अकेला हूँ इसका ये मतलब नहीं है कि गलत रास्ते पर चल रहा हूँ, अकेला इसलिए हूँ क्योंकि बड़े सपनों का पिछा कर रहा हूँ, ओर बड़े सपनों का पिछा अकेला ही करना पड़ता है।
सखी सैयाँ तो खूब ही कमात हैं... महंगाई डायन खाए जात है...’ गीत को माननीय भाजपा विधायक बहन Maithili Thakur जी ने अपनी मधुर आवाज़ से बेहद खूबसूरती से सजाया था।
मैं उनके अद्भुत प्रतिभा, समर्पण और कला को हृदय से नमन करता हूँ। 🙏
आज लोकसभा में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज़ उठाई।
कई स्कूलों द्वारा किताबों और ड्रेस के लिए एक ही दुकानदार तय कर अभिभावकों को महंगी खरीदारी के लिए मजबूर करना गलत है।
इस समस्या के समाधान के लिए शिकायत दर्ज करने हेतु एक समर्पित पोर्टल की मांग की।
“यूजीसी अपने नये नियम के तहत यह कहता है कि अब विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थाओं में भेदभाव करना गलत होगा, लेकिन आप जानते हैं हो क्या रहा है भेदभाव करने के हक के पक्ष में या भेदभाव के खिलाफ आने वाले अधिनियम के खिलाफ लोग प्रतिरोध कर रहे हैं?
प्रो. विजेन्द्र चौहान
दिल्ली विश्वविद्यालय
@masijeevi@ugc_india@dpradhanbjp #We_support_UGC_Act
भारत में 2014 से 25 के बीच मूर्तियां बनाने में खर्च हुआ 77 सौ करोड़ रुपए
इतने पैसों में लगभग 800 स्कूल बनाए जा सकते थे और उन सभी स्कूलों का नाम सरदार पटेल सिंह महाविद्यालय रखा जाता , इससे पटेल जी को ज्यादा समीक्षा मिलती
मंदिर निर्माण और मंदिर से जुड़े क्षेत्रों का विकास करने के लिए जो पैसा खर्च हुआ वो पैसा 98 हजार करोड़ रुपए यानी टोटल कितना हुआ 1 लाख 7 हजार करोड़
कुंभ मेले में लगभग 15 हजार करोड़ रुपए खर्च हुआ यानी 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपए जबकि भारत का हेल्थ और एजुकेशन का बजट इससे कम है।
आगे वीडियो देखिए
पत्रकार — भारत का भविष्य कैसा है?
विकास दिव्यकीर्ति — “अगर विज्ञान की नजर से देखें तो हालात ठीक नहीं हैं।”
“जो देश धर्म की कट्टरता को आगे रखता है, वो ज़्यादा तरक्की नहीं कर पाता।” 🤯
अब इस बात पर लोग उन्हें गालियाँ देंगे 😭
भक्त- पीठ में बहुत समय से दर्द है
प्रेमानन्द जी महाराज- दर्द है तो बाबा जी इसमें क्या करें। ये आशीर्वाद से ठीक नहीं होता है, Doctor से दवा लेने से सही होगा।
इसी भटकाव में रहते हैं तभी आजकल लोग तंत्र मंत्र जादू और ठीक करने के नाम पर लूट लेते हैं।
Premanand ji maharaj 🤗❤️🌻
साइकोलॉजी
यह घटना कुछ वर्ष पूर्व की कर्नाटक के कोम्बारू अभ्यारण्य से सटे विश्राम गृह की है।
एक तेंदुआ कुत्ते का पीछा कर रहा था। कुत्ता खिड़की से शौचालय में घुस गया। शौचालय बाहर से बंद था। तेंदुआ कुत्ते के पीछे घुस गया और दोनों शौचालय में फंस गए। कुत्ते ने तेंदुए को देखा तो घबरा गया और चुपचाप एक कोने में बैठ गया। उसने भौंकने की भी हिम्मत नहीं की।
हालांकि तेंदुआ भूखा था और कुत्ते का पीछा कर रहा था, फिर भी उसने कुत्ते को नहीं खाया। वह चाहता तो एक छलांग में कुत्ते को नोच-नोच कर खा सकता था।
लेकिन दोनों जानवर लगभग बारह घंटे तक अलग-अलग कोनों में एक साथ बैठे रहे थे। इन बारह घंटों के दौरान तेंदुआ भी शांत रहा। वन विभाग ने तेंदुए पर ध्यान दिया और रिमोट इंजेक्शन गन (पशु चिकित्सा संज्ञाहरण का एक रूप) का उपयोग करके उसे पकड़ लिया।
अब सवाल यह है कि जब आसानी से संभव था तो भूखे तेंदुए ने कुत्ते को क्यों नहीं फाड़ डाला???
