अंजना ओम कश्यप का बेटा दिल्ली के जिस अमेरिकन एंबेसी स्कूल में पढ़ता है, वह 13 एकड़ में फैला है।
पीएम के घर के बगल में स्कूल के लिए 8 एकड़ की जमीन चाणक्यपुरी जैसे वीवीआईपी इलाके में 1 रुपए की लीज़ में मिली थी।
इस स्कूल की सालाना फीस 37 हजार डॉलर है।
बाकी आप समझ लें।
एक छोटी सी खबर निकल कर आ रही है,
KGMU लखनऊ 📍में मात्र 2 करोड़ का घोटाला हुआ है!!
बेचारे मरे लोगों को जिंदा करने के लिए कैंसर की दवाएं निकाल कर बेच रहे थे, कुछ जलनखोरों ने पर्दाफाश कर दिया।
@AnandAkash_BSP आकाश जी दिल्ली ही नहीं देश भर में ऐसे कमर्शियल भवनों की भरमार है जो फायर सेफ्टी के बिना चल रहे हैं। इन्हें पता नहीं कौन एनओसी देता है। भ्रष्ट सिस्टम ऐसे ही आम आदमी की जान लेता है।
शासन का कोई डर नहीं है!
देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आज हुआ भीषण अग्निकाण्ड अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा इसमें काफी लोगों की हुई मौत तथा कई लोगों के घायल होने की भी घटना अत्यन्त ही दुखद। सभी पीड़ित परिवार वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।
ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम पर केन्द्र व दिल्ली सरकार को ज़रूर विशेष ध्यान देना चाहिये ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति ना हो सके।
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि वे इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू करना किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशासन की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह वही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की बदमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।
40 लीटर की टंकी में 52 लीटर तेल.. पेट्रोल पंप के खेल में आया नया ट्विस्ट
कानपुर में 45 लीटर क्षमता वाली कार में 52 लीटर पेट्रोल भरने का मामला चर्चा में है. शिकायत के बाद प्रशासनिक टीम जांच के लिए पहुंची, लेकिन मशीनों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली. हालांकि निरीक्षण से पहले पेट्रोल पंप को सूचना दिए जाने और जांच में हुई देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. शिकायतकर्ता ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं.
पूरी ख़बर: https://t.co/rW0KEjrc5d
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मायावती पुराने नेताओं की ‘घर वापसी’ कराएंगी: भाजपा-सपा में गए नेता संपर्क में; क्या बदलेगा विपक्ष का समीकरण?
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शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर में आग लग गई है।
बहुत पहले सुनने में आता था कि जिस मंत्रालय पर घोटालों का आरोप होता था, उसके दफ्तर में आग लग जाती थी, और जरूरी कागजात जल जाते थे।
खैर यहां वैसी कोई बात नहीं है।
>मान लिया कि वो टीचर नहीं बिजनेस मैन हैं,
>मान लिया कि वो पैसों के लिए पढ़ाते हैं,
>मान लिया के उन टीचर्स में कुछ कोचिंग माफिया भी हैं,
लेकिन तुम क्या हो?
>तुम्हारे अंदर कौन से गुण मीडिया के हैं,
>अंतिम समय कब जनता की आवाज उठाई थी
>रातों दिन बस सरकार की गुलामी करते हो
>रुपया गिरने का फायदा बताते हो
>मंहगाई के फायदे बताते हो
>टैरिफ में तुम्हारा मुंह नहीं खुलता
>NEET पेपर लीक में तुम्हारा मुंह नहीं खुलता
>भ्रष्टाचार के लिए अंतिम बार कब डिबेट हुई थी?
>बेरोजगारी के लिए कब डिबेट हुई थी?
>लोगों के स्वास्थ्य के लिए कब डिबेट हुई थी?
>बढ़ते प्रदूषण के लिए कब डिबेट हुई थी?
तुमसे अच्छे 499 रुपए लेकर गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स हैं।
बेशर्मों
कोई फायदा नहीं सर इतने अव्वल दर्जे के महिमामंडन से।
नौकरशाही और पुलिस नियंत्रण में नहीं है यही सच है
ब्लॉक लेवल तक का नेता गुंडागर्दी भूमाफियागिरी कर रहा है।
बाबा को बहनजी की शासन प्रणाली से सीखना चाहिए।
खाली मीडिया मैनेजमेंट से बनी इमेज चुनाव नहीं जिताती!
UP- श्रावस्ती में CMO साहब की गाड़ी के अंदर का टेंपरेचर जब कूल हो जाता है तब साहब गाड़ी में विराजते है. इसके लिए हर रवानगी से 15 मिनट पहले सरकारी गाड़ी का इंजन और AC स्टार्ट किया जाता है. इस तरह साहब और गाड़ी का तापमान मेंटेन रहता है.
PM मोदी पेट्रोल-डीजल बचाने की रट लगाये हुए है.
ये कानपुर देहात के शिवली नगर पंचायत के चेयरमैन अवधेश शुक्ला का निर्माणाधीन होटल है,
एक चेयरमैन की कितनी सैलरी होती है जो इतना बड़ा आलीशान होटल बनवा रहा है।
क्या सरकार को ये सब नहीं दिख रहा है, ये सब गरीबों की जमीन कब्जा करके बनाई हुई संपत्ति का जलवा है।
@DMKanpurDehat