Bhartiya Dak Ki Seva Itni bekar Hai yah log delivery Kisko Diya Hai Mujhe Nahin Pata aur mere phone mein message a gaya hai aaj 3 din se main Intezar kar raha hun ki mujhe Mera Mera parcel mujhe nahin mila Meri help kijiye
@flyspicejet Hyderabad to Kolkata SpiceJet last 16 minutes passenger dhup Mein Khade Hain Nahin ine Logon ke abhi tak planning Hui Hai boarding Itna jaldi chalu kar diya hai customer ki koi Parvah Nahin Hai Koi Bujurg Hai Koi Baccha Hai Ke Log Sab dhup Mein Khade Hain
Southern Railway Chennai ignore
Pdy Kcg Express train number 17654 B3 toilet mein toilet Mein Pani West ho raha hai hamara journey start hua tha vilupuram se vahan se Pani Bah raha ha Yahan per Koi Safai Karmi nahi dikha hai na hi koi staff hai yah Pani West band karvaye
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Mera account HDFC Bank Hyder Nagar branch Hyderabad Mein Tha maine account close Kara Diya to Mujhe closing later Nahin de rahe hain manager Sar Ko Kya dikkat Hai Meri help Karen
Branch. Hydernagar
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Yah Mera account hai aur maine Ek mahine pahle account close kiya tha to Mujhe HydrrNagar branch mein Gaya to closing later Nahin de rahe hain to closing later dene mein manager Ko Kya dikkat Hai Meri help Karen HDFC Bank
जोधपुर के दैनिक भास्कर के 14-12-2023 एडिशन की यह खबर जरूर पढ़ें।
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इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें : जो आपको हमेशा स्वस्थ और सेहतमंद रखेंगी :-
◾जब बाल झड़ रहे हों तब...
(1). नीम का पेस्ट स��र में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।
(2). बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।
(3). दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
◾कफ और सर्दी जुकाम हो जाये तो...
सर्दी जुकाम, कफ आए दिन की समस्या है।
आप ये घरेलू उपाय आजमाकर इनसे बचे रह सकते हैं।
(1). नाक बह रही हो तो काली मिर्च, अदरक, तुलसी को शहद में मिलाकर दिन में तीन बार लें। नाक बहना रुक जाएगा।
(2). गले में खराश या ड्राई कफ होने पर अदरक के पेस्ट में गुड़ और घी मिलाकर खाएं। आराम मिलेगा।
(3). नहाते समय शरीर पर नमक रगड़ने से भी जुकाम या नाक बहना बंद हो जाता है।
(4). तुलसी के साथ शहद हर दो घंटे में खाएं। कफ से छुटकारा मिलेगा।
◾शरीर एवं सांस से दुर्गंध आ रही हो तो...
यह परेशानी भी आम है।
कई बार तो हमें इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ जाता है।
(1). नहाने से पहले शरीर पर बेसन और दही का पेस्ट लगाएं। इससे त्वचा साफ हो जाती है और बंद रोम छिद्र भी खुल जाते हैं।
(2). गाजर का जूस रोज पिएं। तन की दुर्गध दूर भगाने में यह कारगर है।
(3). पान के पत्ते और आंवला को बराबर मात्रा में पीसे। नहाने के पहले इसका पेस्ट लगाएं। फायदा होगा।
(4). सांस ��ी बदबू दूर करने के लिए रोज तुलसी के पत्ते चबाएं।
(5). इलाइची और लौंग चूसने से भी सांस की बदबू से निजात मिलता है।
उच्च रक्त चाप से परेशान हों तब...
