श्री राम जन्मभूमि के विषय के ऊपर, जिस प्रकार की राजनीति समाजवादी पार्टी करने का प्रयास कर रही है, वह अपने आप में बहुत निंदनीय है बहुत स्पष्ट रूप से सरकार पूरी संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ उस विषय पर कार्य कर रही है। यह विषय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार चल रहा है।
इसके उपरांत भी राजनीति करने वालों को मैं याद दिलाना चाहता हूं कि ये वही लोग थे, जो यह कहते थे कि अयोध्या तो यहां थी ही नहीं। ये वही लोग थे, जो कहते थे कि भगवान श्री राम तो हुए ही नहीं। ये वही लोग थे, जो मजाक उड़ाते थे कि राजा दशरथ के इतने महल थे, तो श्री राम यहां पैदा हुए थे या वहां पैदा हुए थे। और ये वही लोग थे, जिन्होंने रामभक्त कारसेवकों के खून से सरयू को लाल कर दिया था। क्योंकि इनका तो एजेंडा Eradication of Sanatan Dharma, यानी हिंदू धर्म का समूल नाश है। और ये वही लोग हैं, जो मात्र कुछ साल पहले श्रीरामचरितमानस की प्रतियां फाड़ते थे। जो यह कहते थे, “Eradication of Sanatan Dharma”, कि हिंदू धर्म कोरोना वायरस, डेंगू, एचआईवी, जाने क्या-क्या है। इसलिए हम पूरे देश की जनता के सामने स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि
जब अयोध्या रामभक्त कारसेवकों के खून से लाल हो गई थी।
सैकड़ों कारसेवक मारे गए थे, यद्यपि इन्होंने आधिकारिक रूप से सिर्फ 16 की संख्या स्वीकार की थी।
उस समय एक नारा लगा था:
“अब भी जिसका खून न खौला, खून नहीं वो पानी है,
और जन्मभूमि के काम न आए, वो बेकार जवानी है।”
तो आज मैं इन लोगों से कहना चाहता हूं:
“जिनका खून नहीं खौला था, खून नहीं वो पानी है,
और वही भक्त का स्वांग रचाते हैं। ये भक्ति नहीं, बेईमानी है।”
भीड़ में जो कॉकरोच शेर बन रहे थे अब भीगी बिल्ली बने हुए हैं..
इतनी वाहवाही नहीं हुई होगी जितनी अब फजीहत होगी
बोल रहा था भारत को नेपाल बना देंगे अब भाई की कहा गई वो टोन पता नहीं 😅😂
तिलचट्टों का मन बढ़ गया है। मोदी सरकार थोड़ी सी झुकी क्या कि ए लोग शेर हो गये हैं।अब तो यह भी कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अस्वीकार्य है। पूरी तरह से अराजकता पर उतर आए हैं और अब इनका एक ही उपाय है लठ्ठ।
अब इसके लट्ठ बजने चाहिए बहुत हो गया भारत में रहकर भारत के कानून से खुद को ऊपर समझने वाला कोई भी इंसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा..
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के उस रुख पर ही सवाल खड़ा कर दिया, जिसमें पहले से आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को संरक्षण नहीं देने की बात कही गई है।
दास ने कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट पहले से FIR वाले प्रदर्शनकारियों को रिहा करने से इनकार करता है, तो हमें सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वीकार नहीं होगा।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों में कुछ हिस्ट्रीशीटर और POCSO व हत्या जैसे गंभीर मामलों के आरोपी भी बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या आंदोलन के नाम पर ऐसे आरोपियों की रिहाई की मांग भी जायज ठहराई जाएगी?
सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी मंजूर नहीं, आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर कार्रवाई भी मंजूर नहीं, तो फिर कानून चलेगा किसके हिसाब से? आंदोलन में शामिल होने भर से किसी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड मिट नहीं जाता। छात्रों की आड़ में गंभीर आरोपियों के लिए ढाल खड़ी करना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।
मैंने किसी भी छात्र को ना आतंकी कहा और ना ही पाकिस्तानी,
@bhelari1 जी इस तरह की मेरे उपर की गई टिप्पणी पर आप माफ़ी मांगे, वरना लीगल एक्शन के लिये तैयार रहें.
@DainikBhaskar आपका पत्रकार @TheKPMalik एक चैनल की जर्नलिस्ट को लेकर इस तरह की टिप्पणी कैसे कर सकता है. मैंने जो बात कही नहीं उसको लेकर मेरे खिलाफ ये व्यक्ति एजेंडा चला रहा है. आप इसका ट्वीट खुद डीलीट करायेंगे या मैं लीगल एक्शन लूँ?
कुछ लोगों को अगर इस बात की ग़लतफ़हमी हो गई है कि मेरे बारें में झूठ फैलाकर अपनी दुकान चला लेंगे तो मैं ऐसा कत्तई होने नहीं दूँगी. मुझे लेकर कुंठा से ग्रस्त मत हों.
( और मेरी ओरिजनल फोटो भी ठीक ही रहती है, तो AI से नक़ली फोटो बनाने की जरुरत नहीं है )
Suvendhu Da showing the Way!
On Friday, this communist, Soumik Chatterjee, posted a picture of himself smoking a cigarette while burning PM Modi’s poster.
On Saturday, he was arrested by the Barasat Police.
Other states, union territories should follow suit
बिल्कुल सही सुधीर जी.. मैंने भी ये मुद्दा उठाया था, कल कई चैनल के एडिटर्स को मेसेज भेज के भी रिक्वेस्ट की थी कि छात्रों के साथ खड़े रहते हुए अपने साथियों के साथ खड़े होना भी ज़रूरी है।
ग्राउंड पर रिपोर्टर्स की लिंचिंग का प्रयास एक सुनियोजित तरीके से करवाया जा रहा है और फिर जानबूझकर उसे वायरल भी कराया जा रहा है।
लेकिन अफ़सोस की मीडिया के बड़े बड़े नाम हर बार की तरह इस बार भी फेल हो गए।