CJP is a project. I have repeatedly said that it is funded by the Aam Aadmi Party and operates in collusion with the RSS and its cronies. I still have no doubt about that.
What the people behind this project failed to anticipate was the courage, determination, and anger of the youth across the country. Ironically, the very project that was designed to protect the regime ended up becoming the starting point of its decline. that is the only reason Dharmendra Pradhan had to resign.
In reality, CJP neither represented the youth of this country, nor does it represent them today, nor will it ever represent them.
That is my opinion.
No matter how celebratory the atmosphere is today, I cannot ignore what I believe to be the truth.
If you consider Dipke, Ranka, Das, and others to be opponents of the RSS and representatives of the youth of the entire country, you are free to believe that—and you are equally free to troll me for my views.
But the truth, cannot remain hidden forever.
Ha ha ha! I hope everyone finally accepts that Wangchuck and this woman are agents of RSS and BJP who tried a game that backfired terribly as real Gen Z joined in.
What a fall. What a scam.
@Rashmi22302711@abhijeet_dipke सांस्कृतिक गिरोह के सदस्य का कारनामा.
मंदबुद्धि धर्म के नशैलचियों ने हिन्दू मुस्लिम के नाम पर गिरोह को राजनीति में जगह दी है.
बचा लो कुछ बचा सकते हो तो.
"सब याद रखा जायेगा, सब कुछ याद रखा जायेगा !
बड़ी बड़ी एजेंसियां इस आंदोलन को डिकोड नही कर पा रही !
यह पहली बार है कि देश में शिक्षा के मुद्दे पर इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है।
इस सरकार की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ थी—डर।
लेकिन इन नए बच्चों ने उसी डर को मीम बना दिया है।
ये जेनरेशन सरकार, सिस्टम और पुलिस को एकदम ही सीरियसली नहीं ले रहे हैं।
पूरे सोशल मीडिया को कॉमेडी शो बना दिया है।
रील्स भरी पड़ी हैं।
सरकार को लगा था कि किसानों, ड्राइवरों या दूसरे आंदोलनों की तरह ये भी एक-दो दिन बाद रोज़ी-रोटी के लिए घर लौट जाएंगे। लेकिन यहाँ तो उल्टा हो गया।
सरकार ने इन्हें रील्स से निकलकर रियल लाइफ़ में डेमोक्रेसी जीने का मौका दे दिया।
सरकार और पूरा सिस्टम इनकी भाषा ही नहीं समझ पा रहा। दोनों के बीच इतना बड़ा जनरेशन गैप है कि लगता है पहले 4–6 महीने की "Gen-Z Language Workshop" करनी पड़ेगी।
मिलेनियल्स धड़ाधड़ डोनेशन कर रहे हैं। बोल रहे हैं। "भाई, हमारे कंधों पर बैठो, खाओ-पीओ और सिस्टम की बैंड बजा दो।
असल में मिलेनियल्स भी इसी शिक्षा व्यवस्था से बुरी तरह परेशान थे, लेकिन वे पुरानी पीढ़ी और उसकी मर्यादाओं के बीच फँसे हुए थे। ये वाली Gen-Z? इन्हें किसी की परवाह ही नहीं।
इन्होंने पूरी पार्टी और सरकार के IT सेल का गेम ही बिगाड़ दिया है। उन्हें कबाड़ा बना दिया है। इनके कंटेंट के सामने किसी का नैरेटिव टिक ही नहीं पा रहा।
मंत्रियों और सांसदों के ऑफिशियल पेज कमेंट सेक्शन में भर-भरकर ट्रोल हो रहे हैं। पूरा नैरेटिव वहीं पलट जा रहा है।
गोदी मीडिया को ये घुसने ही नहीं दे रहे हैं जबकि वे इस फोमो मे रील्स काटने के लिए लालायित बैठे हुए हैं।
