अखिलेश यादव वचन दे रहे हैं👇
पंडित जी की हर बात मानेंगे।
वो कहेंगे बाल कटाना है तो कटाएंगे, कहेंगे बढ़ाना है तो बढ़ाएंगे।
कहेंगे घर से निकलना है तो निकलेंगे, नहीं निकलना तो नहीं निकलेंगे।
वो कहेंगे शूद्र हो शासक मत बनो तब क्या करेंगे?
ये नहीं बता रहे हैं।
विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज’ अर्थात् बहुजनों के मसीहा भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बी.एस.पी. के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद।
सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का पूरा जीवन देश के ग़रीबों उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, और अन्ततः जिसकी गारण्टी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।
किन्तु काश, देश की केन्द्र व यहाँ राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़्यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को ज़रूर दे पाता।
अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवाँ चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंज़िल की ओर ज़रूर आगे बढ़ेगा। जय भीम, जय भारत
नई दिल्ली में आयोजित ’एआई इम्पैक्ट समिट’, जिसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था, इस दौरान जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताये जा रहे हैं, वह अति-अशोभनीय व निन्दनीय है।
अगर यह सम्मेलन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, किन्तु समिट के दौरान ऐसा आचरण करना यह चिन्ता की बात है अर्थात अपने देश की गरिमा व इमेज को ना बिगाड़ा जाये तो यह उचित होगा।
जैसा कि विदित है कि आज से संसद में चूंकि चुनाव सुधार को लेकर चर्चा हो रही है। अतः बी.एस.पी. की ओर से इस सम्बन्ध में यह कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया में अन्य सुधार लाने के साथ-साथ निम्न तीन ख़ास सुधार लाना बहुत ज़रूरी हैं।
SIR को लेकर जो पूरे देश में व्यवस्था चल रही है BSP उसके विरोध में नहीं है। परन्तु BSP का यह कहना है कि इस सम्बन्ध में मतदाता सूची में नाम भरने की जो भी प्रक्रिया होनी है, उसके लिए जो समय सीमा निर्धारित की गई है वो बहुत ही कम है, जिसकी वजह से BLO के ऊपर भी काफी दबाव है और कई BLO काम के दबाव के वजह से अपनी जान भी गवां चुके हैं। जहाँ करोड़ों मतदाता हैं वहाँ BLO को उचित समय मिलना ही चाहिये और ख़ासतौर पर उस प्रदेश में जहाँ जल्दी ही कोई भी चुनाव नहीं है।
उत्तर प्रदेश में लगभग 15.40 करोड़ से भी ज़्यादा मतदाता हैं और अगर वहाँ SIR का कार्य जल्दबाज़ी में पूरा करने की कोशिश की जायेगी तो इसका नतीजा यह होगा कि अनेकों वैध-मतदाता ख़ासतौर पर जो ग़रीब हैं और काम करने के सिलसिले में बाहर गये हैं, तो फिर उनका नाम मतदाता सूची से रह जायेगा और वो बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी द्वारा ऐसे व्यक्तियों को दिया गया वोट डालने का संवैधानिक अधिकार से वंचित कर देगा, जो कि पूर्ण रूप से अनुचित होगा। अतः ऐसे में SIR की प्रक्रिया को पूरी करने में जल्दबाज़ी ना करते हुये उचित समय दिया जाना चाहिये अर्थात् वर्तमान मे दी गई समय सीमा को बढ़ाना चाहिये।
इसके साथ ही, मा. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव आयोग द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। ऐसे लोग जिनका कोई भी आपराधिक इतिहास है उन्हें अपने हलफनामें में इसका अपने आपराधिक इतिहास का पूरा ब्योरा देना होगा और इसके साथ-साथ स्थानीय अख़बारों में भी इसका पूरा विवरण भी प्रकाशित करना होगा तथा जिस राजनैतिक पार्टी से वे चुनाव लड़ रहे हैं, उस राजनैतिक पार्टी की भी ज़िम्मेदारी होगी कि वह इस सूचना को अपने स्तर से भी राष्ट्रीय अख़बारों में भी प्रकाशित करेगी।
इस सम्बन्ध में BSP का कहना है कि अक्सर यह पाया गया है कि जिस व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए टिकट/सिम्बल दिया जाता है उनमें से कुछ लोग अपना आपराधिक इतिहास पार्टी को नहीं बतातें हैं तथा कुछ लोगों के सम्बन्ध में स्क्रूटनी (scrutiny) के समय ही पार्टी को इसका पता लग पाता है, जिसकी वजह से इसकी ज़िम्मेवारी पार्टी के ऊपर आ जाती है और वैसे भी ऐसे प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास को राष्ट्रीय अख़बारों में छपवाने की ज़िम्मेवारी पार्टी के ऊपर डाली गयी है।
