उड़ीसा के सिजीमाली क्षेत्र में बहुजन समाज पर बढ़ता दमन अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक है।
वेदांता लिमिटेड एवं उसकी ठेका कंपनी “मैत्री” के बॉक्साइट खनन प्रोजेक्ट के विरोध में स्थानीय लोग “माँ माटी माली सुरक्षा मंच” के नेतृत्व में लंबे समय से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों में स्थित सिजीमाली पर्वत पंचम अनुसूची और PESA कानून के अंतर्गत आता है, जहाँ ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है फिर भी बिना सहमति खनन की अनुमति दे दी गई।
ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनसुनवाई और वन अधिकार अधिनियम के तहत हुई ग्रामसभाओं में भी ग्रामीणों ने इस परियोजना को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि यह उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट कर देगी, लेकिन उनकी आवाज़ को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कंपनी के सड़क निर्माण और अन्य आधारभूत ढांचे के लिए आदिवासी एवं दलितों की जमीनों पर गैरकानूनी कब्जा किया जा रहा है, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।
10 मार्च को 10 महिलाओं सहित 21 आदिवासियों को गिरफ्तार किया गया और 27 मार्च को भी कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। 3 अप्रैल से धारा 163 लागू कर पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है, जहाँ भारी पुलिस बल, ड्रोन निगरानी और दमन के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।
6 अप्रैल की आधी रात को कंटामाल गाँव में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें कई लोग घायल हुए, दो महिलाओं को गंभीर चोट आई और एक गाय की मौत हो गई। भय के कारण लोग इलाज तक नहीं करा पा रहे हैं।
सबसे दुखद पहलू यह है कि स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें अपने ही समाज के अधिकारों और सुरक्षा से अधिक भाजपा के राजनीतिक हितों और असम चुनावों की चिंता है। अपने ही लोगों को पुलिस दमन के हवाले कर देना बेहद पीड़ादायक और निंदनीय है।
यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि आदिवासी और दलित समाज के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों पर सीधा हमला है।
@mygovindia से हमारी प्रमुख माँगें:
1. सिजीमाली क्षेत्र से निषेधाज्ञा को तुरंत हटाया जाए।
2. पूरे क्षेत्र से पुलिस बल को वापस लिया जाए।
3. ग्रामसभा की अनुमति के बिना वेदांता कंपनी को दी गई सिजीमाली खनन लीज को रद्द किया जाए।
4. वन अधिकार अधिनियम एवं पेसा अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
यह केवल कानून और अधिकारों का प्रश्न नहीं है, बल्कि आदिवासी एवं दलित समुदाय के अस्तित्व, सम्मान और जीवन के अधिकार का मुद्दा है।
@rashtrapatibhvn@CMO_Odisha@MohanMOdisha@India_NHRC@NCSC_GoI@ncsthq@ikishormakwana@AntarsinghArya@ForestDeptt
उत्तर प्रदेश में पटरी दुकानदारों और नगर निगम के प्रवर्तन दल के बीच उत्पन्न हालात चिंताजनक हैं। हिंसा और अभद्रता किसी भी पक्ष से स्वीकार्य नहीं है। प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध-दोनों संवैधानिक मर्यादाओं में होने चाहिए।
देश में रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापारियों की आजीविका की सुरक्षा के लिए पथ विक्रेताओं (आजीविका का संरक्षण एवं पथ विक्रय का विनियमन) अधिनियम, 2014 लागू है। साथ ही “प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना” के तहत 10,000 रुपए से 50,000 रुपए तक का कार्यशील पूंजी ऋण दिया जाता है।
माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, स्वनिधि योजना में जितनी राशि मिलती है, उसमें किसी शॉपिंग मॉल में दुकान लेना संभव नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि नगर निकाय वैकल्पिक वेंडिंग जोन, किफायती दुकानें और संरक्षित बाजार स्थल उपलब्ध कराएँ, ताकि गरीब पटरी दुकानदार सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय कर सकें।
कानून और गरीब की रोजी-रोटी, दोनों की समान रूप से रक्षा होना ही सुशासन की सच्ची पहचान है।
@UPGovt@CMOfficeUP
राजधानी लखनऊ के कल्याणपुर क्षेत्र में अधूरे संसाधन के साथ लाइन ठीक कर रहे संविदा लाइनमैन परशुराम रावत की करंट लगने से दर्दनाक मौत केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक है। उच्च वोल्टेज लाइन की मरम्मत के दौरान शटडाउन के बावजूद करंट आ जाना यह संकेत है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं।
माननीय ऊर्जा मंत्री @aksharmaBharat जी, यह अकेला मामला नहीं है। पिछले दो सप्ताह में राजधानी लखनऊ के विभिन्न उपकेंद्रों पर 6 संविदा कर्मी हादसों का शिकार हुए। यह लगातार घटनाएँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संविदा लाइनमैनों के असुरक्षित हालात को दर्शाती हैं।
