#IndiaPolitics | Both citizens and the youth of this country are voting and choosing a path that they believe will take India towards Viksit Bharat: @CharuPragya, BJP
Rigging and winning can go hand-in-hand: @KunalBiharijnu, General Secretary, NSUI
#DU#Elections #SuperSaturdayDebate | @GrihaAtul
योगी जी कहते हैं हमारी सरकार में बेटियां सुरक्षित हैं लेकिन मुझे लगता है बेटियां घर में भी सुरक्षित नहीं है
घर में बैठी हुई बेटी का भी योगी जी की सरकार में मानसिक उत्पीड़न हो रहा है
नाम -रोहित राजपूत
इंस्टाग्राम आईडी - rohit_rajpoot_ji_
पुलिस प्रशासन अगर इंस्टाग्राम आईडी का लिंक मांगेगा तो वह भी मैं दे दूंगा
यह रोहित राजपूत नाम का व्यक्ति निशु आजाद और उनके पिताजी संजय आजाद के साथ AI द्वारा फोटो जनरेट करके वायरल कर रहा है, फोटो पर लाल कलर का स्टीकर मैंने लगाया है वह व्यक्ति खुलेआम वायरल कर रहा है।
पुलिस प्रशासन कृपया कार्रवाई करें जनता की कार्रवाई से पहले अगर पुलिस प्रशासन कार्रवाई कर देगा तो अच्छा रहेगा, कानून व्यवस्था भी ठीक रहेगी।
@Uppolice@dgpup@myogiadityanath
किसी भी पुलिसवाले की इतनी हिम्मत अपने आप नहीं आती कि देश की राजधानी में दो महिला पत्रकारों को थाने के भीतर ले जाकर बुरी तरह पीटे और अपमानित करे।
हिम्मत ऊपर से आती है। उसे मालूम होता है कि उसकी वर्दी से सवाल होगा या सवाल पूछने वाली महिला से।
और यही बात सबसे ज्यादा डराती है।
जब कैमरा, पहचान और अपनी आवाज़ रखने वाली दो निडर महिलाओं के साथ दिल्ली में यह हो सकता है, तो किसी छोटे शहर की उस लड़की के बारे में सोचिए जिसके पास इनमें से कुछ भी नहीं है।
RSS-BJP महिलाओं को देवी कहने में कभी पीछे नहीं रहती।
बस शर्त ये है कि देवी सवाल न पूछे।
सवाल पूछेगी, तो इनके राज में देवत्व खत्म और पुलिस शुरू। यही आज के भारत की दर्दनाक हकीकत है 💔
BJP का गुंडा कैमरे पर खुद कह रहा है: “कड़े से मारा, सिर फाड़ दिया, खून निकाल दिया।” - “अगली बार कट्टा इस्तेमाल करूंगा।”
चेहरे पर डर नहीं, गुरूर है। पीछे BJP-RSS के संरक्षण का भरोसा है।
और दिल्ली पुलिस?
इसे जेल में डालने की जगह X पर सफाई दे रही है, “हथियार नहीं, कड़ा था।”
कमाल की पुलिसिंग है:
गुंडे के हाथ में कड़ा दिखता है, अपराध नहीं।
महिला पत्रकार के हाथ में माइक दिखता है, सवाल अपराध बन जाता है।
यही अमित शाह-मोदी की दिल्ली पुलिस है।
What a shame for the Delhi Police - and for Amit Shah.
A Hindutva extremist Swatantra Bharadwaj is openly boasting that he broke open the head of a young protester’s father, who needed 60 stitches.
He further claims that Kapil Mishra’s intervention shielded him from police action, and asserts that not only Kapil Mishra but even Chirag Paswan is like an elder brother to him.
If someone can assault a citizen, openly boast about it, and flaunt political connections as protection from the law, what does that say about Delhi’s policing?
What does it say about the safety of ordinary citizens across Delhi-NCR?
This lawlessness is unfolding right under Amit Shah’s nose. That's why he is unworthy of the chair he occupies.
💔 60 टांके लगे मौत के मुंह से लौटे एक पिता।
और उनका हमलावर भाजपा के साए में बेख़ौफ़ घूमता रहा?
