@DrKumarVishwas कहाँ गए वो कवियों के हुंकार भरते शब्द
धुंआ हो उठे जिससे कंस से मचलते अब्द
कृष्ण या अल्लाह सब तो आते आते आएंगे
उठ खड़े हो चीता की रफ़्तार में दौड़ पड़ेंगे
दुनिया के जीने का सलीक़ा हम बदल देंगे
लहज़े में गर आप अपने! रास्ता बताएंगे
नवयुवक हैं नई दुनिया नया मौसम बनाएंगे