रेगिस्तान की रेत पर लकीर बनाती चली गई,
सीटी की आवाज़ में कोई कहानी सुना गई।
जहाँ दूर-दूर तक बस खामोशी का राज था,
वहीं ट्रेन की रफ्तार में जीवन का आवाज़ था।
रेत के टीलों से टकराती हुई पटरियों की तान,
रेगिस्तान भी सुन लेता है तरक्की की पहचान।
सोमवार शिवजी का वार है,
हर भक्त के दिल में बसता भोलेनाथ का प्यार है।
जो झुक गया शिव के चरणों में सच्चे मन से,
उसका हर दुःख, हर संकट पल में पार है।
हर हर महादेव 🙏
रेगिस्तान की रेत पर लकीर बनाती चली गई,
सीटी की आवाज़ में कोई कहानी सुना गई।
जहाँ दूर-दूर तक बस खामोशी का राज था,
वहीं ट्रेन की रफ्तार में जीवन का आवाज़ था।
रेत के टीलों से टकराती हुई पटरियों की तान,
रेगिस्तान भी सुन लेता है तरक्की की पहचान।
फकीरी में भी तेवर नवाबों वाले हैं,
Udta Punjab के अंदाज़ ही जवाबों वाले हैं।
हम झुकें भी तो सिर्फ़ इज़्ज़त के लिए,
वरना हमारी शान के किस्से किताबों वाले हैं।
ना ताज चाहिए, ना तख़्त चाहिए-...…...🙏