@Yadav_Rahul0 @Uppolice ब्राम्हण देवता (भगवान्) होते है। धर्म की रक्षा के मूत्र।छिड़कना या पीना पुण्य का काम होता है।"खबरदार" उस महिला को जेल भेजवाकर पाप मत करना।😴
मुस्लिम समाज के चर्चित चेहरा 'नसीमुद्दीन सिद्दीकी' बहुजन राजनीति का एक विस्मृत अध्याय हैं —
'राजनीति' में वक़्त बहुत बड़ा शिक्षक होता है। जो समय के साथ खुद को नहीं बदलता ,राजनीति उसे बदल देती है। यही कहानी है नसीमुद्दीन सिद्दीकी की —
एक ऐसा चेहरा ,जो कभी 'बहुजन समाज पार्टी' का मुस्लिम चेहरा हुआ करता था ,मगर आज गुमनामियों के अंधेरे में खो चुका है।
'आदरणीय बहनजी' का विशेष विश्वास —
'नसीमुद्दीन सिद्दीकी' को 'आदरणीय बहन कु. मायावती जी' का अत्यंत विश्वास प्राप्त था। उन्होंने उन्हें उत्तर प्रदेश की 'बहुजन समाज पार्टी' की सरकार में सात महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी थी — जो अपने आप में ही एक मिसाल थी।
'नसीमुद्दीन सिद्दीकी' को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव, प्रवक्ता, और मुस्लिम समाज का सबसे प्रमुख चेहरा बनाया गया था। वे बहनजी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माने जाते थे।
परन्तु —
बढ़ती ताकत और बढ़ता अहंकार ,
लेकिन जैसा कि एक कहावत है — "कुत्ते को खीर नहीं पचती", वही हाल कुछ नसीमुद्दीन सिद्दीकी का भी हो गया !
पार्टी में उनका रुतबा इतना बढ़ गया कि वे खुद को ‘पार्टी से बड़ा’ समझने लगे। बहुजन आंदोलन, जो "परम पूज्य बाबा साहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर जी" और "मान्यवर साहेब कांशीराम जी" की विचारधारा पर आधारित था। उस आंदोलन को नसीमुद्दीन ने अपनी सत्ता की सीढ़ी बना लिया।
उनपर भ्रष्टाचार, टिकट बेचने, कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार और संगठन में गुटबाज़ी जैसे कई आरोप लगे। कार्यकर्ता, जो समाज बदलने का सपना लेकर आए थे ,वे हाशिए पर धकेल दिए गए और उनके स्थान पर चमचों की टोली खड़ी कर दी गई।
इसलिए —
2017 में ,जब पार्टी की हार हुई और समीक्षा बैठकों में जब नसीमुद्दीन से जवाब माँगा गया ,तो उन्होंने उल्टा पार्टी पर ही सवाल खड़े किए।
तभी आदरणीय बहनजी ने पार्टी की गरिमा और अनुशासन को बनाए रखते हुए उन्हें पार्टी से निकालने का कठोर निर्णय लिया।
यही वो मोड़ था ,जहाँ नसीमुद्दीन का राजनीतिक ग्राफ गिरना शुरू हुआ।
जैसे ही बहनजी ने — इन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया बैसे ही इन्होंने कांग्रेस का दामन थामा लेकिन कोई कामयाबी ना कमा पाये.
