control himself
So many lives lost, CONg owes a huge apology to all Kashmir Hindus, our army & every Indian