नेहरु का रिकॉर्ड साल , महीने और दिन गिनकर नहीं तोड़ा जा सकता. नेहरु ने अपने कालखंड में जो किया और देश को जो दिया , उससे इन 12 सालों की तुलना ही नहीं की जा सकती . समाज में नफ़रत और ज़हर का घोल नेहरु ने नहीं घोला था . नेहरु ने बड़े -बड़े संस्थान तब बनाए थे , जब देश गुलामी से आज़ाद हुआ था . हज़ार तरह की चुनौतियां थी. आर्थिक तौर भारत बहुत कमज़ोर था. अंग्रेज गरीबी और तंगी हमारे हिस्से में छोड़ गए थे . वैश्विक पटल भी भारत एक आज़ाद मुल्क के तौर पर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था . तब भी नेहरु ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना को साकार करने की कोशिश की थी , जिसमें भाईचारा हो , मोहब्बत हो .धर्म आधारित राजनीति न हो , सांप्रदायिकता न हो .
नेहरु ने तरक्की की ऐसी बुनियाद रखी थी , जिसमें नफ़रत और साम्प्रदायिकता की कोई जगह नहीं थी . और आज ?
मीडिया को गुलाम बनाकर अपनी चाटुकारिता करवा लेने से कोई नेहरु नहीं बन सकता .
@RaviRanjanIn Bc pehle se hi itna high hai aab kya 1000 par krega,
Isiliye tumko gobar bhakt bola jata hai.
Tax comparison kar le in sari desho ka fuel price par. Hutiye