क्या हुआ कि उतना सफल नहीं हुए, लगे हुए हैं सफल भी हो जाएंगे।
और कुछ ज्यादा,इस देश समाज को दे भी पाएंगे।
सब सिस्टम का खेल है,चलना जरूरी है सही पथ पर 🚶➡️
पृथ्वी की खांसी की दवा है
साइकिल चलाता मनुष्य
पृथ्वी की चादर की ओज़ोन तह
और पृथ्वी के छोरों पर पिघलते ध्रुव
साइकिल चलाते मनुष्य को कहते हैं-
शुक्रिया... शुक्रिया दोस्त !
- देवेश पथ सारिया । विश्व साइकिल दिवस विशेष
#WorldCycleDay
अंजना ओम कश्यप ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों को दो कौड़ी का बताया।
इस पर शिक्षक अभिनय सर ने कड़ा जवाब देते हुए कहा,
हम हर हफ्ते लाखों बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं और उनका भविष्य बनाने में लगे हैं।
हमें दो कौड़ी का बताने से पहले अपने काम पर भी नजर डालिए।"
पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल करना है, न कि सिर्फ टीवी स्टूडियो में बहस कराना।
अगर बेरोज़गारी, महंगाई और जनता के मुद्दों पर उतनी ही मजबूती से सवाल पूछे जाते,
तो शायद पत्रकारिता पर उठने वाले सवाल भी कम होते
“अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा,
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा…
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा,
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।”
— बशीर बद्र
विनम्र श्रद्धांजलि 🌹
#BashirBadr
मेरी यात्रा:
10वीं : 44.7%
12वीं : 65%
ग्रैजूएशन: 60%
CDS : फेल
CPF: फेल
राज्य लोक सेवा आयोग: 10 से अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा में फेल
UPSC सिविल सेवा परीक्षा :
1. प्रथम प्रयास में साक्षात्कार
2. दूसरे प्रयास में AIR 77
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में बड़ी संख्या में मोर, कस्तूरी बिलाव, उल्लू, भृंगराज समेत कई वन्यजीव मारे गए हैं.
आशंका है कि पास के जल स्रोत में किसी तरह का जहर मिलाया गया होगा.
46-47 डिग्री तापमान में भूख प्यास से तड़पते इन वन्यजीवों ने पानी पीया होगा, जिससे इनकी मौत हो गई होगी.
कब तक AC / कूलर का सहारा लेंगे??
आज हिन्दुस्तान में 150 करोड़ पेड़ की जरूरत है।
अभी तो यह शुरुआत हैं। 45 से 50 डिग्री को 55 से 60 होने में देर नहीं लगेगी। अभी से जागरूक होकर पौधे लगाने होंगे क्योंकि एक पौधे को बड़ा होने मे 5 से 7 साल लगेगा ।
▶️ पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को स्वघोषित 'कॉकरोच (तिलचट्टा) जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे ऑनलाइन 'कॉकरोच' आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
▶️ उन्होंने खुद को 'मानद कॉकरोच' बताते हुए सरकार से अपील की कि वह युवाओं की 'डिजिटल अभिव्यक्ति' को दबाने के बजाय उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर ध्यान दे।
पढ़ें पूरी खबर - https://t.co/HaFsHRGGld
#sonamwangchuk #cockroachjantaparty
लिखेंगे लिखना हमें भी आता है,
ये समाज ये हालत ये कायनात।
पर सबसे पहले किसी ने लिखा तभी तो,
सबने पढ़कर उसे जाना है,
लिखने वालो ने सब कुछ लिखा,
तभी तो बदलाव का बयार हुआ , प्राचीन से लेके अब तक । कोई अपना नाम अपने कहानियों में ना लिख पाया पर , राह बहुतों को दिखाया।
-एस के जी
घर से निकले हैं तो कुछ कर है लेंगे,
यू हौसले थोड़े बने हैं।
मुकद्दर ने लाख रोका पर,
उसे कहा पता बंदे की जिद क्या है।
ये जो रोजगार के लिए लड़ने वाले है ना साहब,
यही तो हर बुराई का विरोध करते हैं।
हर सूरमा इनके बीच से निकलता हैं,
बदलेगा हालात एक दिन इन्हें भी यही भरोसा है 🫡
#OnThisDay
पुर्तगाल के एक प्रसिद्ध नाविक और खोजकर्ता वास्कोडिगामा 20 मई 1498 को भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट (अब कोझिकोड, केरल) पहुंचे थे।
उन्होंने यूरोप से भारत तक का एक नया और सीधा समुद्री मार्ग खोज निकाला था, जिसे 'केप ऑफ गुड होप' मार्ग कहा जाता है।
@MIB_India@airnewsalerts
@micchamasala मेरे साथ भी ऐसी हो रहा था प्राइवेट स्कूल में मैंने भी प्राइवेट स्कूल टीचर का जॉब छोड़ दिया था , कम सैलरी, ज्यादा काम और थोड़ा भी लेट आने पे एक्स्ट्रा काम करवाते थे। वो जॉब छोड़ने के बाद मुझे राहत मिला 🙏
एक युवा महिला teacher ने private school की नौकरी छोड़ते हुए अपना दर्द बताया।
उन्होंने कहा कि एक salary में उनसे कई लोगों का काम करवाया जाता था। उनसे English, Grammar, Computer, Conversation और Dance तक पढ़वाया जाता था।
और बताया कि अगर सुबह तय समय से थोड़ा लेट पहुंचती तो दिन भर की salary काट ली जाती थी और कभी कभी मातृभाषा हिंदी बोल देने पर भी fine लगा दिया जाता था।
Teacher ने कहा कि अब teaching job पहले जैसी सम्मान वाली नौकरी नहीं रह गई। पढ़ाने के अलावा admissions, functions और दूसरे extra काम का भी लगातार दबाव रहता है।
वीडियो में वह गुस्से और दुख के साथ कहती दिखीं कि अब teacher को शिक्षक नहीं बल्कि दिहाड़ी मजदूर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
बात तो सही है वैसे कम salary, ज्यादा काम और लगातार pressure अब कई private schools में आम बात हो चुकी है..!
कौन रोकेगा इस लूट को?
जूनियर क्लास में 1 किताब की कीमत 900 रुपए
सभी किताबों की कीमत 12000
निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए किडनी, गुर्दा, जमीन सबकुछ बेचना पड़ेगा?