हम @UPPCLLKO से मांग करते हैं कि-इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।मृतक के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा और स्थायी रोजगार दिया जाए तथा हालिया हादसों में घायल अन्य संविदा लाइनमैनों को समुचित इलाज, उचित मुआवजा और पूर्ण विभागीय सहायता प्रदान की जाए।।सभी उपकेंद्रों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित किए जाएं।संविदा लाइनमैनों कर्मियों के स्थायीकरण और पूर्ण सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की ठोस नीति बनाई जाए।
@UPGovt@CMOfficeUP@myogiadityanath
ईरान के सर्वोच्च नेता और भारत के मित्र आयतुल्ला अली ख़ामेनेई जी के निधन की खबर एक युग के अंत का संकेत है।
भारत–ईरान संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक यह रिश्ता अहम रहा है। पाकिस्तान के साथ तनाव के दौर में भी ईरान ने भारत के साथ सहयोग और संतुलन का रास्ता चुना।
पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध चिंताजनक है। दुनिया कब तक तथाकथित “वैश्विक तानाशाहों” की दखलंदाज़ी झेलेगी? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका हर असहमति का जवाब प्रतिबंध और युद्ध से देगा?
अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन है, जो किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का निर्देश देता है। किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को उनके अपने देश की सीमा के भीतर बिना किसी युद्ध की घोषणा या कानूनी प्रक्रिया के निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है। यह कदम वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक है।
अब प्रधानमंत्री @narendramodi जी को स्पष्ट करना चाहिए-भारत युद्ध की राजनीति के साथ खड़ा है या बुद्ध की करुणा और स्वतंत्र कूटनीति के साथ?
भारत की आवाज़ शांति, न्याय और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्ष में बुलंद होनी चाहिए।
ऐसे योद्धा की शहादत को हम नमन करते हुए शांति, सद्भाव और मानवता के संदेश में बदलें।
अलविदा, भारत के वफ़ादार दोस्त।
युद्ध समाधान नहीं, विनाश है।
उत्तर प्रदेश के जिला फर्रुखाबाद जनपद की कोतवाली कायमगंज क्षेत्र में जातिवादी मानसिकता ग्रस्त गुंडों द्वारा दलित युवती के साथ की गई बर्बर घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।
पूर्व में की गई शिकायत के बावजूद आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि 24.02.2026 को नाजायज हथियारों से लैस होकर आरोपियों ने जबरदस्ती करने का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपियों ने पीड़िता को जातिसूचक गालियाँ दी और पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
गंभीर अवस्था में उसे विभिन्न अस्पतालों से रेफर करते हुए अंततः KGMU), लखनऊ में भर्ती कराया गया, जहाँ आज सुबह उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह प्रशासन की संवेदनहीनता दर्शाता है।
@UPGovt से हमारी मांग है-पीडिता को शीघ्र ही न्याय मिले।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
देश में बेटियों की शिक्षा और सम्मान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन आधिकारिक आंकड़े अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक हैं।
Ministry of Education के UDISE+ 2024-25 के अनुसार पूरे भारत में 50,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है, जबकि लगभग 70,000 स्कूलों में शौचालय या तो अनुपलब्ध हैं या कार्यशील नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां लगभग 7,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं है और लगभग 11–12 हजार स्कूलों में शौचालय कार्यशील नहीं हैं।
स्थिति केवल यहीं तक सीमित नहीं है। अन्य राज्यों के आंकड़े भी बेहद गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करते हैं-
छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है।
जम्मू-कश्मीर में 1,321 सरकारी स्कूलों में शौचालय नहीं है।
उत्तराखंड में 141 विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है।
राजस्थान में 14,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है।
मध्य प्रदेश में 14,072 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, जिनमें लगभग 10,000 स्कूल पूरी तरह शौचालय विहीन हैं।
ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि लाखों बेटियों की गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर प्रश्न हैं। जब विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कैसे रुकेगी? मूत्र संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कैसे कम होगा? और “बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे ज़मीन पर कैसे सफल होंगे?