जबकि इस सम्बन्ध में हमारी पार्टी का यह सुझाव है कि आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के सम्बन्ध में सभी औपचारिकताएं पूरी करने की ज़िम्मेवारी उन्हीं पर डालनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर होनी चाहिये। और अगर आगे चलकर यह मालूम होता है कि किसी प्रत्याशी नेे अपना आपराधिक इतिहास छुपाया है तो इससे सम्बंधित हर प्रकार की कानूनी liability और ज़िम्मेदारी भी उसी पर आनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर।
इसके इलावा हमारी पार्टी का यह भी सुझाव है कि EVM के द्वारा उसमें लगातार उठती गड़बड़ियों की शिकायत जो चुनाव के दौरान और उसके बाद व्यक्त की जाती है उसे दूर करने के लिए और चुनाव प्रक्रिया में सभी का पूर्ण रूप से विश्वास पैदा करने के लिए अब EVM के द्वारा vote डलवाने की जगह पुनः बैलेट पेपर से ही vote डलवाने की प्रक्रिया लागू की जाये और अगर किसी वजह से ऐसा अभी नहीं किया जा सकता है तो कम से कम VVPAT के डब्बे में जो vote डालते समय पर्ची (slip) गिरती है उन सभी पर्चियों की गिनती सभी बूथों में करके EVM के वोटों से मिलान किया जाये।
ऐसा ना करने का जो कारण Election Commission द्वारा बताया जाता है, कि इसमें काफी समय लग जायेगा जबकि इनका यह तर्क बिलकुल भी उचित नहीं है। क्यांेकि अगर सिर्फ कुछ और घन्टे गिनती में लग जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिये, जबकि वोट डालने की चुनाव प्रक्रिया महीनों चलती है। और यह इसलिए भी जरूरी है कि इससे देश की आमजनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा तथा इस प्रकार के जो अनेकों प्रकार के सन्देह उत्पन्न होते हैं उनपर भी पूर्ण विराम लगेगा, जो देश हित में होगा।
नाम = तान्या गौतम
पद = एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर (मुन्नालाल कॉलेज सहारनपुर)
पति का नाम = आदित्य गौतम (एसडीओ)
वायरल टैग = गिटार वाली दुल्हन
तान्या गौतम जब दुल्हन बनकर ससुराल में आई तब महिला संगीत पर उनसे गाना सुनाने के लिए कहा गया, तब उसने जो गाना गाया वो वायरल हो गया।
विकास कुमार जाटव
भारतीय फिल्म इण्डस्ट्री की जानी-मानी हस्तियों में से एक दिग्गज अभिनेता श्री धर्मेन्द्र का आज निधन हो जाने की ख़बर अति-दुखद। अपने मिलनसार, हमदर्द व ख़ुश मिज़ाज स्वभाव के लिये मशहूर रहे श्री धर्मेन्द्र ने काफी लम्बे समय तक फिल्म दुनिया व फिल्मों के शौक़ीन लोगों के दिलों पर राज किया। उनके परिवार वालों के साथ-साथ उनके तमाम चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कु़दरत उन सभी को इस दुख को सहने की शक्ति दे, यही कामना।
बी.एस.पी. की बिहार प्रदेश यूनिट सहित देश के कई राज्यों की कल नई दिल्ली स्थित पार्टी केन्द्रीय कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में बिहार स्टेट बी.एस.पी. के वरिष्ठ पदाधिकारियांे तथा वहाँ से पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक श्री सतीश यादव भी मौजूद रहे।
समीक्षा में, अन्य बातों के अलावा, यह बात भी सामने आई कि मतगणना वाले दिन दिनांक 14 नवम्बर को विरोधी दलों के असामाजिक तत्वों द्वारा कराये गये उपद्रव में बी.एस.पी. के विधायक की गाड़ी तथा प्रशासन की भी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की गई, जिसे काबू में करने हेतु पुलिस द्वारा रात में लाठीचार्ज किया गया जिसमें बी.एस.पी. के कई कार्यकर्ता भी गम्भीर रूप से घायल हुये।
इसको लेकर ज़िले की पुलिस द्वारा शासन के दबाव में बी.एस.पी. के लगभग 250 कार्यकर्ताओं पर एवं अन्य 1000 अज्ञात लोगों पर कई एफ.आई.आर. दर्ज करके उसकी आड़ में पुलिस सिर्फ बी.एस.पी. कार्यकर्ताओं को ही परेशान कर रही है, जबकि पहले इस घटना की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिये और उसके बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिये।
अतः बी.एस.पी. की माँग है कि इस मामले की सही व निष्पक्ष जाँच हो तथा जब तक यह जाँच पूरी ना हो जाये, तब तक इस पर कोई पुलिस कार्रवाई व गिरफ्तारी आदि ना की जाए तो यही उचित होगा।
तरह उत्तर प्रदेश का गुंडा राज कायम है.सब्जी विक्रेता अचल से जाति पूँछी जब दलित निकला तब लाठियों से बुरी तरह पीटा गया.घटना शहजहांपुर की है कुछ दिन पहले एक पुलिस दरोगा ने दलित को छत से लात मारकर धक्का दिया बाद में उसकी मौत हो गयी.अब उत्तर प्रदेश में दलित सब्जी भी नहीं बेच सकता.?
