साहिल वकोड़े के हाथ में परीक्षा हॉल में फ़ोन।
परीक्षा हॉल में साहिल वाकोडे का पहला CCTV फुटेज। साहिल फ़ोन एग्ज़ामिनर को सौंपते दिखे।
कोई भी दबाव जीवन से बड़ा नहीं, आत्महत्या बेहद दुखद।
लेकिन मौत के बाद जातीय एंगल देना, बेहद शर्मनाक
ये IIT बॉम्बे का CCTV फुटेज है जिसमें साहिल एग्जाम देता दिख रहा है। बाद में प्रोफेसर दुल्ला उसके पास जाते दिखते हैं और फिर कुछ बात होने के बाद वो उन्हें अपने पैरों के बीच रखा मोबाइल फ़ोन सौंपता दिखता है।
फिर वो बाहर भेज दिया जाता है।
@rashtrapatibhvn महामहिम विकसित भारत का सपना कैसे पूरा होगा देश को जातीयता की भट्टी में झोंककर। क्या scst act व ugc से क्रांति आएगी कि प्रतिभाओं के पलायन से सपना पूरा होगा।
जाति और गोत्र पर उनका लिखा पढ़ लीजिएगा। राष्ट्रवाद पर भी। और हाँ, ‘उतरा कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली तू क्या कहती है’ भी अच्छी है।
आप एक गोबर नेता बन चुके हैं जिसे न राष्ट्र से मतलब है, न धर्म से, न समाज से। कॉपी-पेस्ट बकलोली होती रहनी चाहिए बस!
🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के बाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
चुनाव आयोग में भयंकर वाला लफड़ा चल रहा है.
चुनाव आयोग में 3 सदस्य हैं, लेकिन 2 सदस्य - सुखबीर संधू और विवेक जोशी की चल नहीं रही.
इसे लेकर दोनों आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है. खास फैसलों पर न इनसे पूछा जाता है, न बताया जाता है.
इन्हें ढक्कन बना दिया है
"हम जेल में थे, हमारे माँ बाप खत्म हो गए, दो भाई खत्म हो गए, उनके दाहसंस्कार के लिए भी नहीं निकलने दिया! जेल में हमको मारते पीटते थे! आज भी हम ठीक से चल नहीं पाते!"
-विष्णु तिवारी
बता दें कि विष्णु तिवारी को 20 साल तक जेल में फ़र्ज़ी SC/ST एक्ट लगाकर रखा गया!
और इनको 20 साल बाद, बाइज़्ज़त बरी होने के बाद भी आजतक कोई मुआवजा नहीं मिला!
किसी इंसान की जिंदगी खत्म हो गयी, लेकिन सरकार ने एक पैसा नहीं दिया! जबकि करोड़ों rupye SC/ST एक्ट में दिये जाते हैं औऱ फ़र्ज़ी केस साबित होने के बाद भी वसूले नहीं जाते!
धन्यवाद @roypranesh को विष्णु तिवारी की आवाज़ जनता तक पहुंचाने के लिए!
ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है।
इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!
@narendramodi भारत के आईआईटी/ आईआईएम/ एम्स जैसे टॉप के प्रतिष्ठित संस्थान, जो हमारे देश का ब्रेन कहा गया है उसे भी नहीं छोड़ा तुम लोगों ने। प्रतिभाओं का दमन भी शुरू हो गया। आने वाला समय देश के लिए कठिन होगा। शर्म करो
IITs को attack इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यहाँ हमारे best brains, engineers पहुँचते हैं। Engineering देश और दुनिया को चलाती है। सीधी सी चीज़ है, अगर engineering न हो, soft या hard, nothing will work.
जब IITs के ऊपर इस तरह से attack होने लगे, बार-बार होता रहे। उसके बाद क्या होगा कि सारे professors, जो भी जहाँ पे हैं, वो डर जाएंगे, बच्चे डर जाएंगे।
हमने UGC Act का विरोध क्यों किया था? यही कारण था।
campuses में छात्र सिर्फ प्रो. से नहीं सीखता; college campus या hostel, playground, canteen, other activities ऐसी जगहें होती हैं, जहाँ आप स्वयं भी interact करते हैं। और वो interaction can be very informal.