आरोप है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान उन पर हमला किया गया। मामला गंभीर था, लेकिन आरोपी के बेख़ौफ़ घूमने और राजनीतिक संरक्षण ने कई सवाल खड़े कर दिए।
भाजपा राज में आम आदमी के लिए कानून अलग है क्या?
अमित शाह के कानून व्यवस्था पर तिरछी धार से मूत्र विसर्जन करता हुआ गुंडा स्वतंत्रत सिंह 😡😡
पत्रकार— CJP प्रोटेस्ट मे आपके हाथ मे जो डंडा था वो कहां से लेकर आए थे
स्वतंत्रत — (अपना जूता दिखाते हुए)
ये जो जूता आप देख रही हैं, ये दिल्ली पुलिस का जूता है 😳
नेहा— क्या बात कर रहे 😳
स्वतंत्र— हां, हम बिना फार्म भरे दिल्ली पुलिस बनकर चलते है, हमारे पास सब है दिल्ली पुलिस का 😳
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के हाथ में हैं, गृह मंत्रालय अमित शाह जी के हाथ में है और अमित शाह जी आरएसएस के हाथ में है!
लैंग्वेज भाई साहब लैंग्वेज, मै आपका जवाब देने के लिये बाध्य नहीं हूं फिर भी एक सवाल आप से कर लेती हूं , औवैसी साहब भी स्कूल, कॉलेज, बैंक सब चलाते है उनके यहां ED क्यों नहीं आती ?? आज़म खान को ही क्यों प्रताड़ित कर रही है ?
सच बोलने और रखने के लिये पार्टी प्रवक्ता होने को जरूरत नहीं होती , उसके लिये सिर्फ तथ्य चाहिए होते है । और मैं ने इतना कहा के सवाल हो तो दोनों से हो तो क्या गलत कहा क्या ओवैसी साहब पर वाजिब नहीं गम का इज़हार करना ? अगर इमरान प्रतापगढ़ी गलत तो ओवैसी साहब कैसे बच सकते है इस आरोप से। लेकिन कुछ लोगों को किसी की मौत के गम से ज्यादा
उसका सियासी फायदा उठाना है ।
राहुल गांधी ने छात्रों को दी जीत की बधाई, बोले— 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा बड़ी जीत, अब PM माफ़ी मांगें'
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत! @RahulGandhi
#RahulGandhi #DharmendraPrdhan
#CjpProtest #JantarMantar #Paperleak
कनॉट प्लेस की रीगल बिल्डिंग से युवा हनुमान रोड की ओर भाग रहे थे। कई घायल थे और अनेक युवाओं को लाठियां लगी थीं।
मैंने करीब 50 प्रदर्शनकारियों से बात की। सभी ने कहा कि वे अपनी इच्छा से आज के मार्च में शामिल होने आए थे। उनका कहना था कि जब से पेपर लीक होने लगे हैं, तब से उनके भविष्य की कोई उम्मीद नहीं रह गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिविल ड्रेस में मौजूद BJP और RSS के लोगों ने उन पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं।
बहुत दिनों बाद जनता स्वतः सड़कों पर उतरी। इससे लोकतंत्र के बचने की उम्मीद जगी। जिन लोगों ने इस आंदोलन की शुरुआत की, उन्हें लोग जानते हैं और उनके प्रयासों के लिए उनका धन्यवाद किया जाना चाहिए।
दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज एवं आदिवासी (DOMA) परिसंघ की ओर से मैंने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे श्री सोनम वांगचुक जी से मुलाकात कर देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के संघर्ष के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया।
श्री वांगचुक द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। पेपर लीक की घटनाओं ने विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लाखों छात्रों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
भाजपा और आरएसएस सुनियोजित तरीके से सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। अनेक शैक्षणिक संस्थानों में आरएसएस से जुड़े लोगों की नियुक्तियाँ की जा रही हैं, जिससे न केवल आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव कमजोर हुआ है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है।
मैं श्री सोनम वांगचुक जी और उनके सभी साथियों से आग्रह करता हूँ कि वे अपना अनशन समाप्त करें और श्री राहुल गांधी के साथ मिलकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएँ, जो राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं।
इतनी असंवेदनशीलता और क्रूरता का परिचय तो ब्रिटिश शासन ने भी नहीं दिया था।
@ANI@PTI_News@ians_india
#sonamwangchuk