महान संत बाबा गुरु घासीदास जी एवं उनके अनुयायी सतनामी समाज पर जातिवादी मानसिकता से ग्रसित कुछ कथावाचकों द्वारा अमर्यादित एवं अशोभनीय टिप्पणी करना अति-निन्दनीय व चिन्तनीय। इसको लेकर पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में तथा सतनामी समाज के लोगों में ख़ासकर अपने समाज के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान को आघात पहुँचाने के प्रयास के कारण काफी अहत हैं तथा उनमें आक्रोष व्याप्त है। छत्तीसगढ़ सरकार संकीर्ण मानसिकता व जातिवादी द्वेष रखने वाले ऐसे कथावाचकों पर सख़्त अंकुश लगाये तो यह उचित होगा।
बीजेपी राज में महिलाओं की दुर्दशा देखिए।
MP के छतरपुर में सोनू द्विवेदी एवं उसके अन्य गुर्गों ने मिलकर सहोदरा सेन नामक युवती के हाथ-पैर बांधकर उसे बेरहमी से पीटा। पुलिस ने अभी तक कार्रवाई नहीं की है।
महिला आयोग से लेकर CM आवास तक, सब मौन हैं।
उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगाँठ अर्थात् उत्तराखण्ड रजत जयंती पर राज्य के समस्त भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की उत्तर प्रदेश में मेरी रही सरकार द्वारा कई नये ज़िले, तहसील व ब्लाक आदि बनाकर उत्तराखण्ड में जनहित, जनकल्याण व विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पार्टी के समर्थन से बने नये उत्तराखण्ड राज्य के लोगों का जीवन भी ख़ुश एवं ख़ुशहाल हो, यही शुभकामनायें। शासन-प्रशासन भी सही नीयत व नीति से कार्य करे तो यह बेहतर।
शिक्षकों ने दलित बच्चे के पैंट में डाला बिच्छू!⚠️🚨
वैसे तो शिक्षक पूजनीय होते हैं लेकिन जाति से कुंठित शिक्षक किसी दुष्ट से कम नहीं। ऐसा ही एक मामला शिमला का है जहां सरकारी स्कूल में शिक्षकों ने एक दलित बच्चे को बेरहमी से मारा और उसके पैंट में बिच्छू डाल दिया।
यह घटना शिमला जिले के रोहड़ू प्रखंड की है। बच्चे के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि स्कूल में दलित समुदाय के बच्चों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जाता है। प्रधानाध्यापक देवेंद्र, शिक्षक बाबू राम और शिक्षिका कृतिका ठाकुर पिछले एक साल से उनके बेटे के साथ लगातार मारपीट कर रहे हैं। लगातार पिटाई से बच्चे के कान से खून बहने लगा और उसका कान का पर्दा भी क्षतिग्रस्त हो गया।
पीड़ित पिता ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि शिक्षकों ने उसके बेटे को स्कूल के शौचालय में ले जाकर उसकी पैंट में जिंदा बिच्छू डाल दिया। जब परिवार ने इस अमानवीय हरकत का विरोध किया तो शिक्षकों ने उन्हें हिंसक धमकियां दी और चेतावनी दी कि अगर उन्होंने शिकायत की तो बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाएगा।
शिमला जिले में दलित समुदाय के बच्चों के साथ भेदभाव के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। अभी पिछले ही महीने इसी रोहड़ू प्रखंड में एक दलित बच्चे ने सवर्ण के घर में प्रवेश कर लिया था, जिसके बाद उसे गौशाला में बंद करके बेरहमी से पीटा गया। शुद्धिकरण के नाम पर उसके माता-पिता पर अनेकों तरह के दबाव डाले गए। उन्हें अपमानित किया गया। इस अपमान से आहत होकर 12 वर्षीय नाबालिक बच्चे ने आत्महत्या कर ली। इतने गंभीर मामले के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। उस मामले में भी न्याय तभी संभव हुआ जब हिमाचल हाईकोर्ट और राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने हस्तक्षेप किया।
मैं प्रशासन से मांग करता हूँ कि शिमला के इस सरकारी प्राथमिक स्कूल में दलित बच्चे के साथ क्रूरता करने वाले प्रधानाध्यापक सहित सभी जातिवादी शिक्षकों पर बच्चों के प्रति क्रूरता संबंधित कानून, भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह घटना मानवता के लिए एक कलंक है।