(1)- कुछ दिनों तक लगातार आधा चम्मच मैथी दाना का पॉउड़र पानी के साथ लेने से उच्च रक्त चाप में लाभ होता है।
(2)- तुलसी के पाँच पत्ते और नीम के दो पत्ते कुछ दिनों तक लेने से उच्च रक्त चाप मे लाभ होता है।
(3)- तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से उच्चरक्त चाप मे�� लाभ होता है।
(4)- दो कली लहसुन की खाली पेट लेने से उच्च रक्त चाप में फायदा होता है।
(5)- लौकी का एक कप रस सुबह खाली पेट लेने से उच्च रक्त चाप कम होने में फायदा करता है।
(6)- प्रतिदिन एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस लेना सभी रोगों में लाभकारी होता है।
पैर में मोच आ जाये तो...*
(1)- आक या पान का पत्ता या आम का पत्ते को चिकना कर नमक लगा कर उस स्थान पर बांधने से काफी लाभ होता है।
(2)- चोट लगने पर नमक में काले तिल, स��खा नारियल और हल्दी मिला कर पीस कर गरम कर चोट वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है।
घुटनों के दर्द के कुछ और बेहतरीन घरेलू उपाय...*
(1)- सुबह खाली पेट तीन चार अखरोट की गिरियां निकाल कर कुछ दिनों तक खाना चाहिए। इसके नियंत्रित सेवन से घुटनों के दर्द में आराम मिलता है। नारियल की गिरी भी खाई जा सकती है। इससे घुटनों के दर्द में राहत मिलती है।
अस्थमा की समस्या से जूझ रहे हो तो...*
(1)- तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च डालकर खाने के साथ देने से दमा नियंत्रण में रहता है।
(2)- गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी दमे को नियंत्रित करने में राहत मिलती है।
*किडनी में पथरी की समस्या हो तो...*
तीन हल्की कच्ची भिंड़ी को पतली पतली लम्बी लम्बी काट लें। कांच के बर्तन में दो लीटर पानी में कटी हुई भिंडी डाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह भिंडी को उसी पानी में निचोड़ कर भिंडी को निकाल लें। ये सारा पानी दो घंटों के अन्दर अन्दर पी लें। इससे किडनी की पथरी से छुटकारा मिलता है।
◾पेट में वायु की अधिकता हो तो...
(1)- ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए भोजन के बाद 3-4 मोटी इलायची के दाने चबा कर ऊपर से नींबू पानी पीने से पेट हल्क��� होता है।
(2)- सुबह-शाम 1/4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट नर्म होता है।
(3)- अजवायन और काला नमक को समान मात्रा में मिला कर गर्म पानी से पीने से पेट का अफारा ठीक होता है।
नाभि के अपने स्थान से खिसक जाने पर...
(1)- मरीज़ को सीधा लिटाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आंवले का आटा बना कर उसमें अदरक का रस मिलाकर बांध दें और दो घंटों के लिए सीधा ही लेटे रहने दें। दो बार ऐसा करने से नाभि अपने स्थान पर आ जायेगी। दर्द और दस्त जैसे कष्ट भी दूर होंगे।
(2)- ऐसे समय में मरीज़ को मूंग की दाल वाली खिचड़ी खाने में देनी चाहिए।
(3)- अदरक और हींग का सेवन भी फायदा करता है।
दस्त की समस्या से परेशान हों तो...
(1)- खाना खाने के बाद एक कप लस्सी में एक चुटकी भुना ज़ीरा और काला नमक ड़ाल कर पीएं। दस्त में आराम आयेगा।
(2)- अदरक का रस नाभि के आस-पास लगाने से दस्त में आराम मिलता है।
12. गंजापन :-
सरसों के तेल में अपामार्ग के पत्तों को जलाकर मसल लें और मलहम बना लें। इसे गंजे स्थानों पर नियमित रूप से लेप करते रहने से पुन: बाल उगने की संभावना होगी।
13. दांतों का दर्द और गुहा या खाँच (cavity) :-
इसके 2-3 पत्तों के रस में रूई का फोया बनाकर दांतों में लगाने से दांतों के दर्द में लाभ पहुंचता है तथा पुरानी से पुरानी गुहा या खाँच को भरने में मदद करता है।
