संभल के 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ।
लोग थाने पहुंचे और पुलिस ऑफिसर से कहा :- कोई मुस्लिम मुजरिम होता तो आप उसका जुलूस निकलते मारते पीटते बुलडोजर चलवाते इन दरिंदों पर क्यों आपकी पुलिस एक्शन नहीं ले रही।
टीएमसी छोड़ने के बाद अपने लोकसभा क्षेत्र में पहुंची सयानी घोष का लोगों ने किया जमकर विरोध....लोगों ने बेईमान-बेईमान के लगाए नारे.....विरोध और नाराजगी के चलते सयानी घोष को गाड़ी में बैठकर भागना पड़ा.....दल बदलु नेताओं को जनता द्वारा ऐसे ही जवाब देना चाहिए.....
मंदिरों में आने वाला चढ़ावा यदि पारदर्शी और जनहितकारी तरीके से शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च हो, तो उससे उत्कृष्ट स्कूल, कॉलेज और आधुनिक अस्पताल बन सकते है!
"मैं पेशे से वकील हूँ और ऐसी रणनीतियों को अच्छी तरह समझता हूँ। वे इस आंदोलन को एक-एक व्यक्ति को हटाकर खत्म करना चाहते हैं।"
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे एक युवा प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी।
डॉक्टरों की सलाह के बाद दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी उन्हें इलाज के लिए मनाने पहुँचा।
हालाँकि, प्रदर्शनकारी ने साफ़ इनकार कर दिया और कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेगा।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि भूख हड़ताल जारी रहती है, तो उसकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो सकती है।
बिहारी होने के नाते मुझे शर्म है इस बात का कि सम्राट चौधरी जैसा अनपढ़, बदमाश आदमी इस राज्य का मुख्यमंत्री है और उसका पूरा दोष मोदी जी को हैं...
— प्रशांत किशोर 🔥
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के ख़िलाफ़ आक्रोश का लेवल देखिए।
अयोध्या के वकीलों का हुजूम निकल पड़ा है FIR दर्ज कराने के लिए,
कोई भी दोषी बचने नहीं पाएगा।
यह डॉ अनिल कुमार मीणा जी है,जालौर राजस्थान में कार्यरत है।
पहले उनके साथ अस्पताल में मारपीट ओर जातिगत उत्पीड़न होता है।
SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कराने के बाद सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह राजपूत द्वारा FIR वापस लेने फिर से जातिगत उत्पीड़न करके उनके सरकारी आवास में जान से मारने हेतु धमकाया जाता है।
अब FIR के कुछ बिंदु पढ़िए।
रात्रि लगभग 11 बजे एक मरीज सग्रामाराम (आयु लगभग 80 वर्ष) को उसके परिजन गंभीर अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दासपा लेकर आए थे।
मैंने तुरंत मरीज को अटेंड किया और उपलब्ध आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा व इनिशियल ट्रीटमेंट (इनिशियल ट्रीटमेंट) प्रदान किया।
मरीज की नाजुक एवं चिंताजनक स्थिति को देखते हुए मैंने परिजनों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि मरीज सीरियस है अतः इसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र (हाई सेंटर) के लिए रेफर करना आवश्यक है। तदनुसार मैंने तुरंत मरीज का रेफरल कार्ड तैयार कर दिया तथा चिकित्सालय स्तर से त्वरित कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस (एम्बुलेंस) की व्यवस्था भी करवा दी। एम्बुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज के परिजनों ने मरीज को तुरंत ले जाने से मना कर दिया और आनाकानी करने लगे परिजनों का कथित तौर पर कहना था कि हमारे घर पर काम है, हम सुबह लेकर जाएंगे अथवा हम इसे हमारे पर्सनल व्हीकल (निजी वाहन) से ही लेकर जाएंगे और वे एम्बुलेंस ले जाने से साफ मुकर गए। मरीज को विधिवत रेफर करने और एम्बुलेंस सुपुर्द करने के बाद, मैं