वन्यजीव अनुसंधानकर्ताओं ने इस प्रश्न का उत्तर दिया: उनके अनुसार वन्यजीव अपनी स्वतंत्रता के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि उनकी आज़ादी छीन ली गई है, उन्हें गहरा दुख हो सकता है, इतना कि वे अपनी भूख को भी भूल सकते हैं। पेट भरने की उनकी स्वाभाविक प्रेरणा फीकी पड़ने लगती है।
एक इंसान के रूप में हमें भी विभिन्न तरीकों से स्वतंत्रता की आवश्यकता है... भाषण, अभिव्यक्ति, धर्म और विश्वास, भोजन, सोचने और कार्य करने की स्वतंत्रता... आदि।
स्वतंत्रता और खुशी एक-दूसरे-से जुड़े हुए हैं। अपनी इच्छानुसार सोचने, कार्य करने और जीने की स्वतंत्रता।
स्वतंत्रता के विचार को और व्यापक रूप से देखा जाए तो यह प्रसन्नता से जुड़ा हुआ है!!! और सुख का रहस्य स्वतंत्रता है।
इलाहाबाद प्रयाग बन गया और बनारस क्योटा
धनीराम का खेत बिक गया, तार बचा न लोटा
टूटी चप्पल पहन के मनसुख बोरी उठा रहा है
और हमारा देशी नीरो बंशी बजा रजा है
देश हमारा कहाँ जा रहा
कहो नरेंद्र मजा आ रहा 🎵🎵
डॉलर सर पर पाँव जमाये, मुंह बल पड़ा रुपैया
और भक्त चिल्लाये रहे हैं जय गंगा जय गैया
जो गंगा के लिये लड़ा वो जीवन गंवा रहा है
और इधर मनमौजी मन के बातें सुना रहा है
देश हमारा किधर जा रहा
कहो नरेंद्र मजा आ रहा 🎵🎵
मैं आपको एक बात बताऊं,ये भारत देश की वो हकीकत है जो वाकई में हमारी संस्कृति को गलत तरीके से दिखाती है.
मैं यहां बस ये तस्वीर किसी एक खास जगह के DM के ऑफिस की use कर रहा हूं,पर पूरे भारतवर्ष की सच्चाई यही है. DM साहब के ऑफिस को देखिए,कोई सुख सुविधा में कमी लग रही आपको ?.. उत्तर है एकदम नहीं.
पर जिनके समस्याओं के निवारण के लिए इन्हें ये पदभार दिया गया है,जो वाकई इन्होंने से अपनी कठिन मेहनत से हीं हासिल किया है,पर ये दूरियां और कुर्सी बहुत कुछ बयां कर रही है.
आज भी गांव छोड़िए,शहरों में भी बोल दीजियेगा न कि DM साहब से मिलना है,या ऑफिस जाना है उनके तो 10 लोग बाहर मिलेंगे आपको जो इतना डरा देंगे कि आप कुछ बोल हीं नहीं पाएंगे. उनके ऑफिस में घुसने से पहले ऐसा व्यवहार रहेगा इनके PA का की जैसे एक पल की भी आवाज अगर हुई तो एकदम साहब का सारा फोकस हीं हिल जायेगा.
हमें इसपर काम करने की आवश्यकता है. आखिर क्यों DM/SP से मिलने से पहले इतनी अजीब सी डर रहती है। #UPSC
पिता जी के एक लाइन याद रहती है हमेशा: पर्वत खड़ा है क्योंकि जमीन से जुड़ा है. इसीलिए थोड़ा जमीन से जुड़े रहना चाहिए हमें. खैर,,बाकी सिस्टम हीं यही है.
