रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में राणा पूंजा भील जी की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम तथा बूंदी में बिजौलिया किसान आंदोलन के शहीद नानक भील जी की शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
BREAKING NEWS 🚨
Cockroach Janta Party के फाउंडर @abhijeet_dipke 6 जून को इंडिया वापिस आ रहे है
और Jantar Mantar, Delhi में Education Minister का इस्तीफ़ा के लिए प्रोटेस्ट करेंगे
#CockroachJantaParty
क्या आपको पता है धुएँ कि भी जाति होती है 👇
मध्य प्रदेश में एक दलित की चिता जलने से केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसका धुआं “ब्राह्मणों के श्मशान” तक चला जाता…
उस पर भी शर्मनाक ये कि पुलिस भी दलित परिवार पर ही दवाब डाल रही है क्यूं की पुलिस प्रशासन खुद जातिवाद से अंदर तक सड़ा हुआ हैं।
शर्म आनी चाहिए ऐसे समाज पर, जहां मौत के बाद भी दलित को सम्मान नहीं मिलता।
ज़िंदा था तब दलित होने नाम पर भेदभाव, नफ़रत, ज़लालत, छुआछूत,
और जब मर गया तो उसकी चिता का धुंआ भी "अछूत" हो गया जो ब्राह्मणों के शमशान तक नहीं पहुंचना चाहिए वरना बेचारे मरे हुए ब्राह्मण भी अशुद्ध हो जाएंगे।
ये सिर्फ भेदभाव नहीं, ये इंसानियत की लाश पर खड़ा ब्राह्मणवाद है।
जिस समाज में मृतक की चिता का धुआं भी जाति देखकर स्वीकार किया जाए, उस समाज को सभ्य कहलाने का कोई अधिकार नहीं।
सारे तथाकथित स्वयंभू नेता इस पोस्ट के कमेंट्स देखें! यह एक सर्वे है!
देश और लोकतंत्र बचाना है, तो एक होकर देश भर में बैलट पेपर के लिए लड़ाई लड़ो! ECI को दलाली से मुक्त करने के उपाय करो!!
#IndiaWantsBallotPaper#VoteChorECIBJP@INCIndia@AITCofficial
https://t.co/JZMuwhCQqc
आज संसदीय शोध भवन, नई दिल्ली में सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति की बैठक में उपस्थित हुए।
उक्त बैठक में विशेषकर पीएम-जनमन एवं विशेष पिछड़े आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जनजाति कार्य मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।
जब देश के 14–15 करोड़ आदिवासियों की धरातलीय हकीकत को लेकर मैं देश की संसद में अपनी बात रखता हूँ, तो कई लोग कहते हैं कि आप किस जमाने की बात कर रहे हैं। अब तो देश बहुत प्रगति कर चुका है, भारत विश्वगुरु बनने जा रहा है।
मैं आज देश की वास्तविकता से कोसों दूर रहने वाले लोगों से कहना चाहता हूँ कि यह तस्वीर हमारे ही भारत देश की है। यह उसी भारत की तस्वीर है, जहां नेता “घर-घर नल और हर नल में जल” की बात करते हैं और जहां नारी शक्ति के सम्मान की बातें बड़े जोर-शोर से की जाती हैं।
यह मध्यप्रदेश व गुजरात राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्र की बहन-बेटियों के पानी के लिए संघर्ष की तस्वीर है, जो अपने घरों से 2–3 किलोमीटर दूर स्थित गहरे कुओं से जान जोखिम में डालकर अपने जीवन-यापन के लिए पानी निकालने को मजबूर हैं। ऐसी परिस्थितियां देश के अधिकांश आदिवासी बहुल क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं।
इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इस देश का आदिवासी सरकारों से अधिक अपेक्षा नहीं करता है। वह सिर्फ यह चाहता है कि विकास के नाम पर उसके जंगल और जमीन न छीनी जाए।
आदिवासियों का विकास केवल कागजों में हुआ है, जबकि धरातल पर स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। सरकारों की दृष्टि में आदिवासी क्षेत्रों में खनन के लिए उद्योगपतियों को जमीन आवंटित करना, फैक्ट्रियां लगाना और संसाधनों का दोहन करना ही विकास माना जाता है।
वहीं जो आदिवासी अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, जंगल-जमीन की रक्षा, आदिवासी संस्कृति, इतिहास तथा संवैधानिक अधिकारों को लागू करने की बात करते हैं, उन्हें विकास विरोधी या देश विरोधी मान लिया जाता है।
वर्तमान में टीवी चैनलों और सड़कों पर लगे होर्डिंगों में देश के विकास मॉडल को दिखाया जा रहा है, लेकिन धरातलीय हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है।
झूठे सपनों से बाहर निकलिए और देश के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी, दलित एवं गरीब तबके के लोगों के संघर्षमय जीवन को देखिए, समझिए और महसूस कीजिये।
आदिवासी समाज की शान इंजी. विलेश खराड़ी जी के जेल से रिहा होने पर स्वागत हेतु युवाओं ने अपने काम-धंधे छोड़कर, बिना भोजन किए, रात 11:26 बजे तक राणा पूंजा भील बस स्टैंड पर उपस्थित रहकर अपना सम्मान और जज़्बा दिखाया।
इस एकता और जुनून के लिए सभी साथियों को जोहार।
@INQALAB_ARMY_IN