इन चेहरों को पहचान लीजिए...
ये सब PDA वोटों का सौदा करने वाले लोग है जो 5-12 Crore में टिकट बेच रहे है।
ये सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे??
ये आरक्षण की लूट पर बोलेंगे??
ये बैकलॉग नौकरियों पर बोलेंगे??
ये सब "लफंडर" है जो अपने और अपने परिवार के लिए PDA अधिकारों का सौदा करके "डिफेंडर" से चलना चाहते है।
आज के बाद अगर @AnupriyaSPatel ,@oprajbhar ,@drsanjayknishad जैसे लोगों के PDA के अधिकारों को लेकर कोई दिखावा किया तो फिर ट्विटर पर इनके गद्दारी के बारे में ऐसा लिखेंगे...
कि टिकट बेचना भूल जाएंगे।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का ई-अधियाचन पोर्टल क्रियाशील होने के बाद विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग बड़ी शिक्षक भर्ती की तैयारी में जुटा है।
पुरानी भर्तियों के खाली रह गए पदों को मिलाकर करीब 60,000 पद बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में रिक्त हैं। इसमें से नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों के 11,508 पद रिक्त होने की समेकित सूचना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को ऑफलाइन दी गई है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में रिक्त करीब 48,000 पदों की सूचना पोर्टल पर आनलाइन भेजने की तैयारी विभाग कर रहा है। इसके लिए नियमावली को अपडेट किया जा रहा है।
शिक्षा सेवा चयन आयोग पहली बार परिषदीय शिक्षकों के चयन के लिए भर्ती परीक्षा कराएगा। अब तक यह भर्ती परीक्षा उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा कराई जाती रही है। बेसिक शिक्षा में नगर और ग्रामीण दो अलग-अलग कैडर हैं।
ग्रामीण कैडर के विद्यालयों के लिए 2018 में शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन नगर क्षेत्र के विद्यालयों में पिछले कई वर्ष से भर्ती नहीं हुई। इस कारण नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है।
पिछले दिनों बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से नगर क्षेत्र में शिक्षकों के 11,508 पद रिक्त होने की लिखित जानकारी आयोग को भेज दी गई है, लेकिन आयोग चयन के लिए प्रक्रिया तब शुरू करेगा, जब उसे पोर्टल पर आनलाइन अधियाचन प्राप्त हो जाएंगे।
बेसिक शिक्षा में 2018 के बाद से शिक्षक भर्ती नहीं होने के कारण विभाग ने पिछली भर्तियों में रिक्त रह गए पदों का विवरण भी जुटाया है। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में करीब 48,000 पद रिक्त हैं।
इन पर चयन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नियमावली संशोधन प्रक्रिया के बीच कम संख्या वाले विद्यालयों में समायोजन की प्रक्रिया हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पूर्ण कर रहा है।
इधर, शिक्षा आयोग को भेजे जाने वाले अधियाचन के अनुरूप बेसिक का पोर्टल जल्द तैयार होने की उम्मीद है। इसके उपरांत सभी रिक्त पदों का विवरण भर्ती के लिए आनलाइन माध्यम से आयोग को भेजा जाएगा।
उधर, एडेड माध्यमिक विद्यालयों और एडेड महाविद्यालयों के रिक्त पदों का विवरण चरणबद्ध तरीके से आयोग के पोर्टल पर आनलाइन अपलोड किया जा रहा है।
#UttarPradesh #Teacher #Job #DainikJagran
देख रहे हो आज तक वालों की हरामखोरी,
पहले 12 सिलेंडर में सब्सिडी मिलती थी, फिर 9 सिलेंडर पर मिलने लगी,
अब वो संख्या घटाकर 4 कर दी गई है, उसके बावजूद ये लोग उसको राहत बता रहे हैं।
दलाल मीडिया
सरकारी स्कूलों की शिक्षा में कभी 27वें स्थान पर रहा पंजाब आज पहले स्थान पर पहुंच गया है। केरल जैसे राज्य को भी पीछे छोड़ दिया।
दिल्ली में शिक्षा क्रांति के बाद अब पंजाब में भी सरकारी स्कूलों का ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है।
बुलेट ट्रेन, 5 ट्रिलियन इकोनॉमी, विश्वगुरु बनने की बाते है, और 1 लाख स्कूलों में बिजली नहीं, वही 98,500 स्कूलों में बेटियों के लिए शौचालय नहीं।
जिस देश के बच्चों को बुनियादी सुविधाएँ न दे पा रहे हो हम तो सच में आत्ममंथन की जरूरत है #education_system
मुझे गहरा अफसोस है कि मैंने कल के वीडियो में मीडिया पर बोला क्योंकि उन्होंने हमें 2 कौड़ी का कहा।
आज सारे दिन सिर्फ वही बात होती रही। और ऐसा डर होने लगा कि इस मीडिया vs YouTube Teachers की बहस में कहीं पेपर लीक जैसा इतना बड़ा मुद्दा धुंधला न हो जाए।
क्योंकि सरकारें तो यही चाहती हैं कि किन्हीं दो पक्षों को लड़ाकर खुद बच जाए।
आप सबसे मेरी गुजारिश है कि अभी हमें सिस्टम ठीक करके ही सांस लेनी है। जो अति पेपर लीक की हो चुकी है, उसका अंत करने का यही सही समय है।