इधर सरकार समर्थकों को भी आड़े हाथ ले रहे हैं। ऐसा ही रहा तो ये गोदी मीडिया की तरह समर्थकों का भी जीना मुश्किल कर देंगे। उनके भी अच्छे दिन आने वाले हैं। प्रोटेस्ट में जो भी समर्थक आ रहा है उसको ही पीट दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने भी इस दौर में जितनी ऑनलाइन आलोचना झेली है, शायद पहले कभी नहीं झेली होगी।
इनके लिए यह आंदोलन अब सिर्फ़ प्रोटेस्ट नहीं, बल्कि डेमोक्रेसी फेस्ट और डेमोक्रेसी की लाइव क्लास बन चुका है। और मज़े की बात यह है कि इस क्लास से कोई बंक मारना ही नहीं चाहता।
हर सीरियस बात, हर भाषा और हर एक्शन को इन्होंने मीम कल्चर में बदल दिया है। सामने वाले को समझ ही नहीं आ रहा कि इन्हें डील कैसे किया जाए। डिकोड कैसे करें।
अब यह आंदोलन सोनम, दीपक, दास या किसी एक चेहरे के हाथ में नहीं रह गया। यह पूरी तरह डिसेंट्रलाइज़ हो चुका है।
उधर पुरानी पीढ़ी के बुद्धिजीवी और एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रकाश राज जैसे नाम इनमें से बहुतों के लिए लगभग अप्रासंगिक हैं। वे उन्हें पहचानते तक नहीं।
पुलिस से जाकर पूछते हैं ये लाठी कितने में आती है, कोई पुलिस से पूछता है पुलिस अंकल नास्ते में मैगी मिलेगी क्या !
जब मूड होता है नाचने लगते है, आंदोलन स्थल देखते ही देखते किसी क्लब में बदल जाता है !
ये वो जनरेशन है जिसकी आँखों डर नही है, ये आंदोलन नये नये नारों और नए नए मीम के लिए याद रहेगा !
इस जनरेशन की भाषा समझ पाना भी सरकार के लोगों को मुस्किल है, इन्हें राजनीती से कोई लेना देना नही है इन्हें इनके हक़ से लेना देना है !
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन्होंने अपनी ही भाषा में आंदोलन को FOMO Event बना दिया है। अगर आज प्रोटेस्ट मिस कर दिया, तो लगता है कुछ बड़ा मिस कर दिया।
इनके लिए इस आंदोलन में आने का मतलब है कि गंगा नहा लिया।
और लाठी तो ये मेडल की तरह मान रहे
@ANI अगर इनका मानना सही है कि प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो मोदी जी को वोट नहीं देगा कोई.
तो मेरा मत है ना ही हो इस्तीफ़ा.
बर्बादी बहुत ज्यादा हो चुकी है देश, समाज और जनता की.
अब बस, बहुत हुआ.
पर हां वोट चोरी का क्या होगा ?
@AshutoshRanka एक बार नहीं कई कई बार हो जिससे धंधा चलता रहे.
आपदा में अवसर.
एक दिन अनपढ़, गरीब और मूर्ख होने के फायदे भी बताये जायेगें धंधेबाजों द्वारा.
मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 'पेपर लीक' के फ़ायदे गिना रही हैं।
जिस 'पेपर लीक' ने 21 से ज़्यादा बच्चों की जान ले ली, जिसके ख़िलाफ़ लाखों युवा आंदोलन कर रहे हैं- ये सरकार उसके भी फायदे समझा रही है।
ये असंवेदनशील और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान सबूत है कि मोदी सरकार 'पेपर लीक' रोकने के लिए जरा भी गंभीर नहीं है।
इन लोगों ने देश के एजुकेशन सिस्टम का कबाड़ा कर दिया है।
@INCIndia मतलब आपदा में अवसर.
बस धंधा चलते रहना चाहिये.
किसी दिन यह लोग मूर्ख, अनपढ़ और अशिक्षित रहने के फायदे भी गिनायेगें.
जिन दिमागी दिवालियों ने इनको मौका दिया 12 साल पहले, उनको देश, समाज और खुद को बर्बाद कर देने का अफसोस जब तक नहीं होगा ऐसे आपदा में अवसर बताये जाते रहेगें.
NTA की कौन सी कंपनी है, ऑर्गनाइजेशन है जो पूरी सिक्योरिटी को देखती है? TCS को हटाके इनोवेटिव व्यू को दिया गया। वो विनीत जोशी के नजदीकियो की कंपनी थी। इसीलिए कल विनीत जोशी नप गए। आप लोग केवल मोदी नामा पढ़ने के लिए एंकर बने हैं क्या?
