मुख्यमंत्री जी आपके इन सवालों का जवाब नहीं दे पाते इसीलिए चले गए���
8 सालों से शिक्षक भर्ती क्यों नहीं आई है।
TGT/PGT के पुराने नियमावली में एकाएक क्यों बदलाव कर दिया गया।
5 सालों से पंचायत सहायकों का मानदेय क्यों नहीं बढ़ाया गया है।
आयुष इंटर्न डॉक्टरो को सम्मानजनक स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा है।
जूनियर असिस्टेंट भर्ती का रिजल्ट क्यों नहीं जारी किया जा रहा।
क्यों यूपी मे 9,508 स्कूल ऐसे हैं जहाँ पहली से लेकर पांचवीं तक के स्कूलों मे एनरोल 6 लाख से ज्यादा बच्चों को, सारे विषय सिर्फ एक ही टीचर पढ़ा रहे है, और राज्य मे ऐसे हालत किसी एक तरह के विद्यालय के नहीं है बल्कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालय, हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सर्वोदय विद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय मॉडल विद्यालय, संस्कृत माध्यमिक विद्यालय हर तरह के राज्य के अधीन स्कूलों का हाल ऐसा क्यूं है… कहीं मैथ-विज्ञान के टीचर नहीं तो कहीं इंग्लिश के नहीं है…सरकार दावे विश्व गुरु बनने की करती है पर स्कूलों मे बिना शिक्षकों को नियु��्त किए सरकार कैसे विश्व गुरु बन सकती है।
पत्रकार महोदया आपके ऐसे सवालों का जवाब मुख्यमंत्री जी के पास नहीं है इसीलिए वह प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर जा रहे हैं।
कम से कम मुख्यमंत्री जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तो रहे हैं भले ही जवाब ना देते हो स्क्रिप्टेड रिल बनवा कर चले जाते हो।
पर हमारे देश के प्रधानमंत्री जी तो मन की बात करते हैं, आधी रात में रिल बनाते हैं, युवाओं से कनेक्ट करने के लिए Gen-Z वार्ता कर��े हैं पर प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते।
India's education system is failing the very generation it was meant to lift.
Paper leaks. Crushing fees. Decaying infrastructure. Millions of young Indians work honestly, and the system still lets them down.
Fixing it begins with listening to those who experience its failures every day.
Students, parents, teachers, tell me: why have you lost hope in the education system?
Share your experiences, evidence and ideas at the link. Together, we will bring hope back.
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को ��ैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
हमारा सिस्टम किस तरह से आम आदमी का खून चूसता है, उसे तड़पाता है, उसका उत्पीड़न करता है, इसे समझना है तो अमायरा का केस फॉलो कर लीजिए।
जिन्हें नहीं पता, अमायरा नौ साल की बच्ची थी। हंसती खेलती बच्ची। स्कूल में बेस्ट ऑलराउंडर। डांस में चैंपियन। म्यूजिक में चैंपियन। पढ��ने में चैंपियन।
लेकिन अमायरा को उसकी क्लास के बच्चे तंग करते थे। बुली करते थे। बच्चों से क्या उम्मीद करें? बच्चे तो बच्चे होते है। ज़िम्मेदारी टीचर्स की है। कि वो बच्चों को समझाये। उन्हें सही ग़लत में फ़र्क़ महसूस कराए।
लेकिन नीरजा मोदी स्कूल के टीचर्स ने ऐसा नहीं किया। एक नवंबर 2025 को बच्चे लगातार अमायरा को तंग कर रहे थे। बच्ची उ�� कर पाँच बार टीचर्स से शिकायत करने गई। क्लास टीचर मोबाइल फोन में व्यस्त थी और दूसरी टीचर, जिसे उस समय क्लास लेनी थी, वो क्लास नहीं ले रही थी। अमायरा साफ़ तौर पर बहुत परेशान दिख रही थी। बातचीत के बीच ही वो क्लास से निकल गई। किसी टीचर ने उसे रोका नहीं। किसी ने यह तक नहीं पूछा कि कहाँ जा रही हो? वो स्कूल में भागती हुई चौथी मंजिल की तरफ़ गई, लेकिन रास्ते में भी किसी ने उसे नहीं रोका।
बच्ची से अपमान सहा नहीं गया। वो स्कूल की चौथी मंजिल पर गई और छलाँग लगा दी।
लेकिन असली कहानी यहाँ से शुरू होती है।
आपको पता है कि घटना के बाद स्कूल ने क्या किया? सबसे पहले झाड़ू पोंछा लगाकर सारे खून के धब्बे मिटाए। सीसीटीवी फुटेज ग़ायब करने की कोशिश की। लगातार पुलिस को गुमराह किया।
लेकिन सीबीएसई ने इस मुद्दे पर स्टैंड लिया। उन्होंने सुरक्षा जाँच में कई ख़ामिया पायी, और स्कूल की 9 से 12 तक की मान्यता रद्द कर दी। कुछ समय बाद सीबीएसई ने 9 और 10 की मान्यता फिर से देदी।
लगा कि अब इंसाफ़ होगा। लेकिन इस देश में आम आदमी के साथ इंसाफ़ होता कहाँ है?
