"मोदी सरकार को मालूम था कि एक दिन चुनाव आयोग के भीतर का खेल बाहर आएगा और जनता चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार करने की मांग करेगी। इसीलिए दिसंबर 2023 में मोदी सरकार ने कानून बनाया कि चुनाव आयुक्तों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यह कानून तब बना जब दोनों सदनों के 141 सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। सदन में कोई विपक्ष ही नहीं था। अब समझ में आ रहा है कि वह कानून किसलिए बनाया गया था।"
लोकतंत्र में एक -एक वोट का मतलब होता है लेकिन ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के भीतर अलग से अपना गैंग बनाकर देश के लाखों वोटर को मनमाने ढंग से बाहर कर दिया .
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टर @RitikaChopra__ की रिपोर्ट आज भी छपी है . गोवा के CEO की तरफ से सात दिन में आठ बार मेल करने के बाद भी 97 वोटर का नाम नहीं जोड़ा का सका. राज्यों के चुनाव अधिकारियों की भी नहीं सुनी गई .
चुनाव आयोग को निजी कंपनी की तरह चलाने वाले CEC ज्ञानेश कुमार को अब एक दिन भी पद पर नहीं रहना चाहिए .
"ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड करना चाहिए। चुनाव आयोग की सारी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। बिहार और बंगाल के चुनावों को रद्द करना चाहिए। ज्ञानेश कुमार किसके आदेश पर काम कर रहे थे, जो आदेश दे रहा था वो देशद्रोही है।"
- कपिल सिब्बल
'केचुआ ' ने अपने प्रेस नोट में एक्सप्रेस के खुलासे का कोई जवाब नहीं दिया .
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर कोई जवाब नहीं दिया .
फॉर्म 6 पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर कोई जवाब नहीं दिया .
ECI Net पर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति पर कोई जवाब नहीं दिया
कहें तो किसी पॉइंट का कोई जवाब नहीं दिया लेकिन बीजेपी के प्रवक्ता चैनलों पर चुनाव आयोग के प्रवक्ता की तरह कुछ भी बोले जा रहे हैं .
ज्ञानेश कुमार से BJP की रिश्तेदारी का और क्या सबूत चाहिए
मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।
👉 इस बारे में खुद दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है।
▪️ शिकायत में साफ कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्त - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी जाती। उनसे सलाह नहीं ली जाती। उनसे बिना पूछे या बताए हुए फैसले लिए जा रहे हैं।
▪️ ये 14 शिकायतें मुख्य तौर से - SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर है।
इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है।
ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए 'वोट चोरी' का काम कर रहे हैं।
हम पहले भी कहते आए हैं - मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है।
मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
लेकिन ये बात याद रखना - वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served.
ज्ञानेश कुमार में दम है तो खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों को झूठा साबित करके दिखाएं . एक्सप्रेस के खुलासे पर सारे सवालों के ज़वाब दें .
लीपापोती वाला बयान जारी न करें
इंडियन एक्सप्रेस के इस खुलासे के बाद ज्ञानेश कुमार को CEC के पद पर बने रहने का हक नहीं है .
ये आदमी चुनाव आयोग को अपनी बपौती समझकर चला रहा है .
बाकी दो चुनाव आयुक्तों की भी नहीं सुन रहा है .
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