नसीमुद्दीन की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है — यह उस प्रवृत्ति की कहानी है ,जिसमें व्यक्ति खुद को विचारधारा से बड़ा मानने लगता है।
परम पूज्य बाबा साहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर जी और मान्यवर साहेब कांशीराम जी का आंदोलन व्यक्ति-पूजा नहीं , विचार-पूजा का आंदोलन था।
जिसने इस मूल भावना से समझौता किया ,वह इतिहास से मिटा दिया गया।
आदरणीय बहनजी ने —जिस विश्वास के साथ उन्हें शीर्ष पर पहुँचाया ,उन्होंने उस विश्वास का अपमान किया। यही कारण है कि आज नसीमुद्दीन का कोई "आता-पता" नहीं — न वे बहुजन राजनीति में हैं ,न ही मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार किए जाते हैं।
इसलिए सत्य ही कहा गया है कि —
राजनीति में पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं होते। जो लोग जनता और पार्टी के विचारों को छोड़कर व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देते हैं ,वे अंततः हाशिए पर चले जाते हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी की कहानी बहुजन कार्यकर्ताओं के लिए एक चेतावनी है — कि विचारों से गद्दारी करने वाला कितना भी बड़ा क्यों न हो, जनता उसे भुला देती है।
जय भीम | जय भारत
@SathiBsp 🖋️
पेड़ से बँधा हुआ ख़ून से लथपथ व्यक्ति कोई डाकू या हत्यारा नहीं एक डॉक्टर है।
इनकी गलती इतनी है की इन्होंने बलात्कार पीड़िता की मां का इलाज किया।
आरोपियों ने इसी जुर्म की सजा दी।
अब बिहार में क़ानून नहीं , अपराधी सज़ा देते हैं।
बेहद शर्मनाक, निंदनीय,
मेरठ में ऑटो रिक्शा चालक #अश्वनी_लोधी को दारोगा ने जिंदा जलाया। कसूर इतना था ये दारोगा को रिश्वत नहीं देना चाहता था।
सोचिए एक गरीब के साथ इतनी घटिया जालिमाना हरकत वो भी दरोगा करे। ऐसे दरोगा इस पद पर रहने के काबिल नहीं है।
इसे इतना वायरल करो कि दारोगा स्पेंड हो जाए। और इस व्यक्ति को इंसाफ मिल सके।
बहुत बड़ी खबर।
सपा के PDA ने “दलितों” को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा-
बुलंदशहर में मुस्लिम और यादवों ने दलितों को जमकर पीटा, सपा जब सत्ता में थी, तब भी यही हाल था।
वैसे व्यक्तिगत रूप से मेरा तो मन प्रसन्न हो गया।
सोचिए जब केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री के संसदीय क्षेत्र किशनगढ़ में ही नकली DAP खाद का धंधा जोरों पर हो और किसानों के साथ विश्वासघात किया जा रहा हो, तो बाकी देश में क्या हाल होगा?
कृषि राज्यमंत्री घर में मार्बल पाउडर और मिट्टी पर रंग चढ़ाकर नकली DAP बनाने की फैक्ट्रियां चल रही हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि सरकार से लेकर अधिकारी तक किसी को भनक नहीं है।
या फिर भाजपा नेता ज़मीर बेचकर ज़हर की सौदेबाजी कर रहे थे? अगर नहीं तो अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की.. किसका दबाव था?
नकली खाद का यह भंडाफोड़ भाजपा सरकार में प्रचंड भ्रष्टाचार की निशानी है। डबल इंजन की सरकार में डबल भ्रष्टाचार और धोखा है। जुमलेबाजों की सरकार में अन्नदाता ज़मीन में ज़हर बोने को मजबूर है। शर्मनाक!
सरकार को जांच करवाकर दोषियों और कमीशनखोरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
आइए, आज बिहार के दो यादव नेताओं की बात करते हैं।
एक हैं राजद के तेजस्वी यादव और दूसरे हैं बीएसपी के सतीश यादव पिन्टू।
तेजस्वी यादव को पिता लालू प्रसाद यादव की विरासत मिली,जबकि बीएसपी के सतीश यादव को संघर्ष मिला।
तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद यादव ने विधायक से लेकर उपमुख्यमंत्री बनाया।
बीएसपी के सतीश यादव को विधायक बनने से रोकने के लिए सन 2020 एवं उप-चुनाव 2024 में रामगढ़ से हरवा दिया गया।
तेजस्वी यादव फिर से मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं,जबकि बीएसपी के सतीश यादव पिन्टू को रोकने के लिये राजद हर बार इनके वोट काट देती है।
राजद नहीं चाहती कि बीएसपी नेता सतीश यादव रामगढ़ से चुनाव जीते और यादव समाज में बड़ा नेता बनकर उभरे।
बिहार की सम्मानित जनता से मेरा अनुरोध है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीएसपी के सतीश यादव पिन्टू को रामगढ़ विधानसभा से चुनाव जिताकर बिहार विधानसभा जरूर भेजिए।
पेरियार रामासामी नायकर बताते थे कि मंदिर दुराचार के अड्डे है।
यह वीडियो देखने के बाद पता चला।
ब्राह्मण कभी भी धार्मिक नहीं होते।
मंदिर तो उनके लूटने के अड्डे है।
ब्राह्मण धर्म मानवता पर कलंक है।
वैदिक/ब्राह्मण धर्म को खत्म कर देना ही उचित है।
@kalisenachief@narendramodi
जयपुर आकाशवाणी में ऑटो ड्राइवर मोहसिन एहमद ने प्रमोद अग्रवाल को अपना बैग लौटाया जिसमें 20 लाख का सोना था!
प्रमोद अग्रवाल ऑटो में अपना बैग भूल गए थे ऑटो चालक मोहसिन ने उन्हें ढूंढ कर बैग वापस लौटा दिया!!