#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद#GodNightSunday
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 142 पर लिखा है कि
पृष्ठ संख्या 142
जब श्रद्धालु ने शिव पर जल चढ़ाने हेतु लोटा माँगा,
तो दयनिद जी द्वारा कहा गया
"अपने मुख में कुल्ला भर ले जाओ और उसके ऊपर डाल दो !"
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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दयानंद सरस्वती खुद नशेड़ी और उपदेशक भी!
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 2, “ पृष्ठ 31 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि प्रसूता स्त्री बालक को केवल 6 दिन दूध पिलाए, फिर स्तनों पर औषधि का लेप लगाकर दूध सुखा दे ताकि दो महीने में पुनः युवती हो सके। 🙏🌹🌹🙏
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 291 पर
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को ‘प्रेतनाथ’ और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उड़ाया गया है।🙏🌹🌹🙏
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 2, पृष्ठ 31 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि प्रसूता स्त्री बालक को केवल 6 दिन दूध पिलाए, फिर स्तनों पर औषधि का लेप लगाकर दूध सुखा दे ताकि दो महीने में पुनः युवती हो सके। साथ
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सत्यार्थ प्रकाश,
समुल्लास 4, पृष्ठ 70 पर दयानंद सरस्वती ने
भूरे नेत्रों वाली, गंगा, यमुना आदि नदियों या पार्वती आदि पर्वतों के नाम वाली कन्या से विवाह वर्जित बताया और 24 वर्ष की युवती के लिए 48 वर्ष के प्रौढ़ पुरुष का विवाह उत्तम तय किया!
दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’
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प्रश्न-कबीर, तुस्बा, शेख लोग कहते हैं कि मूर्ति पूजने से मुक्ति नहीं होती है, न किसी को स्वर्ग मिलता है, मरे के बाद नरक मिलता है, वेद धर्म नहीं है, वेदों के विरुद्ध भक्ति करनी चाहिए कि उससे बन्दगी का फल मिलता है।
सत्यार्थ प्रकाश,
समुल्लास 4, पृष्ठ 70 पर दयानंद सरस्वती ने
भूरे नेत्रों वाली, गंगा, यमुना आदि नदियों या पार्वती आदि पर्वतों के नाम वाली कन्या से विवाह वर्जित बताया और 24 वर्ष की युवती के लिए 48 वर्ष के प्रौढ़ पुरुष का विवाह उत्तम तय किया!#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद#AryaSamaj
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सत्यार्थ प्रकाश,
समुल्लास 4 पृष्ठ 70 पर दयानंद सरस्वती ने
भूरे नेत्रों वाली, गंगा, यमुना आदि नदियों,पार्वती आदि पर्वतों के नाम वाली कन्या से विवाह वर्जित और 24 वर्ष की युवती केलिए 48 वर्ष के प्रौढ़ पुरुष का विवाह उत्तम बताया गया है !
सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 4 पेज 99 में 11 पुरुषों तक स्त्री को और 11 स्त्रियों तक पुरुष को पशु तुल्य कर्म नियोग करने को कहा कहा है।तो मासूम शर्मा बता आर्य समाज और दयानंद सरस्वती की इस करतूत पर तेरी जुबान बंद क्यो है।
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महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है-
'तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!'
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दयानंद सरस्वती आत्मकथा, पेज 17; महर्षि दयानंद समग्र क्रांति के अग्रदूत, पेज 21 एवं महर्षि दयानंद जी का जीवन चरित्र, पेज 50 में उल्लेख है कि दयानंद जी चावल त्यागकर इतना अधिक भांग पी लिया करते थे कि बेसुध हो जाते थे।👇👇
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