NTA में लोगों का चयन किसने किया? पाकिस्तान ने किया क्या? NTA में सारे RSS, BJP के लोग किसने भरे? कांग्रेस ने भरे क्या? CBI की जांच जो 2024 में हुई उसमें 90 दिन तक चार्जशीट फाइल नहीं हुई, उसमें नेपाल ने रोका था क्या? ये सिस्टम क्या अमेरिका चला रहा है क्या?
100 से ज्यादा बच्चे हॉस्पिटल में पड़े हैं आप लोगों को शर्म नहीं आती। 22 बच्चे सुसाइड कर गए। 2024 में CBI का डायरेक्टर यही धर्मेंद्र प्रधान था... कितने लोगों को सजा मिली? जो 2024 में कानून बना वो 25 में लागू क्यों हुआ?
कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता @Aloksharmaaicc जी
@Ashok_Kashmir सर वांगचुक परिवार कभी बीजेपी सरकारों के खिलाफ किसी आंदोलन के लीडर क्या हिस्सा हो ही नहीं सकते थे, इनको तो भेजा गया था लद्दाख से एक सोची समझी साजिश के तहत पर लोगों की तकलीफों ने सब साजिश मटियामेट कर दी.
The RSS's game plan: हम मार्च 2026 से लगातार बताते आ रहे हैं कि सोनम वांगचुक आरएसएस के लिए काम करता है। उसका भाई @BJP4India का लद्दाख परिषद का सदस्य है। उसके पिता भी 1987 में @RSSorg के लिए काम करने लगे थे।
जब सोमम वांगचुक और अभिजीत दीपके साथ आये तब हमने अभिजीत दीपके के बारे में भी बताया कि वह @AamAadmiParty से करीब 10 साल से जुड़ा हुआ है। सोनम वांगचुक को योजनाबद्ध तरीके से लद्दाख में @RahulGandhi@INCIndia का प्रभाव कम करने के लिए #NSA में जेल भेजा गया है मगर वह वहां भूमिका तैयार कर रहा है। जब उसे अचानक छोड़ा गया तब भी हमने उस साजिश के बारे में बताया था।
जब सोनम वांगचुक जंतर मंतर पर युवाओं के पहुंचने की अपील कर रहा था, तब भी हमने उसकी साजिश को बताया था कि वह कैसे राहुल गांधी के छात्रों युवाओं को लेकर चल रहे आंदोलन को कम प्रभावी करना मकसद है।
अब देख लीजिए दोनों ने समझौता कर लिया और स्टूडेंट्स ठगे रह गये। @ArvindKejriwal ने भी जेल से छूटने की फीस दे दी। दीपके को अमेरिका से डिपोर्ट होना था, वह बच गया। सोनम को हीरो बनाकर चुनाव में यूज करने का गेम भी हो गया।
और आप फिर फर्जी गांधी और फर्जी आजादी की तीसरी लड़ाई के नाम पर संघी ठगों के हाथों छले गये।
हमारे पास देशहित और जनहित में विकल्प सिर्फ कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार है और कोई नहीं।
जय हिंद!
15 से 20 दिन हो गए छात्रआंदोलन कररहे थे लेकिन आप में से कोईभी उन छात्र तक नहीं पहुंचा है,अब सूबेदार ठहरा रहे हैं कांग्रेसको,राहुलगांधी को,अरे वहांपर सारे पार्टियों केनेता पहुंचे सारे लोग पहुंचे जिनके बच्चों का भविष्य आपलोगों ने उद्भेस्ट कर दिया है,नागनाथ की राजनीतिक नौटंकी का अंत
@SKkhare11 शायद समझ आये आंदोलन के लीडरों, वांगचुकों और बहुत से मूर्खों को जो राहुल नहीं आये, विपक्षी नेता आयें की चिल्ला चोट कर रहे थे. क्या होता अगर आ गये होते पहले,यही आरोप लगाकर उठवा दिया जाता कि राजनीति से प्रेरित है.
अब मुश्किल हो रहा है क्योंकि अब यह लीडरों के हाथ से निकल चुका है.