#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में भी प्रमाण है की जो पितरों की पूजा करता है वो पितरों को प्राप्त होता है जो भूत पूजते हैं वो भूत बनते हैं।🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि जीवित पिता को तो समय पर टूक (रोटी) भी नहीं दिया जाता मृत्यु के पश्चात् उसको पवित्र दरिया में बहाकर आता है कितना खर्च करता है अपने माता-पिता की जीवित रहते प्यार से सेवा करो उनकी आत्मा को प्रसन्न करो उनकी वास्तविक श्रद्धा सेवा☀️
#श्राद्ध_करना_गलतहै चाहे यमलोक में या प्रेत बने हैं, सर्व कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अब जो उनकी पूजा करेगा वह भी इसी कष्टमयी योनि को प्राप्त होगा। इसलिए सर्व मानव समाज को शास्त्रविधि अनुसार साधना करनी चाहिए। जिससे उन पितरों की पितर योनि छूट जाएगी तथा साधक भी पूर्ण मोक्ष 💮
#श्राद्ध_करना_गलतहै
���शास्त्रविधि त्यागकर मनमाना आचरण अथार्त् मनमानी पूजा (देवों की, पितरों की, भूतों की पूजा) करके प्राणी पितर व भूत (प्रेत) बने। वे देवलोक (जो देवताओं की पूजा करके देवलोक में चले गए वे अपने पुण्य��ं के समाप्त होने पर पितर रूप में रहते हैं।) में हैं ।🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉मार्कण्डेय पुराण के प्रकरण से सिद्ध है कि वेदों में तथा वेदों के ही सं���्षिप्त रुप गीता में श्राद्ध-पिण्डोदक आदि भूत पूजा के कमर्काण्ड को निषेध बताया है, नहीं करना चाहिए।💐
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉प्रेत (भूत) पूजा तथा पितर पूजा उस परमेश्वर की पूजा नहीं है। इसलिए
गीता शास्त्र के अनुसार व्यर्थ है।
वेदों में भूत-पूजा व पितर पूजा यानि श्राद्ध आदि कमर्काण्ड को मूर्खों का कार्य बताया है।💮
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में भी प्रमाण है की जो पितरों की पूजा करता है वो पितरों को प्राप्त होता है जो भूत पूजते हैं वो भूत बनते हैं।🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै
कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि जीवित पिता को तो समय पर टूक (रोटी) भी नहीं दिया जाता मृत्यु के पश्चात् उसको पवित्र दरिया में बहाकर आता है कितना खर्च करता है अपने माता-पिता की जीवित रहते प्यार से सेवा करो उनकी आत्मा को प्रसन्न करो उनकी वास्तविक श्रद्धा सेव💐
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉मृत्यु के पश्चात् की गई सर्व क्रियाऐं गति (मोक्ष) कराने के उद्देश्य से की गई थी। उन ज्ञानहीन गुरूओं ने अन्त में कौवा बनवाकर छोड़ा। वह प्रेत शिला पर प्रेत योनि भोग रहा है। पीछे से गुरू और कौवा मौज से भोजन कर रहा है।💮
#श्राद्ध_करना_गलतहै
श्राद्ध करने वाले पुरोहित कहते हैं कि श्राद्ध करने से वह जीव एक वर्ष तक तृप्त हो जाता है फिर एक वर्ष में श्राद्ध फिर करना है। विचार करें:-जीवित व्यक्ति दिन में तीन बार भोजन करता था अब एक दिन भोजन करने से एक वर्ष तक कैसे तृप्त हो सकता है? यदि प्रतिदिन छत पर🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया।
जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां।
जीवित बाप के साथ तो लड़ाई रखते हैं और उनके मरने के उपरांत उनके श्राद्ध निकालते हैं।
परमात्मा कहते हैं रे भोली सी दुनिया सतगुरु बिन कैसे सरिया।🧬
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से उपदेश लेकर कबीर साहेब जी की भक्ति करने से सतलोक की प्राप्ति होती है।
सतलोक अविनाशी लोक है। वहां जाने के बाद साधक जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करता है।📙
#श्राद्ध_करना_गलतहै
जै सतगुरू की संगत करते, सकल कर्म कटि जाईं।
अमर पुरि पर आसन होते, जहाँ धूप न छाँइ।।
सन्त गरीब दास ने परमेश्वर कबीर जी से प्राप्त सूक्ष्मवेद में आगे कहा है कि यदि सतगुरू (तत्वदर्शी सन्त) की शरण में जाकर दीक्षा लेते तो सर्व कर्मों के कष्ट कट जाते अर्थात् न 🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै
गीता वेद शास्त्रों में प्रमाण है कि तीन गुण अर्थात् रजोगुण ब्रह्मा जी, सतोगुण विष्णु जी, तमोगुण शिवजी तथा देवी-देवताओं और माता की पूजा करने वाले केवल अपने किए कर्म का प्रतिफल पाएंगे लेकिन मोक्ष प्राप्ति नहीं कर सकते। पूर्ण मोक्ष अर्थात् जन्म-मरण से छुटकारा🧬
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉भक्ति नहीं करने वाले व शास्त्रविरुद्ध भक्ति करने वाले, नकली गुरु बनाने वाले एवं पाप अपराध करने वालों को मृत्यु पश्चात् यमदूत घसीटकर ले जाते हैं और नरक में भयंकर यातनाएं देते हैं। तत्पश्चात् 84 लाख कष्टदायक योनियों मे��� जन्म मिलता है।🌹
#श्राद्ध_करना_गलतहै कहा है कि तत्वदर्शी सन्त से तत्वज्ञान प्राप्त करके, उस तत्वज्ञान से अज्ञान का नाश करके, उसके पश्चात् परमेश्वर के उस परमपद की खोज करनी चाहिए। जहाँ जाने के पश्चात् साधक फिर लौटकर संसार में कभी नहीं आता।🍂
#श्राद्ध_करना_गलतहै
👉सत्य भक्ति वर्तमान में केवल संत रामपाल जी महाराज जी के पास है। जिससे इस दुःखों के घर संसार से पार होकर वह परम शान्ति तथा शाश्वत स्थान (सनातन परम धाम) प्राप्त हो जाता है जिसके विषय में गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है तथा गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में 🧬