14. खुजली :-
अपामार्ग के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें और इससे स्नान करें। नियमित रूप से स्नान करते रहने से कुछ ही दिनों cavity में खुजली दूर जाएगी।
15. आधाशीशी या आधे सिर में दर्द :-
इसके बीजों के चूर्ण को सूंघने मात्र से ही आधाशीशी, मस्तक की जड़ता में आराम मिलता है। इस चूर्ण को सुंघाने से मस्तक के अंदर जमा हुआ कफ पतला होकर नाक के द्वारा निकल जाता ह�� और वहां पर पैदा हुए कीड़े भी झड़ जाते हैं।
16. ब्रोंकाइटिस :-
जीर्ण कफ विकारों और वायु प्रणाली दोषों में अपामार्ग (चिरचिटा) की क्षार, पिप्पली, अतीस, कुपील, घी और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से वायु प्रणाली शोथ (ब्रोंकाइटिस) में पूर्ण लाभ मिलता है।
17. खांसी :-
खांसी बार-बार परेशान करती हो, कफ निकलने में कष्ट हो, कफ गाढ़ा व लेसदार हो गया हो, इस अवस्था में या न्यूमोनिया की अवस्था में आधा ग्राम अपाम���र्ग क्षार व ��धा ग्राम शर्करा दोनों को 30 मिलीलीटर गर्म पानी में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में बहुत ही लाभ होता है।
18. गुर्दे का दर्द :-
अपामार्ग (चिरचिटा) की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में घोलकर पिलाने से बड़ा लाभ होता है। यह औषधि मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े करके निकाल देती है। गुर्दे के दर्द के लिए यह प्रधान औषधि है।
19. गुर्दे के रोग :-
5 ग्राम से 10 ग्राम चिरचिटा की जड़ का काढ़ा 1 से 50 ग्राम सुबह-शा��� मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है । या 2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिटा) की जड़ को पानी के साथ पीस लें। इसे प्रतिदिन पानी के साथ सुबह-शाम पीने से पथरी रोग ठीक होता है।
20. दमा या अस्थमा :-
चिरचिटा की जड़ को किसी लकड़ी की सहायता से खोद लेना चाहिए। ध्यान रहे कि जड़ में लोहा नहीं छूना चाहिए। इसे सुखाकर पीस लेते हैं। यह चूर्ण लगभग एक ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ खाएं इ��से श्वास रोग दूर हो जाता है। अपामार्ग (चिरचिटा) का क्षार 0.24 ग्राम की मात्रा में पान में रखकर खाने अथवा 1 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से छाती पर जमा कफ छूटकर श्वास रोग नष्ट हो जाता है।
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अपामार्ग या चिरचिटा का पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान से कम नही...
आज हम आपको ऐसे पौधे के बारे में बताएँगे जिसका तना, पत्ती, बीज, फूल, और जड़ पौधे का हर हिस्सा औषधि है, इस पौधे को अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree), लटजीरा कहते है। अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree) का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा (Chaff Tree) भी कहते हैं-अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं-सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग (RedChaff Tree) का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं।
इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है- पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है।
अपामार्ग तीखा, कडुवा तथा प्रकृति में गर्म होता है। यह पाचनशक्तिवर्द्धक, दस्तावर (दस्त लाने वाला), रुचिकारक, दर्द-निवारक, विष, कृमि व पथरी नाशक, रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), बुखारनाशक, श्वास रोग नाशक, भूख को नियंत्रित करने वाला होता है तथा सुखपूर्वक प्रसव हेतु एवं गर्भधारण में उपयोगी है।
