सफ़र की आख़िरी घड़ी मे
मौत जब उसके सिरहाने खड़ी थी
कुछ देर तक
उसकी आँखों में देखती रही
उसे यक़ीन न था
कि यहाँ अब
उसका कोई काम नहीं।
पथराई आँखों के पीछे
वो शख़्स
बहुत पहले जा चुका था।
वो उसे लेने आई थी,
लेकिन ज़िंदगी तेज़ निकली
उसे पहले ही
निगल चुकी थी।
मौत को
मौका ही नहीं मिला।
@ChhotiKavita मुड़ी हुई चिट्ठी खोलते ही
किसी की आंखों में
खेल गई हसी
कोई आंखें
भिगो गई लिखावट कागज की
एक ही तरह का कागज
एक ही लिखावट
कितना फर्क लाती है
दुनिया में।
@Hindi_panktiyan सफ़र की आख़िरी घड़ी मे
मौत जब उसके सिरहाने खड़ी थी
कुछ देर तक
उसकी आँखों में देखती रही
उसे यक़ीन न था
कि यहाँ अब
उसका कोई काम नहीं।
पथराई आँखों के पीछे
वो शख़्स
बहुत पहले जा चुका था।
वो उसे लेने आई थी,
लेकिन ज़िंदगी तेज़ निकली
उसे पहले ही
निगल चुकी थी।
मौत को
मौका ही नहीं मिला।
अरसे बाद
उसी कॉफी शॉप में
अपनी पुरानी मेज़ पर
मैंने उसे देखा
दो कप कॉफी के साथ
मुझे देखकर
वह थोड़ी हैरान हुई
थोड़ी खुश भी
फिर संभल गई
मैंने पूछा—
“और कौन है साथ?”
वह हल्का-सा हँसी
“दो कप कॉफी की
आदत नहीं गई।”
@Tere_do_nainaaa शेल्फ़ पर रखी किताब में
वही पन्ना खुला है
मैं कई बार सोचता हूँ
आगे पढ़ लूँ
मगर हर बार
बत्ती बुझ जाती है
और मैं लौट आता हूँ
सिरहाने अब भी
दो तकिए हैं
मैं दीवार की तरफ़
थोड़ा और सरक जाता हूँ
और एक तकिया
हर रात
वैसे ही रखा रह जाता है
शेल्फ़ पर रखी किताब में
वही पन्ना खुला है
मैं कई बार सोचता हूँ
आगे पढ़ लूँ
मगर हर बार
बत्ती बुझ जाती है
और मैं लौट आता हूँ
सिरहाने अब भी
दो तकिए हैं
मैं दीवार की तरफ़
थोड़ा और सरक जाता हूँ
और एक तकिया
हर रात
वैसे ही रखा रह जाता है
सड़क किनारे पड़ा एक पत्थर
एक शख्स गरीब सा
चलाता रहा हथौड़ा दिन रात उसपर
उसके हुनर और पसीने से
निखरने लगा वो पत्थर
बना डाला उसने भगवान उसे
एक रोज कुछ खास लोग
ले गया उसका
गढ़ा भगवान
रख कर उसे एक आलीशान घर में
जिसे वो शायद मंदिर कहते थे
पर वो दुकान थी उनकी
जहां दिखाकर भगवान
वो जेबें अपनी भरते थे
ढोल मंजीरा घंटी बजाकर
सुबह शाम वो शोर करते थे
चल पड़ा था धंधा उनका
एक रोज वही गरीब सा
खड़ा हो गया उनकी दुकान पर
शायद देखना चाहता था
अपना गढ़ा भगवान
कैसा दिखता है
सुना है रोज दूध से नहाता है
चंदन वंदन लगाता है
और मुर्दे सा पड़ा रहता है
पर वो बेचारा हुनरमंद गरीब
लांघ न सका
उनकी दुकान की देहरी
क्योंकि
उन खास लोगों की नजर में
वो नीच जो था।