निवेशक भारत से हर ट्रेडिंग घंटे बाजार से 400 करोड़ रुपये निकाल रहे हैं। करोड़ों लोगों का भरोसा डगमगा रहा भारत की अर्थव्यवस्था चिंताजनक स्थिति में है। महामानव भाषण देने और पानी पीने का ज्ञान देने में मस्त और व्यस्त है।
क्या ये खबर सही है? क्या देश का सोना बेचा जा रहा है? क्या सरकार इतनी ज़्यादा कंगाल हो गई है? पिछले 76 साल में कई ऐसे मौके आए जब देश कठिन स्थिति में था। लेकिन देश का सोना तो कभी नहीं बेचा गया। इसका मतलब हालात बहुत ज़्यादा ख़राब हैं?
सरकार कुछ बताती क्यो नहीं? देश के क्या हालात हैं? मोदी जी कहते हैं कि वो तो झोला उठा के चल देंगे। पर हमें तो यहीं रहना है, इसी देश में रहना है।
जब लाखों युवा सड़क पर हों, 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर हो और PM चुप हो - तो सरकार जवाब देने नहीं, बचने में लगी है।
जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और NEET जैसे पेपर लीक रोकने के लिए foolproof सिस्टम नहीं बनता - हम रुकेंगे नहीं।
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
पटना में कल अपने रोज़गार का हक़ मांगते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बिहार पुलिस ने बेरहमी से पीटा - फिर से।
बेरोज़गार युवाओं को BJP का जवाब - लाठी।
भारत में आज सबसे बड़ी बीमारी बेरोज़गारी है और इसकी सबसे भयंकर मार बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रही है।
लाखों युवा डिग्री और क़ाबिलियत हाथ में लेकर दर-दर भटक रहे हैं। मगर BJP की सरकार को न इनकी परवाह है, न आपकी। जब युवा सड़कों पर उतरकर अपना हक़ मांगते हैं, उनके हाथ में रोज़गार नहीं - पीठ पर लाठियां रख दी जाती हैं।
भारत का युवा BJP के झूठ से तंग आ चुका है - वो अब चुप नहीं बैठेगा। और, कांग्रेस उनके साथ हर मोड़ पर खड़ी है।
प्रधानमंत्री जी ने सुवेंदु अधिकारी पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, आज उसी सुवेंदु अधिकारी को CM पद की शपथ दिला दी।
सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ ED नहीं जाएगी.. ED संजीव अरोड़ा, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
अब क्या सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे। देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है। आज पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र व्यथित।
चुनावी व्यवस्था के नाम पर केंद्रीय बलों का जो दुरुपयोग मतगणना में आज बंगाल में हुआ है, ठीक वैसा ही घपला 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अधिकांश जगह किया गया था, जिसकी साक्षात गवाह कन्नौज की विधानसभाएं थीं। फिर इसी निंदनीय मॉडल को फ़र्रुख़ाबाद के 2024 लोकसभा चुनाव में दोहराया गया था।
सब जानते हैं क्या हुआ है और सच क्या है और जनमत की खुली लूट कैसे हुई है।
घोर, घोर, घोर निंदनीय!!!
जिस दिल्ली और बंगाल को भाजपा 'मोदी वेव' की चरम सीमा पर नहीं जीत पाई.. 2015 में दिल्ली में और 2016 में बंगाल में इनकी 3-3 सीट आई..
उस दिल्ली और बंगाल को भाजपा ने तब जीत लिया जब मोदी जी की लोकप्रियता पूरे देश में पाताल में जा रही... कैसे?
🚨FAKE NEWS से सावधान🚨
Narendra Modi की ED मनीष सिसोदिया जी को लेकर फैला रही है झूठी खबरें‼️
आज मोदी की सरकार ने मनीष सिसोदिया जी और उनकी पत्नी द्वारा लिए गए 2 फ्लैट अटैच किये हैं। एक फ्लैट 2005 में 5 लाख का तो दूसरा 2018 में 65 लाख का लिया गया था, इसके अलावा एक बैंक एकाउंट जिसमें 11 लाख रुपये हैं, उसे भी अटैच किया गया है। ये राशि कुल मिलाकर 81 लाख होती है, और इस पूरी राशि का दिल्ली की Excise Policy से कोई नाता नहीं है।
इनमें से किसी भी प्रॉपर्टी का दिल्ली की कथित Excise Policy Investigation से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि ये प्रॉपर्टी तब खरीदी जा चुकी थी जब दिल्ली की Excise Policy दूर-दूर तक कहीं नहीं थी।
मोदी सरकार का मकसद सिर्फ और सिर्फ एक ईमानदार आदमी की छवि खराब करना है।
अभी तक Manish Sisodia जी द्वारा ना तो किसी Property को और ना ही किसी कैश को लेने का कोई भी सबूत सरकार के पास है मगर फिर भी इन्होंने उन्हें पिछले 4 महीनों से जेल में डाला हुआ है।
लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन ऐसा आएगा जब भारत जैसे महान देश को ऐसा प्रधान मंत्री मिलेगा जो इस तरह खुलेआम झूठ बोलकर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को ख़त्म करने की कोशिश करेगा।
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