बिहार में 'कुशासन काल' चल रहा है।
कभी अपना हक मांगते BPSC के छात्रों पर लाठियां भांजी जाती है, तो कभी संविदा शिक्षकों को बेरहमी से पीटा जाता है।
BJP-JDU की सरकार पुलिस की लाठियों के पीछे अपनी नाकामी छिपा रही है- लेकिन बिहार का युवा अब इन्हें सत्ता से उखाड़कर ही दम लेगा।
बिहार पुलिस बड़ी निर्दयी है...!!
ये छात्रों को ऐसे पीट रही है जैसे वो आतंकवादी हों।
खैर गलती छात्रों की ही है जो "धर्म प्रचार" करने के बजाय "रोजगार मांग" रहे हैं।
सुशासन बाबू १ करोड़ नौकरी देने के लिए लगभग ७५०० LRC संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाल कर उनके और उनके परिवार के पेट पर लात मारने का काम किया है ..निर्लज्जता की पराकाष्ठा है ये 😡
विशेष सर्वेक्षण संविदा कर्मी संघ की तरफ से पुन: एक बार फिर प्रतिनिधि मंडल मिला। सरकार ने इन्हें एकमुश्त सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। संपूर्ण बिहार के हज़ारों संविदा कर्मी 16 अगस्त से हड़ताल पर हैं।
इनके शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज कर बर्बरतापूर्वक कुचल दिया गया। हम इनकी निम्नवत मांगों के साथ है।
1. धरना-सत्याग्रह में बर्खास्त किये गए सभी कर्मियों की सेवा तत्काल बहाल की जाए।
2. इनकी सेवा 60 वर्ष तक नियमित की जाए।
3. नियमित नियुक्ति में इन्हे अनुभव के आधार पर अधिमानता दी जाए।
4. मंहगाई भत्ता, पदनाम परिवर्तन, EPFO अंशदान इत्यादि अन्य मांगों को स्वीकार किया जाए।
#TejashwiYadav #Bihar #RJD
कल बिहार में संविदाकर्मियों पर लाठीचार्ज किया गया.
बिहार बंद के दौरान भी आम जनता पर अत्याचार किया था.
भाजपा ऐसा व्यवहार बाक़ी राज्यों में चुनावों के बाद करती है लेकिन बिहार में चुनावों से पहले ही अपना असली रंग दिखा रही है.
क्यों?
क्या भाजपा बिहारवालों का मूड जान चुकी है?
#BiharElections2025 #VoteChorGaddiChhod
पटना में सर्वेक्षण कर्मचारियों ने नौकरी की सुरक्षा और बकाया वेतन की मांग को लेकर भाजपा कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। महीनों से वेतन न मिलने और भविष्य असुरक्षित होने से आक्रोशित कर्मचारी सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं। सुनिए, क्या कुछ कहना है प्रदर्शन कर रहे लोगों का।
नौकरी की सुरक्षा और बकाया वेतन की माँग को लेकर📍बिहार बीजेपी कार्यालय के बाहर सर्वे कर्मचारियों का प्रदर्शन!
सरकार के बड़े-बड़े वादों के बीच युवाओं की आवाज़ आज बिहार की सड़कों पर गूंज रही है! 🔥
Examination और Education System की खामियों का बोझ देश का युवा उठा रहा है।
दिन-रात मेहनत करने वाले ये बच्चे नौकरी लेते ही अपने परिवार और समाज का भविष्य सँवारने का सपना देखते हैं।
लेकिन जब ये अपनी जायज़ माँगें रखते हैं, तो समाधान की जगह लाठीचार्ज मिलता है।
पटना में संविदा कर्मियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, कई कर्मचारी घायल हुए।
सोचिए, चाहे #संविदा_कर्मी हों या #tre4vacancy के छात्र, अगर चुनाव से पहले ही युवाओं की आवाज़ दबाई जा सकती है, तो क्या यह नहीं दिखाता कि उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?
क्या जिम्मेदार लोग इनसे बैठकर बात नहीं कर सकते थे?
क्या इनकी माँगें ग़लत हैं, जब ये सिर्फ़ पारदर्शिता, हक और सम्मान चाहते हैं?