रात्रि भोजन के लिए अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने सरकारी क्वार्टर पर चला गया। फिर परिजनों की घोर लापरवाही और समय पर उच्च केंद्र न ले जाने के कारण लगभग 40 मिनट के बाद मरीज सग्रामाराम की अस्पताल परिसर में ही मृत्यु हो गई। मरीज की मृत्यु होते ही परिजनों ने अचानक उग्र व हिंसक रूप धारण कर लिया और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर श्री रामलाल जी के साथ गाली-गलौज व मारपीट करते हुए, उन्हें जबरन पकड़कर मेरे सरकारी क्वार्टर की तरफ लेकर आए तथा बाहर चिल्लाने लगे कि डॉक्टर साहब को बाहर निकालो।
जैसे ही में चिल्लाने की आवाज सुनकर अपने क्वार्टर के पीछे के हिस्से से बाहर अस्पताल परिसर की तरफ आया, वहां खड़े परिजनों में शामिल 5 पुरुषों (मेल) ने मुझे देखते ही तुरंत मेरे साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी और चिल्लाने लगे कि आपने हमारे बाप को मार दिया है और अब हम आपको मारेंगे। वे पांचों पुरुष मुझे रास्ते में लगातार बर्बरतापूर्वक थप्पड़ मारते और पीटते हुए जबरन खींचकर अस्पताल के वार्ड (वार्ड) के अंदर लेकर चले गए और फिर आगे का पूरा हिंसक प्रकरण व मारपीट अस्पताल वार्ड के अंदर की गई, जहाँ उनके साथ उपस्थित एक महिला (फीमेल) भी इस पूरे कृत्य में उनकी मदद कर रही थी तथा पुरुषों में से एक ने मेरे सिर पर किसी अज्ञात ठोस वस्तु (ऑब्जेक्ट) से जोरदार वार किया जिससे मुझे गंभीर चोट आई। हमलावरों ने हमें धमकाते हुए सख्त हिदायत दी कि अपने-अपने मोबाइल फोन जेब में ही रखो, कोई भी अपने फोन को टच (स्पर्श) नहीं करेगा और उन्होंने हमें किसी को भी फोन लगाने या सूचना देने से पूरी तरह रोक दिया। इसके बाद उन्होंने हमें जान से मारने की प्रत्यक्ष धमकियां देते हुए कहा कि तुम्हें जान से मार देंगे, तुम्हारा गला काट देंगे, तुम्हारी गर्दन और पूरा शरीर अलग करके कुएं में डाल देंगे, यह दासपा है और यहां किसी को पता भी नहीं चलेगा। इस घोर मानसिक व शारीरिक खौफ के साए में उन्होंने मुझसे जबरन दबाव बनाकर एक नोट (पत्र) लिखवाया कि मैंने गलत इंजेक्शन लगाकर मरीज को मार दिया है और इसका मुआवजा कौन देगा अपनी तथा नर्सिंग स्टाफ की जान बचाने के लिए मुझे मजबूरन उस झूठे पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े और उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर रामलाल जी से भी उस पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। 7. यह कि इसके बाद आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक (होस्टेज) बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया।
आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया। इसी दौरान उन्होंने जातिगत द्वेषता व दुर्भावना प्रदर्शित करते हुए मेरी जाति के बारे में पूछा और मेरे द्वारा स्वयं को मीणा बताने पर अत्यंत अपमानजनक व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि मीणा, चमार तुमको कोई नॉलेज नहीं है तुम यहाँ के नहीं हो और यहाँ के बारे में कुछ नहीं जानते, तुम्हारी पगार कितनी है, सरकार तुम्हें कितनी पगार देती है, तुम्हारे पास डॉक्टर की डिग्री है भी या नहीं है।
घटना के 8 दिन बाद भी @JalorePolice ने अभी तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है।
@BhajanlalBjp@RajPoliceHelp@RajCMO
अगर नौकरी जाने का डर होता तो मै वर्दी पहनकर नहीं आता , यूपी का DGP मुझे न्याय नहीं दिलवा पा रहा।
और मैं 9 जुलाई 2024 का बलात्कारी हूँ साला मुझे जेल भी नहीं भिजवा पा रहा है - यूपी पुलिस का जवान
इनके अपमानजनक शब्दों को सुनकर तो लगता है कि यूपी पुलिस इनका अच्छा इलाज करेगी।