1. माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा आज उनसे भेंट करन��� गए बीजेपी के SC/ST सांसदों को यह आश्वासन देना कि SC/ST वर्ग में क्रीमी लेयर को लागू नहीं करने तथा एससी-एसटी के आरक्षण में कोई उप-वर्गीकरण भी नहीं करने की उनकी माँगों पर ग़ौर किया जाएगा, यह उचित व ऐसा किए जाने पर इसका स्वागत।
2. किन्तु अच्छा होता कि माननीय सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष बहस में केन्द्र सरकार की तरफ से एटार्नी जनरल द्वा���ा आरक्षण को लेकर एससी व एसटी में क्रीमी लेयर लागू करना तथा इनका ��प-वर्गीकरण किये जाने के पक्ष में दलील नहीं रखी गयी होती, तो शायद यह निर्णय नहीं आता।
3.सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के निर्णय को संविधान संशोधन के जरिए जब तक निष्प्रभावी नहीं किया जाता तब तक राज्य सरकारें अपनी राजनीति के तहत वहाँ इस निर्णय का इस्तेमाल करके SC/ST वर्ग का उप-वर्गीकरण व क्रीमी लेयर को लागू कर सकती हैं। अतः संविधान संशोधन बिल इसी सत्र में लाया जाए।
1. बीएसपी देश में लोकसभा का आमचुनाव अकेले अपने बलबूते पर पूरी तैयारी व दमदारी के साथ लड़ रही है। ऐसे में चुनावी गठबंधन या तीसरा मोर्चा आदि बनाने की अफवाह फैलाना यह घोर फेक व गलत न्यूज़। मीडिया ऐसी शरारतपूर्ण खबरें देकर अपनी विश्वसनीयता न खोए। लोग भी सावधान रहें।
2. ख़ासकर यूपी में बीएसपी की काफी मज़बूती के साथ अकेले चुनाव लड़ने के कारण विरोधी लोग काफी बैचेन लगते हैं। इसीलिए ये आए दिन किस्म-किस्म की अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते रहते हैं। किन्तु बहुजन समाज के हित में बीएसपी का अकेले च���नाव लड़ने का फैसला अटल।
1. बीएसपी राजनीतिक दल के साथ ही परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के मिशन को समर्पित मूवमेन्ट भी है जिस कारण इस पार्टी की नीति व कार्यशैली देश की पूंजीवादी पार्टियों से अलग है जिसे ध्यान में रखकर ही चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार भी उतारती है।
2. अब बीएसपी के सांसदों को इस कसौटी पर खरा उतरने के साथ ही स्वंय जाँचना है कि क्या उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता का सही ध्यान रखा? क्या अपने क्षेत्र में पूरा समय दिया? साथ ही, क्या उन्होंने पार्टी व मूवमेन्ट के हित में समय-समय पर दिये गये दिशा-निर्देशों का सही से पालन किया है?
3. ऐसे में अधिकतर लोकसभा सांसदों का टिकट दिया जाना क्या संभव, खासकर तब जब वे स्वंय अपने स्वार्थ मे��� इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं व निगेटिव चर्चा में हैं। मीडिया द्वारा यह सब कुछ जानने के बावजूद इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में प्रचारित करना अनुचित। बीएसपी का पार्टी हित सर्वोपरि।
1. ’’मन चंगा तो कठौती में गंगा’’ का लोगों को अमर संदेश देने वाले महान संतगुरु रविदास जी को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा देश-दुनिया में रहने वाले उनके सभी अनुयाइयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें तथा उनके उपदेशों को अपनाकर जीवन संवारने का आह्वान।
2. उनका संदेश अपने कर्म से धर्म को, संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ आदि के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत व जनसेवा के लिए समर्पन का है, जिसे भुला दिये जाने के कारण बहुजनों का जीवन यहाँ अनेकों समस्याओं से त्रस्त। राजनीतिक स्वार्थ हेतु उनको माथा टेकने वालों से सावधानी जरूरी।
1. अपने भारत को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने वाले मेहनतकश किसानों की जो माँगें हैं सरकार उन्हें गंभ���रता से ले तथा उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके उनका समय से समुचित समाधान करे, ताकि अन्नदाता किसानों को अपनी माँगों के समर्थन में बार-बार आन्दोलन के लिए मजबूर न होना पड़े।
2. इस सम्बंध में ’दिल्ली चलो’ के वर्तमान अभियान के तहत् आन्दोलित किसानों पर सख्ती करने के बजाय केन्द्र सरकार उनसे सही वार्ता करके उनके आन्दोलन को समाप्त करने का प्रयास करेे तो बे��तर तथा इनका शोषण करना भी ठीक नहीं।
1. उत्तराखण्ड राज्य के हल्द्वानी में हुई हिंसा और उसमें जान-माल की हुई क्षति अति-चिन्तनीय। अगर सरकार, प्रशासन व खूफिया तंत्र सतर्क होता तो इस घटना को रोका जा सकता था। सरकार इसकी उच्च स्तरीय जाँच कराए तथा अमन-चैन भी कायम करे।
2. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को लम्बे इंतजार के बाद श्री वी पी सिंह जी की सरकार द्वारा भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। उसके बाद दलित व उपेक्षितों के मसीहा मान्यवर श्री कांशीराम जी का इनके हितों में किया गया संघर्ष कोई कम नहीं। उन्हें भी भारतरत्न से सम्मानित किया जाए।
1. वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा जिन भी हस्तियों को भारतरत्न से सम्मानित किया गया हैै उसका स्वागत है, लेकिन इस मामले में ख़ासकर दलित हस्तियों का तिरस्कार एवं उपेक्षा करना कतई उचित नहीं। सरकार इस ओर भी ज़रूर ध्यान दे।
4. साथ ही, इस असुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा सुझाव पर पार्टी प्रमुख को अब पार्टी की अधिकतर बैठकें अपने निवास पर करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि पार्टी दफ्तर में होने वाली बड़ी बैठक��ं में पार्टी प्रमुख के पहुँचने पर वहाँ पुल पर सुरक्षाकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ती है।
5. ऐसे हाल���त में बीएसपी यूपी सरकार से वर्तमान पार्टी प्रदेश कार्यालय के स्थान पर अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर व्यवस्था करने का भी विशेष अनुरोध करती है, वरना फिर यहाँ कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। साथ ही, दलित-विरोधी तत्वों से भी सरकार सख़्ती से निपटे, पार्टी की यह भी माँग है।
1. सपा अति-पिछड़ों के साथ-साथ जबरदस्त दलित-विरोधी पार्टी भी है, हालाँकि बीएसपी ने पिछले लोकसभा आमचुनाव में सपा से गठबन्धन करके इनके दलित-विरोधी चाल, चरित्र व चेहरे को थोड़ा बदलने का प्रयास किया। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद ही सपा पुनः अपने दलित-विरोधी जातिवादी एजेण्डे पर आ गई।
2. और अब सपा मुखिया जिससे भी गठबन्धन की बात करते हैं उनकी पहली शर्त बसपा से दूरी बनाए रखने की होती है, जिसे मीडिया भी खूब प्रचारित करता है। वैसे भी सपा के 2 जून 1995 सहित घिनौने कृत्यों को देखते हुए व इनकी सरकार के दौरान जिस प्रकार से अनेकों दलित-विरोधी फैसले लिये गये हैं।