हम @mygovindia और संबंधित राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि मिशन मोड में सभी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग एवं कार्यशील शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
बेटियों की शिक्षा पर केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और सम्मानजनक बुनियादी व्यवस्था आवश्यक है। यही सच्चे अर्थों में विकास और समानता की पहचान है।
भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के हमारे समर्पित कार्यकर्ता और छोटे भाई कपिल आज़ाद जी के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए आज गाजियाबाद स्थित मणिपाल हॉस्पिटल पहुंचा।
उनके हृदय की सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। चिकित्सकों की देखरेख में उपचार जारी है और अब उनके स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हो रहा है।
हमें पूर्ण विश्वास है कि हमारा भाई शीघ्र ही पूर्णतः स्वस्थ होकर पुनः हमारे बीच सक्रिय भूमिका में दिखाई देगा।
प्रकृति से प्रार्थना है कि उन्हें शीघ्र स्वस्थ कर हमारे परिवार और संगठन के बीच सुरक्षित लौटाए।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन की खबर न केवल ईरान बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए एक युगांतकारी क्षण का संकेत है। उनके नेतृत्व में ईरान ने पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान और रणनीतिक संतुलन बनाए रखा।
भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और सभ्यतागत विश्वास पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार जैसे रणनीतिक परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रश्न पर यह साझेदारी महत्वपूर्ण रही है। पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण दौर में भी ईरान ने भारत के साथ सहयोग और संतुलन की नीति अपनाई।
पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध गंभीर चिंता का विषय है। क्या विश्व व्यवस्था लगातार तथाकथित वैश्विक शक्तियों के हस्तक्षेप को सहती रहेगी? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका हर असहमति का उत्तर प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाई से ही देगा?
अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के अनुसार किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान अनिवार्य है। किसी राष्ट्राध्यक्ष को उसके ही देश की सीमा के भीतर बिना औपचारिक युद्ध घोषणा या वैधानिक प्रक्रिया के निशाना बनाना वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक कदम माना जाएगा।
अब समय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट करें — क्या भारत युद्ध की राजनीति के साथ खड़ा होगा, या गौतम बुद्ध की करुणा, शांति और स्वतंत्र कूटनीति की परंपरा को आगे बढ़ाएगा?