नीरजा मोदी स्कूल ने अपने रुतबे का फ़ायदा उठाकर, बड़े से बड़े वकील लगाकर उच्च न्यायालय में सीबीएसई के निर्णय पर रोक ले ली।
राजस्थान सरकार इस दौरान सोती रही। 18 मार्च 2026 को जिस दिन सीबीएसई के आदेश पर उच्च न्यायालय से रोक मिली, उसी दिन राजस्थान शिक्षा विभाग ने सीबीएसई के आदेश को कॉपी पेस्ट करके अपना आदेश निकाल दिया। और अपने उसी आदेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर कमियां भी दर्ज कीं। लेकिन फिर 2 अप्रैल की न्यायालय की सुनवाई में राजस्थान सरकार ने खुद ही न्यायालय को बताया कि उसने अपने 18 मार्च वाले आदेश को रोक दिया है।
अमायरा को गए हुए दस महीने हो गए। लेकिन कुछ नहीं बदला। प्रिंसिपल को कुछ नहीं हुआ। स्कूल आराम से चल रहा है। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया, तो उसमें सही धाराएं ही नहीं लगायी। मजिस्ट्रेट न्यायालय ने भी परिवार की शिकायत पर सुनवाई नहीं की और सभी आरोपियों को जमानत दे दी। अब सत्र न्यायालय को परिवार की उस शिकायत पर निर्णय लेना है जिसमें आरोपियों पर सही धाराएं लगाने की मांग की गई है। लेकिन चार बार तारीखें मिल चुकी हैं और अभी तक आदेश नहीं किया गया।
सिस्टम में कुछ नहीं बदला - ना मानसिक स्वा��्थ्य पर ध्यान गया, ना सुरक्षा जाँच हुई, ना सुरक्षा मानकों को दुरुस्त किया गया। ना अमायरा को इंसाफ़ मिला।
बस एक परिवार को तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।
लेकिन यह सिस्टम एक बात भूल गया है।
आज का भारत जंतर मंतर के बाद का भारत है। अब जनता अपने हक के लिए तुमसे भीख नहीं माँगेगी। अब जनता इंसाफ़ के लिए तुम्हारे आगे गिड़गिड़ाएगी नहीं। अब जनता दर दर की ठोकरे नहीं खायेगी।
अब जनता उठ खड़ी होगी। अब जनता तुम्हारी हेंकड़ी और तुम्हारी अकड़ को उखाड़ फेंकेगी।
मैंने और @abhijeet_dipke ने अमायरा के माता पिता विजय-शिवानी से वादा किया था कि अमायरा को इंसाफ़ दिलाने तक चुप नहीं बैठेंगे। जंतर मंतर पर अमायरा की तस्वीर पूरे समय मौजूद थी।
तो हम अमायरा के मुद्दे पर सिस्टम से सिर्फ एक ही बात कहना चाहेंगे। अगर आपको लग रहा है कि अमायरा का परिवार अकेला है और उन्हें आप ऐसे तड़पा सकते है, तो यह आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी।
अमायरा हम सबकी बच्ची है। न्याय करिए। पूरा देश देख रहा है��
@BhajanlalBjp
Yesterday, the PM visited DU, gave a political speech and even invoked the term “Dimagi Naxal,” while speaking very little about the state of our educational infrastructure.
Today, a hostel building in South Campus has collapsed, with students feared trapped under the debris. The number of casualties is still unknown.
For how long will students in this country have to pay the price for failing infrastructure and neglect?
Adivasi students are dying in tribal belts due to a lack of care and support, and even students studying in the national capital are not safe.
Students deserve safe classrooms, safe hostels and basic dignity. Is that really too much to ask?
Will the PM visit DU again and explain how did this happen?
I explain analytical base of my conclusion that GDP growth in Q1 in 2026-27 in current price is 2.6% and in real terms close to 0. There are still messier distortions in sectoral performance with manufacturing and consumption witnessing negative growth. https://t.co/pvsjXlAdcq
अगर TRE4 बहाली के भाषा विषय क्वालीफाई पेपर में निगेटिव मार्किंग लागू हुआ तो ये TRE4 अभ्यर्थियों के लिए बहुत ही घातक होगा इसमें से निगेटिव हटना चाहिए अन्यथा अनर्थ हो जाएगा।
क्वालीफाई पेपर भाषा विषय से निगेटिव मार्किंग हटाया जाए। @mkrtiwari_bjp@BiharEducation_@DileepY51270176
Students are protesting across almost every state in the country.
It shows just how long the young generation’s concerns have been ignored and how often they have been taken for granted.
Governments across the country must wake up, listen to these young people and address their concerns.
#FMGE #BPSC #IITDelhi #TribalStudentProtest #TelanganaPolytechnic
REMEMBERING THE HEROES...
Just like the govt. is yet to fulfil its promise of compensation for 20 NEET Martyrs & withdrawal of cases against heroes of Jantar Mantar, similarly Ladakh reminds the govt. about the Martyrs & heroes of September 24 last year.
Aug 24 to September 24 is being observed as #MARTYRSMONTH