कविर्वेदायः नमः
सत साहेब
निमंत्रण-पत्र
सतलोक यहीं है कबीर परमेश्वर जी का
संत रामपाल जी महारान
की पावन उपस्थिति में
परमेश्वर कबीर साहेब जी के 629वें प्रकट दिवस
के उपलक्ष्य में विशाल भण्डारा
संत गरीवदास जी महाराज की अमरवाणी का अखंड पाठ
दहेज रहित विवाह
दंत चिकित्सा
विशाल सत्संग
परमात्मा कबीर जी * को दिए कष्ट
गले में जहरीला सांप डालना
कबीर जी जब सत्संग कर रहे थे, तब शेखतकी के आदेश पर एक सिपाही ने उनके गले में खतरनाक जहरीला साँप डाल दिया। लेकिन गले में जाते ही वह साँप सुंदर फूलों की माला बन गया।#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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परमात्मा कबीर जी को दिए कष्ट
मदमस्त खूनी हाथी के आगे डालना
कबीर साहेब के हाथ-पैर बांधकर उन्हें शराब पिलाए गए एक हाथी के आगे फेंक दिया गया। लेकिन हाथी को कबीर जी की जगह एक भयानक बब्बर शेर दिखाई दिया, जिसे देखकर हाथी डरकर उल्टे पैर भाग गया।
#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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परमात्मा कबीर जी
को दिए कष्ट
झोपड़ी में आग लगाकर जलाने का प्रयास
विरोधियों ने रात के समय कबीर साहेब की झोपड़ी (कुटिया) को चारों तरफ से बंद करके उसमें आग लगा दी ताकि वे जलकर भस्म हो जाएं, लेकिन आग बुझने के बाद वे सुरक्षित बैठे मिले।#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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परमात्मा
कबीर जी
को दिए कष्ट
सरेआम कोड़े मारना
एक बार सत्संग के दौरान शेखतकी ने सैनिकों द्वारा कबीर साहेब को कोड़े (चाबुक) मरवाए। सर्वशक्तिमान और अमर शरीर होने के कारण कबीर साहेब पर इसका कोई असर या निशान नहीं पड़ा।#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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परमात्मा कबीर जी को दिए कष्ट
गले में पत्थर बांधकर गंगा में डुबोना
सिकंदर लोधी और शेखतकी ने कबीर साहेब को भारी बेड़ियों में जकड़कर और गले में भारी पत्थर बांधकर नाव में बैठकर गंगा नदी में फेंक दिया गया। लेकिन बेड़ियां अपने आप टूट गईं और परमात्मा जल के ऊपर सुखासन में विराजमान रहे।#
परमात्मा कबीर जी
को दिए कष्ट
तलवारों से वार करना
शेखतकी ने रात के समय कुटिया में सो रहे कबीर साहेब की हत्या के लिए गुंडों से बेतहाशा तलवारें चलवाई। लेकिन कबीर जी का शरीर अविनाशी और नूरी होने के कारण तलवारें उनके शरीर के आर-पार निकल गईं।
#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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परमात्मा कबीर जी को दिए कष्ट उबलते तेल की कढ़ाई में डालना
शेखतकी ने हजारों लोगों के सामने कबीर साहेब को खौलते हुए तेल के कड़ाहे में डाल दिया।
लेकिन परमात्मा कबीर जी उसमें ऐसे आराम से बैठे रहे जैसे ठंडे जल में बैठे हों; उन्हें खरोंच तक नहीं आई।
#परमात्मा_पर_किये_गए_जुल्म
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