भारत की आवाज़ शांति, न्याय, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और मानवीय मूल्यों के पक्ष में बुलंद होनी चाहिए।
ऐसे नेतृत्व को श्रद्धांजलि देते हुए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और सद्भाव ही स्थायी समाधान का मार्ग है।
अलविदा, एक पुराने मित्र।
युद्ध समाधान नहीं — विनाश है।
राजधानी लखनऊ के कल्याणपुर में अधूरी सुरक्षा और संसाधनों के बीच लाइन दुरुस्त कर रहे संविदा लाइनमैन परशुराम रावत की करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। शटडाउन के बावजूद हाई वोल्टेज लाइन में करंट आ जाना सीधे-सीधे जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
माननीय ऊर्जा मंत्री @aksharmaBharat जी, यह पहला मामला नहीं है। पिछले दो सप्ताह में राजधानी के अलग-अलग उपकेंद्रों पर 6 संविदा कर्मी हादसों का शिकार हो चुके हैं। यह लगातार घटनाएँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संविदा लाइनमैनों की बदतर कार्यस्थितियों को उजागर करती हैं।
हम Uttar Pradesh Power Corporation Limited से मांग करते हैं—
• पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
• मृतक परिवार को सम्मानजनक मुआवजा व एक सदस्य को स्थायी रोजगार दिया जाए।
• घायल संविदा कर्मियों को समुचित इलाज, उचित मुआवजा और विभागीय सहायता मिले।
• सभी उपकेंद्रों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट और आवश्यक सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित किए जाएँ।
• संविदा लाइनमैनों के स्थायीकरण व पूर्ण सुरक्षा नीति पर ठोस निर्णय लिया जाए।
@UPGovt@CMOfficeUP@myogiadityanath
ईरान के सर्वोच्च नेता और भारत के मित्र आयतुल्ला अली ख़ामेनेई जी के निधन की खबर एक युग के अंत का संकेत है।
भारत–ईरान संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर क्षेत्रीय स्थिरता तक यह रिश्ता अहम रहा है। पाकिस्तान के साथ तनाव के दौर में भी ईरान ने भारत के साथ सहयोग और संतुलन का रास्ता चुना।
पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध चिंताजनक है। दुनिया कब तक तथाकथित “वैश्विक तानाशाहों” की दखलंदाज़ी झेलेगी? क्या संयुक्त राज्य अमेरिका हर असहमति का जवाब प्रतिबंध और युद्ध से देगा?
अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन है, जो किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का निर्देश देता है। किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को उनके अपने देश की सीमा के भीतर बिना किसी युद्ध की घोषणा या कानूनी प्रक्रिया के निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है। यह कदम वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक है।
अब प्रधानमंत्री @narendramodi जी को स्पष्ट करना चाहिए-भारत युद्ध की राजनीति के साथ खड़ा है या बुद्ध की करुणा और स्वतंत्र कूटनीति के साथ?
भारत की आवाज़ शांति, न्याय और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्ष में बुलंद होनी चाहिए।
ऐसे योद्धा की शहादत को हम नमन करते हुए शांति, सद्भाव और मानवता के संदेश में बदलें।
अलविदा, भारत के वफ़ादार दोस्त।
युद्ध समाधान नहीं, विनाश है।
बिहार के रोहतास ज़िले के दरिहट थाने में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश अध्यक्ष अमर ज्योति पासवान सहित कई पदाधिकारियों को अनुचित रूप से हिरासत में रखा गया है।
बलभद्रपुर गांव में पासवान समाज के एक व्यक्ति की निजी भूमि पर कुछ अराजक तत्वों द्वारा अवैध रूप से मंदिर निर्माण का प्रयास किया जा रहा था। स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से समझाने और कानूनसम्मत समाधान निकालने पहुंचे हमारे साथियों पर भू-माफियाओं ने हमला कर दिया तथा कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्थानीय पुलिस ने हमलावरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, बल्कि पीड़ित पक्ष के नेताओं को ही थाने में बैठा लिया। यह न्याय और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बिहार प्रशासन से हमारी स्पष्ट मांग है कि निर्दोष साथियों को तुरंत रिहा किया जाए, हमलावरों पर कठोर कार्रवाई हो और पीड़ितों को न्याय मिले। यदि किसी भी साथी को झूठे आरोपों में जेल भेजने का प्रयास किया गया, तो यह अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
@bihar_police
I request @DmSambalpur, @SpSambalpur, @Rdcsambalpur@nlcindialimited to take notice. Local police acts as an agent of NLCIL. Torturing SC families of Beheramunda, Khinda. Forcing thm to desert the villageon behalf of the company. Please restrain the pol
Million regards for Sanction of funds for Dr Babasaheb Ambedkar statue at Modipada chok Sambalpur Thanks Sambalpur Commissioner @RehanIITD (Rehan Khatri) sir and @SMC_Sambalpur@DmSambalpur