@khurpenchh@KHURAPATT
एक रिचार्ज ऐसा भी होना चाहिए… जिसमें सिर्फ़ बात हो, इंटरनेट नहीं...!!😉
भारत में आज भी करोड़ों लोग मोबाइल को मनोरंजन नहीं,सिर्फ़ ज़रूरत के लिए इस्तेमाल करते हैं।
उनके लिए फोन का मतलब है घर की ख़बर लेना, हाल-चाल पूछना, काम की बात करना।
लेकिन हक़ीक़त यह है कि उन्हें हर बार डेटा वाला महंगा रिचार्ज कराना पड़ता है,जबकि वे इंटरनेट का इस्तेमाल करते ही नहीं।
ग्रामीण इलाक़ों के लोग, वरिष्ठ नागरिक, छोटे दुकानदार,मज़दूर वर्ग और साधारण उपयोगकर्ता इन सबकी ज़रूरत नेट नहीं, नेटवर्क है।
फिर सवाल उठता है जब उपयोग नहीं है, तो ज़बरदस्ती डेटा क्यों...?
जब ज़रूरत सिर्फ़ कॉल की है, तो विकल्प क्यों नहीं...?
डिजिटल इंडिया ज़रूरी है,लेकिन हर भारतवासी डिजिटल नहीं है।
सच्ची सुविधा वही है जहाँ चुनाव का अधिकार मिले डेटा चाहिए या सिर्फ़ बात।
शायद अब वक्त आ गया है कि टेलीकॉम कंपनियाँ एक जैसा रिचार्ज सबके लिए की जगह ज़रूरत के हिसाब से रिचार्ज दें...!!🙆🏼♂️
देश की सबसे ज्यादा भ्रष्ट संस्था FSSAI है, देश में बढ़ रही तमाम बीमारियों के लिए जिम्मेदार है ,इनका जो मैंडेट है उस दिशा में बिल्कुल काम नहीं कर रहे ,
इनकी अपनी कोई रिसर्च या पैरामीटर्स नहीं हैं,सब कॉपी पेस्ट के भरोसे है,टेक्नोलॉजिकली बहुत बैकवर्ड हैं,
पूरी संस्था का बजट कब कौन लील जाता है , कैसे पॉलिसी हाईजैकिंग और ब्लैकमेलिंग होती है , कुछ दिनों में सब आपको बताएंगे ।
तत्काल टिकटों का काला सच 🚨
IRCTC पोर्टल 10 बजे खुलता है और आधा मिनट में सब सीट फुल।
क्या ये सीटें आम जनता से पहले दलालों तक पहुँच जाती हैं? ऐसा लगता है ऑटो-बॉट्स, जाली अकाउंट्स और स्क्रिप्ट्स से हजारों टिकटें हड़प ली जाती हैं।
रेलवे ने कैप्चा, आधार वेरिफिकेशन और बॉट-रोक लगाए, फिर भी सामान्य यात्री WL में ही क्यों अटक जाते हैं।
@IRCTCofficial@RailMinIndia जवाब दो।
#TatkalTicketBooking
रील मंत्री जी (@AshwiniVaishnaw)
जनता की तरफ से सीधे और कड़े सवाल 👇
• आपका IRCTC ऐप बस घूमता रहता है, OTP जनरेट नहीं होता और उतने में टिकट खत्म हो जाता है। इसे सिस्टम कहें या खुली लूट?
• जब Tatkal में OTP ही समय पर नहीं आता, तो बुकिंग चालू क्यों रखते हो?
• एंडलेस रीलोड, पेमेंट कटना, टिकट न मिलना गलती किसकी है?
• सिस्टम फेल होने से कन्फर्म टिकट का मौका गया, उसकी भरपाई कौन करेगा?
• पेमेंट कटने के बाद रिफंड स्टेटस क्यों गायब रहता है?
• शिकायत दर्ज करने लायक काम का सपोर्ट कहाँ है?
अगर सिस्टम भरोसेमंद नहीं है तो No Ticket, No Payment लागू करो।
यात्री गलती नहीं, IRCTC की नाकामी भुगत रहा है।
जवाब और समाधान चाहिए बहाने नहीं।
#TatkalTicketBooking
वंदे भारत — भारत की सबसे प्रीमियम, सबसे महंगी ट्रेन।
तारीफ़ों के कसीदे पढ़े गए , ब्रांडिंग ज़ोरदार हुई।
लेकिन जमीनी हक़ीकत?
मोदी जी के संसदीय क्षेत्र बनारस से दिल्ली चलने वाली वंदे भारत ट्रेन।
• 24 दिसंबर: करीब 12 घंटे लेट।
• 23 दिसंबर: 6 घंटे 42 मिनट देरी।
• 22 दिसंबर: करीब 7 घंटे लेट दिल्ली पहुँची
अब सवाल साफ हैं 👇
• न किराया आधा हुआ।
• न समय की भरपाई।
• ऊपर से यात्रियों ने मिस हुई ट्रेनें , फ्लाइट्स, कैब ओवरचार्ज — सब झेला।
रेलवे और IRCTC का जवाब?