मैं एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि मैंने ढाई घंटे से ज्यादा पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और सिस्टम की खामियों पर बोला था। कृपया उस तरफ भी थोड़ा ध्यान आकर्षित कीजिए।
और रही बात कोचिंग्स की, तो नीचे दिया गया वीडियो देखिए, जो उसी वीडियो का हिस्सा है जिसमें मैंने खुद कुछ कोचिंग संस्थानों के चरित्र और कमियों पर भी खुलकर बात की है। मैंने हमेशा गलत को गलत कहा है।
दूसरा यह भी जान लीजिए कि मैंने अपनी ऑफलाइन कोचिंग्स बंद किए आज 7 साल से ज्यादा हो गए हैं। और ऑनलाइन Abhinay Maths[10lakh+ users] पर इस समय जो भी कोर्स उपलब्ध हैं, वे पूरी तरह निःशुल्क हैं।
हाँ, पिछले कई वर्षों में मैंने छात्रों के हक के लिए अनेक लड़ाइयाँ अदालतों में लड़ी हैं। आप सब जानते हैं कि न्याय पाने के लिए आज बहुत बड़ा आर्थिक खर्च करना पड़ता है। उसी खर्च को वहन करने के लिए मैं कहीं और प्रतिदिन कुछ घंटे काम करता हूँ।
मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हमेशा छात्र रहे हैं, और आगे भी रहेंगे।YouTube पर लगातार free classes पढ़ा रहा हूँ। महीने में कई करोड़ लोग उन्हें देखते हैं और comment पढ़कर मेरी teaching का आसानी से आकलन कर सकते हैं।
इसलिए मेरी आप सबसे विनम्र प्रार्थना है कि व्यक्ति, मीडिया या YouTube Teachers की बहस में उलझने के बजाय उस असली मुद्दे पर ध्यान केंद्रित रखें, जिसने लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रखा है - पेपर लीक, भर्ती व्यवस्था की खामियाँ और युवाओं के साथ हो रहा अन्याय।
लड़ाई किसी एंकर से नहीं है।लड़ाई उस व्यवस्था से है जिसे ठीक होना चाहिए।
भाजपा सरकार ने तय कर लिया है कि जो भी उनकी घटिया शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा, उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
कुछ दिनों पहले CBSE के सड़े-गले सिस्टम तथा शिक्षा मंत्री के निकम्मेपन को उजागर करने वाले छात्र वेदांत को पाकिस्तानी घोषित कर दिया गया था।
अब प्रयागराज में तीन कोचिंग संस्थानों को बंद कर दिया गया है, क्योंकि इन संस्थानों के छात्रों ने लेखपाल भर्ती सहित कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
THIS IS KHAN SIR DESTROYING PAPER LEAK EXCUSES 🔥
REPORTER: NEET paper will now be transported by Air Force.
KHAN SIR 🎯: But malaria cannot be treated with typhoid injection.
REPORTER: Meaning?
KHAN SIR: The problem is not transport. The paper is leaking where it is printed and prepared.
REPORTER: What should happen?
KHAN SIR 🔥: Punish those who leaked it. Poor and middle-class students only ask one thing from the government: conduct exams honestly.
अभी-अभी खान सर ने अंजना ओम कश्यप को तगड़ा जवाब दिया है
अंजना ओम कश्यप और ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाने वाले टीचरों के बीच काफी तगड़ा विवाद हो गया है
अंजना ओम कश्यप का तो ऐसा हिसाब हो गया है एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी।
प्रयागराज में छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने वाले कोचिंग संस्थानों — क्लाइमैक्स, टारगेट विद रवि तिवारी और एग्जामपुर — को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संस्थानों के बाहर पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है।
सवाल यह है कि क्या युवाओं के भविष्य की बात करना अब अपराध बन गया है, क्या छात्रों के हक की आवाज़ उठाने वालों को दबाकर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
जो लोग देश को "विश्व गुरु" बनाने का दावा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि विश्व गुरु बनने का रास्ता शिक्षा के मंदिरों पर ताले लगाने से होकर जाता है या शिक्षा को मजबूत करने से,
युवाओं की मांगों का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए, दमन से नहीं। आवाज़ों को बंद करने से समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अविश्वास और बढ़ता है।
याद रखिए, जब छात्र अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँ, तो सवाल छात्रों पर नहीं, व्यवस्था पर उठते हैं।
क्योंकि किताबों से डरने वाली व्यवस्था कभी ज्ञान का नेतृत्व नहीं कर सकती।
#indianmedia #youtubeteachers #students
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?