चिरचिटा या अपामार्ग (Chaff Tree) के 20 अद्भुत फ़ायदे -:
1. गठिया रोग :-
अपामार्ग (चिचड़ा) के पत्ते को पीसकर, गर्म करके गठिया में बांधने से दर्द व सूजन दूर होती है।
2. पित्त की पथरी :-
पित्त की पथरी मे��� चिरचिटा की जड़ आधा से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पूरा लाभ होता है। काढ़ा अगर गर्म-गर्म ही खायें तो लाभ होगा।
3. यकृत का बढ़ना :-
अपामार्ग का क्षार मठ्ठे के साथ एक चुटकी की मात्रा से बच्चे को देने से बच्चे की यकृत रोग के मिट जाते हैं।
4. लकवा :-
एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है।
5. पेट का बढ़ा होना या लटकना :-
चिरचिटा (अपामार्ग) की जड़ 5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या जड़ का काढ़ा 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ खाना खाने से पहले पीने से आमाशय का ��ीलापन में कमी आकर पेट का आकार कम हो जाता है।
6. बवासीर :-
अपामार्ग की 6 पत्तियां, कालीमिर्च 5 पीस को जल के साथ पीस छानकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है और उसमें बहने वाला रक्त रुक जाता है। खूनी बवासीर पर अपामार्ग की 10 से 20 ग्राम जड़ को चावल के पानी के साथ पीस-छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाना गुणकारी हैं।
7. मोटापा :-
अधिक भोजन करने के कारण जिनका वजन बढ़ रहा हो, उन्हें भूख कम करने के लि��� अपामार्ग के बीजों को चावलों के समान भात या खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने भी लगेगी।
8. कमजोरी :-
अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से शरीर में पुष्टता आती है।
9. सिर में दर्द :-
अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर बनाए लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर होता है।
10. संतान प्राप्ति :-
अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से गर्मधारण होता है। दूसरे प्रयोग के रूप में ताजे पत्तों के 2 चम्मच रस को 1 कप दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित ��ेवन से भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
11. मलेरिया :-
अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से इस ज्वर का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का दो-चार दिन सेवन पर्याप्त होता है।
train no 07696
B2 18 19 birth
Villupuram se Secunderabad ke liye cal sham ko 7:30 baje se na hi koi clean Karne Wala Aaya Hai Na Koi spry Koi saaf Safai Nahin Hai
कुछ जरूरी वैदिक अलौकिक ज्ञान जो हर सनातनी हिन्दू को होनी चाहिए
#thread
सामान्य ज्ञान विशिष्ट शब्दों का अर्थ इस प्रकार समझना चाहिए ।
पंचोपचार – गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं।
पंचामृत – दूध ,दही , घृत, मधु { शहद ] तथा शक्कर इनके मिश्रण को ‘पंचामृत’ कहते हैं।
पंचगव्य – गाय के दूध ,घृत , मूत्र तथा गोबर इन्हें सम्मिलित रूप में ‘पंचगव्य’ कहते हैं।
षोडशोपचार – आवाहन् , आसन , पाध्य , अर्घ्य ,
आचमन , स्नान , वस्त्र , अलंकार , सुगं�� , पुष्प , धूप ,
दीप , नैवैध्य , ,अक्षत , ताम्बुल तथा दक्षिणा इन
सबके द्वारा पूजन करने की विधि को ‘षोडशोपचार’
कहते हैं।
दशोपचार – पाध्य ,अर्घ्य ,आचमनीय , मधुपक्र , आचमन , गंध , पुष्प ,धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने की विधि को ‘दशोपचार’ कहते हैं।