वहाँ पर आपस में बच्चों का, मतलब रंग के कारण, नाम के कारण, पिता के नाम के कारण, tone के कारण, जिस जगह से आया उसके कारण, आपस में हँसी मज़ाक का एक तरीका (बेहद लाइट) होता है।
आप सोचिए कि कोई दूसरी जाति का हो और वो पढ़ रहा हो, समझ में नहीं आ रहा हो उसको, या इधर-उधर वो देख रहा हो और बोल दे, आपकी जाति का नाम लेकर कि साला तुम लोग को इसीलिए नहीं आने देते। इस तरह से उसको बोल दो, तो वो केस file कर देगा।
वो न करे, Flying Squad सुन रहा है, वो कर देगा। Equity Squad चल रहा है। इस कारण हमने UGC का विरोध किया था।
@SushantBSinha भारत के आईआईटी/ आईआईएम/ एम्स जैसे टॉप के प्रतिष्ठित संस्थान, अगले वर्ष तक वर्ल्ड रैंकिंग में धूल चाटने लगेंगे। ये गंदी राजनीति देश को ले डूबेगी।
@BJP4India@narendramodi भारत के आईआईटी/ आईआईएम/ एम्स जैसे टॉप के प्रतिष्ठित संस्थान, अगले वर्ष तक वर्ल्ड रैंकिंग में धूल चाटने लगेंगे।
जब तक सत्यानाश न हो जाए, तब तक चैन से मत बैठना।#roolbackugc
@narendramodi भारत के आईआईटी/ आईआईएम/ एम्स जैसे टॉप के प्रतिष्ठित संस्थान, अगले वर्ष तक वर्ल्ड रैंकिंग में धूल चाटने लगेंगे।
जब तक सत्यानाश न हो जाए, तब तक चैन से मत बैठना।
नया कीवर्ड राजनैतिक बाजार में आया है: ओबीसी एट्रोसिटी एक्ट आ जाएगा। सपा-कॉन्ग्रेस कह रही है कि ले आएँगे सत्ता में आते ही, भाजपा कह रही है कि ये लोग ले ही आएँगे इसीलिए कमल को वोट दो। चटुआ सेल भी कह रहा है कि हाँ ब्रो, अब क्या करोगे GC वालों!
सत्य यह है कि तीनों ही पार्टियाँ ओबीसी को ही लुभाने के लिए कार्य कर रही है। जो काम कॉन्ग्रेस-सपा भविष्य में करने को बोल रही है, वह भाजपा ने 14/01/26 को यूजीसी के माध्यम से कर दिया है।
कुछ दिन पहले जाट-गुर्जर के नाम पर कह रहे थे कि वो लोग जंतर मंतर पर आ जाएँगे तो तुम लोग कहाँ जाओगे GC वालों। इन लोगों मे जाट-गुर्जरों को गुंडा मान लिया है, जबकि सत्य यह है कि ये लोग खेल, शिक्षा, कृषि जैसे हर क्षेत्र में उतने ही अच्छे हैं जितने अन्य जातियों के लोग। अतः इनके नाम पर डराना बंद करो।
सवर्णों को डरा कर ओबीसी-एससी की राजनीति अब नहीं चलेगी। उसका पटाक्षेप हो चुका है। सब ज्ञानी हैं, खाली तुम्हीं समझदार नहीं हो।
किसी भी बच्चे की मौत से ज्यादा दुखद क्या हो सकता है लेकिन बच्चा जाकर सुसाइड ना कर ले इसकी आशंका या डर के चक्कर में प्रोफेसर को चीटिंग करते बच्चे को रोकना नहीं चाहिए?
क्या और कैसा सिस्टम बनाना चाह रहे हैं हम?
प्रोफेसर दुल्ला को कई बार उनकी टीचिंग के लिए ही अवॉर्ड मिल चुका है.. इसलिए बिना जांच पूरी हुए ये मान लेना कि अचानक रातों रात वो जातिवादी हो गए होंगे और जातिसूचक गालियां देने लगे होंगे, यकीन से परे लगता है..
SC/ST एक्ट का इस्तेमाल जिस तरह से हो रहा है वो इस देश के लिए महाघातक साबित होता जा रहा है। ऐसे डर के माहौल में टीचर/प्रोफेसर क्या ही पढ़ाएंगें बच्चों को..
IITs में बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं इसको जरुर देखिए लेकिन उसके साथ ये भी देखिए कि SC/ST एक्ट पर चर्चा क्यों ना हो?