बस एक लाइन — “हमें खेद है”।
बहाना दिया गया — कोहरा।
लेकिन उसी रूट पर चलने वाली शिवगंगा एक्सप्रेस औसतन इससे कम देरी से पहुँची।
तो इसका मतलब क्या हुआ?
• क्या वंदे भारत में फॉग लैम्प नहीं हैं?
• या फिर “प्रीमियम” सिर्फ किराये में है, ज़िम्मेदारी में नहीं?
• अगर हालात इतने खराब थे, तो यात्रियों को मुआवज़ा क्यों नहीं?
नाम बड़े , किराया बड़ा >>
पर जवाबदेही, संवेदनशीलता और जवाब…
सब गायब।
🚨 खुरपेंची सूचना 🚨
‼️भारतीय रेलवे से जुड़ी किसी भी समस्या या गड़बड़ी पर पोस्ट करते समय अब बात सिर्फ़ शिकायत की नहीं—रिकॉर्ड की है।
अब रेलवे की हर गड़बड़ी, दबी नहीं रहेगी — दर्ज होगी।
🔴 अगर आप इन मुद्दों पर पोस्ट कर रहे हैं 👇
• IRCTC टिकट बुकिंग फेल / सर्वर गायब
• Tatkal टिकट — एजेंट, सॉफ्टवेयर, लूट सिस्टम
• घंटों लेट ट्रेन / बीच ट्रैक पर खड़ी गाड़ियाँ
• रेलवे पैंट्री — घटिया खाना, ओवरचार्जिंग, ज़हर
• स्टाफ का ग़ायब होना / बदतमीज़ी / जवाब शून्य
• कोच की हालत — गंदगी, पानी-AC फेल
• महिला, बुज़ुर्ग, बच्चों की अनदेखी
• या कोई भी रेलवे मिसमैनेजमेंट
तो ये करें 👇
👉 हर पोस्ट में @khurapatt को टैग करें
📩 फोटो | वीडियो | स्क्रीनशॉट मेल करें:- [email protected]
क्यों?
👉🏻 क्योंकि ये शिकायत नहीं, डिजिटल सबूत संग्रह है।
👉🏻 यह गुस्सा निकालने का मंच नहीं, सबूत जमा करने का प्लेटफ़ॉर्म है।
👉🏻 यह ट्रेंड नहीं,टाइमलाइन है।यह शिकायत
नहीं,चार्जशीट है।
👉🏻 रेलवे अगर चुप रहेगा, तो जनता दस्तावेज़ बोलेगी।
और जब दस्तावेज़ बोलते हैं, तो सिस्टम को जवाब देना पड़ता है।
🛑 टैग करें | भेजें | इतिहास बनाएं
🛑 हर देरी, हर लूट, हर झूठ — अब दर्ज होगा
🚨भारतीय रेलवे : विश्व-स्तरीय अव्यवस्था का लाइव डेमो🚨
> 15713 – कटिहार–पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस पिछले 2 घंटे से हाथीदह से पहले खड़ी है — ना प्लेटफॉर्म, ना सूचना, ना शर्म।
• घोषणा: मौन व्रत
• सूचना: ध्यानावस्था
• जवाबदेही: लापता
• यात्री: बंधक
> बाद में चलने वाली वंदे भारत पटना पहुँच गई, बाकी ट्रेनें भी दौड़ रही हैं, और ये इंटरसिटी शायद “रुककर भारत को विश्वगुरु बनाने” में लगी है।
> यात्री दरवाज़ों पर लटके हैं, ऐप में समय बदल रहा है, ग्राउंड पर ज़िंदगी अटकी है।
> यह देरी नहीं है— यह वही सिस्टम है जहाँ टिकट यात्री का, समय रेलवे का, और नुकसान सिर्फ़ जनता का होता है।
👉🏻Dear @RailwaySeva@RailMinIndia
साफ़ बताइए— क्या यह ट्रेन आज पटना पहुँचेगी या इसे भी “अगले अपडेट” की फ़ाइल में दफ़ना दिया गया है?
यात्री सफ़र खरीदते हैं, रेलवे की लापरवाही नहीं।
अब ट्वीट नहीं, जवाब चाहिए।