त्रिधातु –सोना , चांदी और लोहा कुछ आचार्य सोना ,चांदी , तांबा इनके मिश्रण को भी ‘त्रिधातु’ कहते हैं।
पंचधातु – सोना , चांदी , लोहा ,तांबा और जस्ता।
अ���्टधातु – सोना , चांदी, लोहा ,तांबा , जस्ता , रांगा ,कांसा और पारा।
नैवैध्य –खीर , मिष्ठानआदि मीठी वस्तुये।
नवग्रह –सूर्य , चन्द्र , मंगल , बुध , गुरु , शुक्र , शनि , राहु और केतु।
नवरत्न – माणिक्य , मोती ,मूंगा ,पन्ना ,पुखराज , हीरा ,नीलम , गोमेद , और वैदूर्य।
अष्टगंध – अगर , तगर , गोरोचन , केसर ,कस्तूरी ,,श्वेत चन्दन , लाल चन्दन और सिन्दूर देव पूजन
अगर , लाल चन्दन ,हल्दी , कुमकुम , गोरोचन , जटामासी ,शिलाजीत औ�� कपूर [ देवी पूजन हेतु]
गंधत्रय – सिन्दूर , हल्दी , कुमकुम।
पञ्चांग – किसी वनस्पति के पुष्प , पत्र ,फल , छाल ,और जड़।
दशांश – दसवां भाग।
भोजपत्र – एक वृक्ष की छाल
मन्त्र प्रयोग के लिए भोजपत्र का ऐसा टुकडा लेना चाहिए ,जो कटा-फटा न हो।
मन्त्र धारण –किसी भी मन्त्र
को स्त्री पुरुष दोनों ही कंठ में धारण कर सकते हैं ,परन्तु यदि भुजा में धारण करना चाहें तो पुरुषको अपनी दायीं भुजा में और स्त्री को बायीं भुजा में धारण करना चाहिए।
मुद्राएँ –हाथों की अँगुलियों को किसी व��शेष स्तिथि में लेने कि क्रिया को‘मुद्रा’ कहा जाता है। मुद्राएँ अनेक प्रकार की होती हैं।
स्नान –यह दो प्रकार का होता है।बाह्य तथा आतंरिक,बाह्य स्नान जल से तथा आन्तरिक स्नान जप द्वारा होता है।
तर्पण –नदी , सरोवर ,आदि के जल में घुटनों तक पानी में खड़े होकर ,हाथ की अंजुली द्वारा जल गिराने की क्रिया को ‘तर्पण’ कहा जाता है। जहाँ नदी , सरोवर आदि न हो ,वहां किसी पात्र में पानी भरकर भी ‘तर्पण’ की क्र���या संपन्न ��र ली जाती है।
आचमन – हाथ में जल लेकर उसे अपने मुंह में डालने की क्रिया को आचमन कहते हैं।
करन्यास –अंगूठा , अंगुली , करतल तथा करपृष्ठ पर मन्त्र जपने को ‘करन्यास’ कहा जाता है।
हृद्याविन्यास –ह्रदय आदि अंगों को स्पर्श करते हुएमंत्रोच्चारण को ‘हृदय्विन्यास’ कहते हैं।
अंगन्यास – ह्रदय ,शिर , शिखा , कवच , नेत्र एवं करतल – इन 6 अंगों से मन्त्र का न्यास करने की क्रिया को ‘अंगन्यास’ कहते हैं।
अर��घ्य – शंख , अंजलि आदि द्वारा जल छोड़ने को अर्घ्य देना कहा जाता है घड़ा या कलश में पानी भरकर रखने को अर्घ्य-स्थापन कहते हैं।अर्घ्य पात्र में दूध ,तिल , कुशा के टुकड़े , सरसों , जौ , पुष्प , चावल एवं कुमकुम इन सबको डाला जाता है।
पंचायतन पूजा – इसमें पांच देवताओं – विष्णु , गणेश ,सूर्य , शक्ति तथा शिव का पूजनकिया जाता है।
काण्डानुसमय – एक देवता के पूजाकाण्ड को समाप्त कर ,अन्य देवता की पूजा करने को ‘का��्डानुसमय’ कहते हैं।
उद्धर्तन – उबटन।
अभिषेक – मन्त्रोच्चारण करते हुए शंख से सुगन्धित जल छोड़ने को ‘अभिषेक’ कहते हैं।
उत्तरीय – वस्त्र।
उपवीत – यज्ञोपवीत [ जनेऊ]।
समिधा – जिन लकड़ियों को अग्नि में प्रज्जवलित कर होम किया जाता है उन्हें समिधा कहते हैं।समिधा के लिए आक ,पलाश , खदिर , अपामार्ग , पीपल ,उदुम्बर ,शमी , कुषा तथा आम कीलकड़ियों को ग्राह्य माना गया है।
प्रणव –ॐ।
मन्त्र ऋषि – जिस व्यक्ति ने सर्वप्रथम शिवजी के मुख से मन्त्र सुनकर उसे विधिवत सिद्ध किया था ,वह उस मंत्र ��ा ऋषि कहलाता है। उस ऋषि को मन्त्र का आदि गुरु मानकर श्रद्धापूर्वक उसका मस्तक में न्यास किया जाता है।
छन्द – मंत्र को सर्वतोभावेन आच्छादित करने की विधि को ‘छन्द’ कहते हैं।यह अक्षरों अथवा पदों से बनताहै। मंत्र का उच्चारण चूँकि मुख से होता है अतः छन्द का मुख से न्यास किया जाता है।