ऊर्जा मंत्री जी जवाब दीजिए
1- क्या निजीकरण से बिजली दरों में व्यापक बढ़ोतरी नहीं होगी ?
2- सरकारी संपत्ति कम दामों में नहीं बिकेगी ?
3- सरकारी क्षेत्र में रोजगार का सपना देख रहे युवा निराश नहीं होंगे ?
4- क्या आरक्षण के 16000 पद समाप्त नहीं होंगे?@aksharmaBharat@myogiadityanath
बिजली विभाग का निजीकरण = आम जनता की जेब पर हमला। उत्तर प्रदेश में बिजली निजी हाथों में गई तो क्या होगा? यह वीडियो देखकर सच जानिए...
बिजली निजीकरण से जुड़े बड़े खतरे हर बिजली उपभोक्ता को जानना जरूरी है।
ज़्यादा से ज़्यादा शेयर और रिपोस्ट करें ताकि हर कोई जागरूक हो सके।
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मां मुख्यमंत्री जी @myogiadityanath बिजली विभाग में भी स्थानांतरण नीति के विरुद्ध स्थानांतरण किये गए हैं। बुलंदशहर के प्रभारी मुख्य अभियंता द्वारा भी स्थानांतरण नीति के नियम 3साल उपकेंद्र,5साल खंड,8 साल मंडल के नियमों को दरकिनार कर अपनी मर्ज़ी से लाभ हेतु किये गए हैं।
आज डॉ. भीमराव अंबेडकर ऑडिटोरियम, आशियाना, लखनऊ में आयोजित बिजली महापंचायत में प्रदेश भर से हजारों की संख्या में बिजली कर्मचारी एकत्र हुए और बिजली के निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। यह महापंचायत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब लड़ाई केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह एक निर्णायक महायुद्ध का आरंभ है।
बिजली कर्मचारी यह साफ कर चुके हैं कि...
👉 निजीकरण किसी भी कीमत पर मंज़ूर नहीं।
👉 जनता की बिजली जनता के हाथ में रहनी चाहिए, पूंजीपतियों के हाथ में नहीं।
इस ऐतिहासिक उपस्थिति और संकल्प के लिए
हम हर एक साथी कर्मचारी, अधिकारी, यूनियन प्रतिनिधि और समर्थक का तहे दिल से आभार और धन्यवाद प्रकट करते हैं।
आपकी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया है कि
अब संघर्ष रुकने वाला नहीं है,
अब आवाज दबने वाली नहीं है।
इंकलाब ज़िंदाबाद। जय संविधान।
निजीकरण मुर्दाबाद।✊
विद्युत तकनीकी कर्मचारी एकता संघ उत्तर प्रदेश।
बिजली निजीकरण के मुद्दे पर @uprvup से एक्सक्लूसिव बात हुई।
सुप्रीम कोर्ट का वो आदेश जो बिजली निजीकरण के गले की फांस बन सकता है, अवधेश जी ने 4PM
पर बड़ा खुलासा किया।
देखें पूरी रिपोर्ट।
उपभोक्ता परिषद में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की वर्तमान लागू दरों व प्रस्तावित व्यवस्था पर लागू दरों का तुलनात्मकअध्ययन पेश करते हुए कियाखुलासा प्रदेश में रु10 प्रति यूनिट से लेकर रु12 तक उपभोक्ता को भुगतना पडेगा इलेक्ट्रिसिटीड्यूटी जोड लिया जाए तो रु 13प्रति यूनिट करना होगा भुगतान।
निजीकरण में यह भी तय हो जाए कि दोनो डिस्कॉम से संबंधित MD/और CMD को भी दो विकल्प दिए जाए
1. उसी स्थान पर प्राइवेट कंपनी को ज्वाइन कर ले
2. आकर्षक VRS ले ले
@myogioffice@UPPCLLKO
उपभोक्ता परिषद ने कहा बिजली कंपनियों के खस्ता हाल के लिए उत्तर प्रदेश सरकार व पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की नीतिगत फैसले 60% जिम्मेदार और 40% बिजली कार्मिकों की गलती ऐसे में दोनों पहलुओं पर उपभोक्ता परिषद सबूत और नीतियों के आधार पर सरकार से करना चाहता है चर्चा।
अदानी पावर के साथ बिडिंग रूट के 1500 मेगावाट बिजली रुपया 5-38 प्रति यूनिट में खरीदने का जो कैबिनेट ने प्रस्ताव किया पास वह उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए घाटे का सौदा इस परियोजना में फिक्स कास्ट रुपया 3.72प्रति यूनिट 25 सालों तक बराबर ही रहेगी घटना का सवाल ही नही।